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पति और देवर को उम्रकैद, सास को सात साल की सजा, 22 साल पहले किया था ये गुनाह

Fri, 28 Apr 2017 07:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Fri, 28 Apr 2017 07:17 PM IST
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Husband and brother-in-law, life imprisonment, saas is sentenced to seven years, what was matter
अदालत ने सुनाई सजा

मुजफ्फरनगर में अदालत ने शामली के गांव सिलावर में 22 साल पहले दहेज की खातिर की गई महिला की हत्या के मामले में पति और देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सास को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। जबकि जेठ और जेठानी को संदेह का लाभ देकर अदालत ने बरी कर दिया। सजा पाने वाले मुल्जिमों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता कविता की जिंदा जला कर हत्या कर दी थी।

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शामली जिले के थाना आदर्श मंडी पर गांव बुढ़ीना कलां निवासी ओमपाल सिंह ने 23 अप्रैल 1995 को दहेज हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया था कि उसकी भतीजी कविता की शादी फरवरी 1994 को गांव सिलावर निवासी अमरपाल के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर कविता को उत्पीड़ित करते थे। इसके चलते घटना के दिन 2 अप्रैल 1995 को कविता पर पति अमरपाल, जेठ नरेश, देवर संसार, सास धाराकौर, जेठानी रीना ने केरोसिन डाल कर आग लगा दी, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई। परिजनों ने उसे पहले मुजफ्फरनगर और मेरठ इसके बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर 21 दिनों तक जिंदगी से संघर्ष करते हुए उसने दम तोड़ दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे राजेश भारद्वाज की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीताराम आर्य ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए गवाह और सबूत कोर्ट में पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए बुधवार को अभियुक्त पति अमरपाल, देवर संसार, सास धाराकौर को दहेज के लिए हत्या करने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने कविता के पति अमरपाल और देवर संसार को आजीवन कारावास तथा सास धाराकौर को सात साल की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 7100-7100 रुपये का जुर्माना भी किया। अदालत ने  जेठ नरेश, जेठानी रीना को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
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मृत्यु पूर्व बयान बना सजा का आधार
दहेज हत्या करने वालों को सजा का आधार विवाहिता कविता का मृत्यु पूर्व बयान बना। जिला अस्पताल में भर्ती होने के दौरान गंभीर रूप से झुलसी कविता के मजिस्ट्रीयल बयान हुए थे, जिसमें कविता ने बताया था कि दहेज की मांग पूरी न होने पर ससुराल वालों ने उसे जिंदा जलाया है। मृत्यु पूर्व दिए गए मजिस्ट्रीयल बयान के आधार पर पति, देवर और सास को सजा हुई।

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