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औद्योगिक विकास का सपना कैसे होगा पूरा, हर जगह काम अधूरा

Thu, 26 Nov 2020 02:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 02:11 AM IST
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How will the dream of industrial development be fulfilled, work is incomplete everywhere
मेरठ। जिले में औद्योगिक विकास का सपना कब और कैसे पूरा होगा इसकी उम्मीद उद्यमी छोड़ चुके हैं। कभी आर्थिक पैकेज तो कभी निर्यात प्रोत्साहन केंद्र का प्रस्ताव आता है। उद्यमियों के अनुसार सब बातें हवाई लगती हैं। काम हो रहा है तो नजर भी आना चाहिए। हर प्रोजेक्ट में नए पेच हैं और काम अटका हुआ है। शासन ने उद्योगों को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तो कई दे दिए मगर धरातल पर अभी तक कुछ नजर नहीं आता।
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जिले में औद्योगिक विस्तार के लिए स्पोर्ट्स क्लस्टर बनना है। टेस्टिंग लैब बनाई जानी है। दो नए औद्योगिक क्षेत्र बनने की बात चल रही है। मगर कोई प्रोजेक्ट पूरा होता नहीं दिख रहा। किसी की डीपीआर अटकी है तो कहीं बजट बाधा बना है।
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डीपीआर में अटकी टेस्टिंग लैब
मोदीपुरम कृषि विवि के पास खेल उपकरणों की जांच के लिए लैब व डिस्पले मार्ट का निर्माण होना है। ओडीओपी योजना के तहत स्पोर्ट्स क्लस्टर जिले में बनाया जाना है। इसके लिए शासन से मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन टेस्टिंग लैब की डीपीआर का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। डीपीआर बनने के बाद शासन स्तर से फाइनल होगी इसके बाद ही काम शुरू होगा। इसलिए टेस्टिंग लैब का काम भी धीमा पड़ा है।
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शासन खोले खजाना तो बिके कताई मिल
बंद पड़ी परतापुर कताई मिल की लगभग 89 एकड़ भूमि पर नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होना है। मुख्यमंत्री स्वयं प्रोजेक्ट की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। यूपीएसआईडीसी द्वारा यहां नया इंडस्ट्रियल एरिया बसाया जाएगा। मिल राज्य सूत निगम की है शासन ने मिल का विक्रय मूल्य भी तय कर लिया है। लेकिन शासन से यूपीएसआईडीसी को पैसा न मिलने के कारण मिल हस्तांतरित नहीं हो पा रही है। शासन ने प्रदेश की तीन मिलों के लिए 241 करोड़ रुपये विक्रय मूल्य तय किया है बजट मिलते ही मिल यूपीएसआईडीसी को हस्तांतरित होगी यहां औद्योगिक क्षेत्र बनाने का काम शुरू होगा।
किसानों की जिद में अटका काजमाबाद गून
जिले में एक्सप्रेसवे के निकट औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए यूपीएसआईडीसी ने काजमाबाद गून में 250 एकड़ जमीन चिह्नित की है। लगभग 175 किसानों की इस जमीन का अधिग्रहण होकर यहां नया औद्योगिक क्षेत्र यूपीएसआईडीसी द्वारा बसाया जाना तय हुआ है। लेकिन किसानों से समझौता न होने के कारण मामला अटका हुआ है। किसान 3 हजार रुपये का रेट मांग रहे हैं जबकि यूपीएसआईडीसी इतना मूल्य देने को राजी नहीं हैं।
बड़ी बाधा जमीन की कमी
उद्योगों के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा जमीन की कमी है। उद्यमियों को इंडस्ट्री के लिए जमीन नहीं मिल रही। नए इंडस्ट्रियल एरिया बनें तो इंडस्ट्री बढ़ेे। कई इकाईयां विस्तार करना चाहती हैं लेकिन जमीन की कमी के कारण काम नहीं हो रहा। -पंकज गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए

योजना जल्द पूरी हो
मेरठ में खेल उत्पादों का निर्यात सबसे ज्यादा होता है। ओडीओपी के बाद निर्यात बढ़ा भी है, ऑनलाइन भी खेल उत्पाद बेचे जा रहे हैं। स्पोर्ट्स क्लस्टर बनाने की जो योजना है वो जल्दी पूरी हो तो उद्यमियो ंको उसका लाभ मिल सकता है। इससे खेल उत्पादों का कारोबार और बढ़ेगा। -सुमनेश अग्रवाल, स्पोर्ट्स कारोबारी
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