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कब तक डमी परीक्षा कार्यक्रम बनाए विवि

Fri, 10 Jul 2020 02:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2020 02:12 AM IST
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How long will the university make a dummy examination program
कब तक डमी परीक्षा कार्यक्रम बनाए विवि
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीसरी बार डमी परीक्षा कार्यक्रम तैयार कर लिया है, लेकिन परीक्षा की तिथि को लेकर अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यूजीसी ने सितंबर में परीक्षा कराने के जो निर्देश जारी किए हैं, इस पर अंतिम फैसला शासन को लेना है। इसके चलते सीसीएसयू ही नहीं प्रदेश के 48 लाख छात्रों का पूरा भविष्य सिर्फ संभावनाओं पर टिका हुआ है।
विवि प्रशासन की समझ में नहीं आ रहा कि करें तो क्या करें। पहले शासन ने 30 जून के बाद परीक्षाएं कराने के लिए विवि को निर्देश दिए। विवि प्रशासन ने 15 जुलाई से परीक्षा कराने का प्रस्ताव तैयार करके प्रदेश सरकार को भेज दिया। इसमें बताया गया कि अगर फाइनल ईयर की परीक्षाएं ही कराते हैं तो भी करीब 30 दिन लगेंगे, लेकिन शासन ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया है।
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परीक्षा की बजाय प्रोन्नत करने की दी गई सिफारिश
प्रदेश सरकार ने परीक्षा कराने या नहीं कराने को लेकर सीसीएसयू के कुलपति की अध्यक्षता में चार कुलपति की समिति गठित की थी। 20 जून को समिति ने उप मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि कोरोना के खतरे को देखते हुए परीक्षाएं रद्द करते हुए सभी छात्रों को प्रोन्नत कर दिया जाए। सरकार ने इस पर दो जुलाई को गाइड लाइन जारी करने की बात कही थी, लेकिन इस पर भी कोई जवाब नहीं आया।
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यूजीसी ने जारी किए निर्देश, सितंबर में करा सकते हैं परीक्षा
अब यूजीसी ने सितंबर महीने का परीक्षा कराने का समय दिया है, जिस पर सीसीएसयू ने डमी तौर पर 17 अगस्त से परीक्षाएं कराने का कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें रविवार को भी परीक्षाएं रखी गई हैं। ऐसे में भी ये परीक्षाएं एक महीने तक चलेंगी। लेकिन इसको लेकर अंतिम फैसला भी प्रदेश सरकार को लेना है।
1.72 छात्रों के अलावा बाकी पर कोई निर्णय नहीं
वार्षिक प्रणाली में बीए-बीएससी-बीकॉम में फाइनल ईयर में 83 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। एमए-एमकॉम फाइनल प्राइवेट में 26 हजार छात्र-छात्राएं हैं। इसके अलावा सेमेस्टर कोर्सों में भी 63 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। इन सबकी संख्या 1 लाख 72 हजार के करीब है। इनके पेपर ही पहले कराने को कहा गया है। ऐसे में वार्षिक प्रणाली में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष एवं सेमेस्टर के बाकी छात्रों की परीक्षाएं होंगी या नहीं। इस बारे में यूजीसी ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं। ऐसे छात्रों की संख्या तीन लाख के करीब है।
सितंबर में रहा कोरोना तो जीरो हो जाएगा सत्र
जिस तरह से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, अगर वह सितंबर तक कंट्रोल नहीं हुए तो परीक्षाएं नहीं हो सकेंगी। ऐसे हालात में पूरा सत्र जीरो हो जाएगा। क्योंकि जब तक फइनल ईयर का रिजल्ट नहीं आएगा तब तक पीजी कोर्सों में एडमिशन नहीं हो पाएंगे।

परीक्षा का विरोध हुआ शुरू
मेरठ। फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराए जाने का विरोध शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को मेरठ कॉलेज के शताब्दी द्वार पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव हुसैन सुल्तानिया और प्रदेश अध्यक्ष रोहित राणा के नेतृत्व में कायकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला ने भी परीक्षा रद्द कर छात्रों को प्रमोट करने की मांग की। प्रदर्शन में सुर्यांश तोमर, नितीश भारद्वाज, अल्तमस त्यागी, राकेश कुशवाहा, मगन शर्मा, हर्ष ढाका, आमिर चौहान, रविंद्र बिष्ट कपिल जैन अमन और जावेद आदि शामिल रहे।
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