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कोरोना के शोर में दबकर रह गई न्याय की उम्मीद, थानों की फाइलों में गुम हुई इंसाफ मांगने वालों की आवाज

Wed, 08 Jul 2020 01:30 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 08 Jul 2020 01:30 AM IST
सार

- थानों की फाइलों में दबती जा रही इंसाफ मांगने वाले लोगों की आवाज 
- पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने से खुली हवा में सांस ले रहे अपराधी  

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hope of justice remained suppressed in the noise of Corona, criminals are
क्राइम न्यूज यूपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनपद में फैले कोरोना संक्रमण ने तरह-तरह से लोगों को प्रभावित किया है। न्याय प्रक्रिया भी इससे अछूति नहीं रही। लोगों को पुलिस से न्याय नहीं मिल पाया और उनकी आवाज दबकर रह गई।
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ऐसे काफी मामले हैं जो कोरोना संकट से काफी पहले निकलकर सामने आए, लेकिन पुलिस के रुचि न लेने के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका। इसका लाभ सीधा अपराधियों को पहुंचा। अब अनलॉक के दौरान पीड़ित फिर से अफसरों की तरफ उम्मीद की निगाह से देख रहे हैं।  
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केस-1: 
थाना लालकुर्ती के मैदा मोहल्ला निवासी अमरजीत सोनकर के छोटे भाई की बेटी की शादी 9 दिसंबर, 2019 को थी। कार्यक्रम एक नजदीकी मंडप में था। परिवार के सभी लोग और रिश्तेदार मंडप में गए हुए थे। बदमाश घर में घुस आए और शादी में आए रिश्तेदारों और घर की महिलाओं के सोने के जेवर, 50 लाख नकद समेट कर ले गए। छह महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन घटना नहीं खुल पाई है।
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केस-2 : 
शास्त्रीनगर निवासी महिला मंजू शर्मा और एक अन्य युवक शौर्य के खिलाफ जवाहर क्वार्टर निवासी प्रेमलता ने सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी सहित कई मामलों में नवंबर, 2019 में मुकद्दमा पंजीकृत कराया।

आरोपी महिला केंद्रीय कर्मचारी थी और समय से पहले नौकरी छोड़कर लाखों रुपये लेकर फरार हो गई। कई अन्य लोगों ने भी महिला पर ठगी का आरोप लगाया। आरोप है कि पुलिस मामले से जुड़ी फाइल दबा चुकी है। जिस कारण महिला खुली घूम रही है।    

अफसर भी हुए पीड़ितों की पहुंच से दूर 
ऐसे काफी मामले हैं जो कोरोना काल में दबकर रह गए हैं। लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में कैद हो गए। कुछ ने जैसे-तैसे बाहर आकर अफसरों से गुहार लगाने का प्रयास भी किया लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। इसी का फायदा उठाकर थाना पुलिस मामलों को दबाकर बैठ गई। अब एक बार फिर अफसरों के कार्यालयों में बैठने के बाद पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जरूर जगी है।  
 
कोरोना संक्रमण के चलते पुलिस ने अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली है। जहां तक घटनाओं के खुलासे की बात है तो उसको लेकर भी पुलिस काम कर रही है। अपराधी किसी भी कीमत पर बच नहीं सकेंगे। - राम अर्ज, एसपी क्राइम

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