कोरोना के शोर में दबकर रह गई न्याय की उम्मीद, थानों की फाइलों में गुम हुई इंसाफ मांगने वालों की आवाज
- थानों की फाइलों में दबती जा रही इंसाफ मांगने वाले लोगों की आवाज
- पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने से खुली हवा में सांस ले रहे अपराधी
विस्तार
ऐसे काफी मामले हैं जो कोरोना संकट से काफी पहले निकलकर सामने आए, लेकिन पुलिस के रुचि न लेने के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका। इसका लाभ सीधा अपराधियों को पहुंचा। अब अनलॉक के दौरान पीड़ित फिर से अफसरों की तरफ उम्मीद की निगाह से देख रहे हैं।
केस-1:
थाना लालकुर्ती के मैदा मोहल्ला निवासी अमरजीत सोनकर के छोटे भाई की बेटी की शादी 9 दिसंबर, 2019 को थी। कार्यक्रम एक नजदीकी मंडप में था। परिवार के सभी लोग और रिश्तेदार मंडप में गए हुए थे। बदमाश घर में घुस आए और शादी में आए रिश्तेदारों और घर की महिलाओं के सोने के जेवर, 50 लाख नकद समेट कर ले गए। छह महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन घटना नहीं खुल पाई है।
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केस-2 :
शास्त्रीनगर निवासी महिला मंजू शर्मा और एक अन्य युवक शौर्य के खिलाफ जवाहर क्वार्टर निवासी प्रेमलता ने सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी सहित कई मामलों में नवंबर, 2019 में मुकद्दमा पंजीकृत कराया।
आरोपी महिला केंद्रीय कर्मचारी थी और समय से पहले नौकरी छोड़कर लाखों रुपये लेकर फरार हो गई। कई अन्य लोगों ने भी महिला पर ठगी का आरोप लगाया। आरोप है कि पुलिस मामले से जुड़ी फाइल दबा चुकी है। जिस कारण महिला खुली घूम रही है।
अफसर भी हुए पीड़ितों की पहुंच से दूर
ऐसे काफी मामले हैं जो कोरोना काल में दबकर रह गए हैं। लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में कैद हो गए। कुछ ने जैसे-तैसे बाहर आकर अफसरों से गुहार लगाने का प्रयास भी किया लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। इसी का फायदा उठाकर थाना पुलिस मामलों को दबाकर बैठ गई। अब एक बार फिर अफसरों के कार्यालयों में बैठने के बाद पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जरूर जगी है।
कोरोना संक्रमण के चलते पुलिस ने अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली है। जहां तक घटनाओं के खुलासे की बात है तो उसको लेकर भी पुलिस काम कर रही है। अपराधी किसी भी कीमत पर बच नहीं सकेंगे। - राम अर्ज, एसपी क्राइम