सीएम योगी कैसे कर पाएंगे अपने इस वादे को पूरा ? शेष बचे 28 दिन
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मेरठ में शहर की कुछ सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। कई मार्गों पर इतने गड्ढे हैं कि उन पर चलना भी दूभर है। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार सभी सड़कों को 15 जून तक गड्ढा मुक्त करना है। तय समय सीमा पूरी होने में मात्र 28 दिन ही शेष बचे हैं। अभी तक टेंडर प्रक्रिया ही पूरी हो पाई है। ऐसे में निर्धारित समय में सीएम के आदेश पर अमल करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
चीफ इंजीनियर नगर निगम कुलभूषण वार्ष्णेय का कहना है कि नगर निगम ने 59 सड़कों को चिन्हित कर लिया है। इनमें कुछ मुख्य मार्ग हैं तो कुछ गलियां भी शामिल हैं। सभी के टेंडर हो चुके हैं। सोमवार से सड़कों पर पेचवर्क शुरू होगा। ठेकेदारों को आदेश दिए जा चुके हैं। 15 जून से पहले नगर निगम अपने क्षेत्र की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर देगा।
केस-1
केस-1
दिल्ली रोड से सरस्वती लोक मार्ग की हालत बद से बदतर है। एक साल पहले ही एमडीए ने लाखों रुपये खर्च करके सड़क निर्माण कराया था। कुछ समय बाद सड़क टूट गई। बाद में दबाव पड़ने पर ठेकेदार ने पेंचवर्क कराया था। लेकिन अब सात-आठ माह से सड़क गड्ढों में बदल चुकी है, लेकिन प्रशासन सुध नहीं ले रहा है।
केस-2
केस-2
शहर में नगर निगम, एमडीए, पीडब्लूडी को बनवानी हैं सड़कें
घंटाघर से रेलवे रोड चौराहा तक सड़क पूरी तरह टूटी हुई है। तीन माह से अधिक समय से इसी सड़क से शहर का भारी यातायात गुजर रहा है। इस सड़क का निर्माण एमडीए की जिम्मेदारी है, लेकिन सीएम के आदेश के बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
केस-3
रोहटा रोड गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। यहां पैदल चलना भी मुश्किलों भरा काम है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन समस्या जस की तस है। सीएम के आदेश जारी होने के बाद भी जनता इस सड़क के दिन बहुरने का इंतजार कर रही है।
59 सड़कों पर काम करेगा नगर निगम
59 सड़कों पर काम करेगा नगर निगम
टूटी सड़कों को बनाने के लिए नगर निगम, एमडीए, पीडब्लूडी और अन्य विभाग मिलकर काम करेंगे। लगभग 200 सड़कों पर काम होना है। 59 सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी नगर निगम ने ली है। 120 सड़कों पर एमडीए और पीडब्लूडी तथा शेष पर अन्य विभाग मिलकर काम करेंगे। नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए तीन करोड़ 36 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव तैयार किया है। अधिकांश विभागों के टेंडर जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी कहीं भी काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में नियत समय में काम पूरा होने में संशय है।