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गंगा की लहरों से राहत की उम्मीद, कटान जारी
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बस्तोरा नारंग गांव के समीप कटान करती गंगा नदी स्रोत संवाद
- तीन दिन से गंगा का जलस्तर चल रहा स्थिर
हस्तिनापुर। गंगा नदी ने खादर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की जिंदगी में गहरे जख्म दिए हैं। जो सपने उन्होंने वर्षों पूर्व संजोए थे वह भी डुबो दिए हैं। गंगा में पानी का स्तर भले ही घट गया हो, लेकिन मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। तीन दिन से गंगा का जलस्तर स्थिर चल रहा है।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि मंगलवार को गंगा का जलस्तर शाम 5:00 बजे 85 हजार क्यूसेक पर चल रहा था। गंगा का जलस्तर पिछले तीन दिनों से लगातार इसी स्थिति में चल रहा है। इससे गांव बस्तोरा नारंग के समीप गंगा भीषण कटान कर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रही है। भयभीत किसान अपने खेतों को बर्बाद होते देख गांव से पलायन कर गए हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद यहां बर्बादी के निशान और लोगों दिलों में खौफ मिटने में वर्षों लग जाएंगे। यहां के लोगों को अब सिर्फ राहत नहीं, बल्कि एक मजबूत सहारे की जरूरत है। गांव की टूटी सड़कें, घरों में पहुंची सिल्ट, दीवारों पर पानी के गहरे निशान यह सब भयावह सपने जैसा है।
ग्रामीण 70 वर्षीय ओसपाल सिंह कहते हैं कि बाढ़ से सब कुछ खत्म हो गया। जब गंगा का पानी गांव में घुसा तो ऐसा लगा कि अब जीवित नहीं बच पाएंगे। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए, पर हम अपना घर कैसे छोड़ देते। पाई-पाई जोड़कर घर बनाया था। अब घर की दीवारें खराब हो गई हैं और सामान सड़ गया है।
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किसान प्रेम सिंह चौहान का कहना है कि उनके खेतों में जहां कुछ हफ्ते पहले हरी भरी फसल लहलहा रही थी, वह खेत अब गंगा में समा गए हैं। बाकी बचे खेतों में अब पानी में गली हुई काली पड़ चुकी पराली और सड़न के सिवा कुछ नहीं है।
हर आहट पर लगता है पानी आ गया
ग्रामीण गुरमीत सिंह ने बताया कि घर की चहारदीवारी ढह चुकी है। पानी ने सिर्फ भयभीत ही नहीं किया, बल्कि लोगों का हौसला भी तोड़ दिया है। बच्चे डरे हुए हैं। हर आहट पर उन्हें लगता है कि फिर से पानी आ गया। सबसे बड़ी चिंता अब संक्रामक बीमारियों के फैलने की है। पानी के कारण डेंगू, मलेरिया, हैजा और त्वचा संबंधी रोगों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, मवेशी बीमार हैं। गांव के लोगों की सरकार से मांग है कि उन्हें केवल मुआवजा नहीं, बल्कि गांव के सामने पक्के तटबंध का निर्माण चाहिए।बस्तोरा नारंग निवासी किसान रानू सिंह का कहना है कि गांव में पिछले 40 वर्षों में भी ऐसी बढ़ नहीं आई, जब गांव में इतने बड़े पैमाने पर फसलों की तबाही हुई हो।
प्रशासन से राहत की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव गंगा के नजदीक पहुंच गया है और कभी भी गंगा में समा सकता है। गंगा का कटान देखकर ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीणों ने गांव से पलायन कर दिया है। कुछ ग्रामीण ही गांव में मौजूद हैं। उन्हें सुरक्षित स्थान पर मकान के लिए प्लाट आवंटित किए जाएं, जिससे वह अपने बच्चों का जीवन सुरक्षित बचा सकें। अब उन्हें शासन प्रशासन से ही इसकी उम्मीद है, जिसकी मांग वह लगातार कर रहे हैं।
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हस्तिनापुर। गंगा नदी ने खादर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की जिंदगी में गहरे जख्म दिए हैं। जो सपने उन्होंने वर्षों पूर्व संजोए थे वह भी डुबो दिए हैं। गंगा में पानी का स्तर भले ही घट गया हो, लेकिन मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। तीन दिन से गंगा का जलस्तर स्थिर चल रहा है।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि मंगलवार को गंगा का जलस्तर शाम 5:00 बजे 85 हजार क्यूसेक पर चल रहा था। गंगा का जलस्तर पिछले तीन दिनों से लगातार इसी स्थिति में चल रहा है। इससे गांव बस्तोरा नारंग के समीप गंगा भीषण कटान कर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रही है। भयभीत किसान अपने खेतों को बर्बाद होते देख गांव से पलायन कर गए हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद यहां बर्बादी के निशान और लोगों दिलों में खौफ मिटने में वर्षों लग जाएंगे। यहां के लोगों को अब सिर्फ राहत नहीं, बल्कि एक मजबूत सहारे की जरूरत है। गांव की टूटी सड़कें, घरों में पहुंची सिल्ट, दीवारों पर पानी के गहरे निशान यह सब भयावह सपने जैसा है।
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ग्रामीण 70 वर्षीय ओसपाल सिंह कहते हैं कि बाढ़ से सब कुछ खत्म हो गया। जब गंगा का पानी गांव में घुसा तो ऐसा लगा कि अब जीवित नहीं बच पाएंगे। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए, पर हम अपना घर कैसे छोड़ देते। पाई-पाई जोड़कर घर बनाया था। अब घर की दीवारें खराब हो गई हैं और सामान सड़ गया है।
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किसान प्रेम सिंह चौहान का कहना है कि उनके खेतों में जहां कुछ हफ्ते पहले हरी भरी फसल लहलहा रही थी, वह खेत अब गंगा में समा गए हैं। बाकी बचे खेतों में अब पानी में गली हुई काली पड़ चुकी पराली और सड़न के सिवा कुछ नहीं है।
हर आहट पर लगता है पानी आ गया
ग्रामीण गुरमीत सिंह ने बताया कि घर की चहारदीवारी ढह चुकी है। पानी ने सिर्फ भयभीत ही नहीं किया, बल्कि लोगों का हौसला भी तोड़ दिया है। बच्चे डरे हुए हैं। हर आहट पर उन्हें लगता है कि फिर से पानी आ गया। सबसे बड़ी चिंता अब संक्रामक बीमारियों के फैलने की है। पानी के कारण डेंगू, मलेरिया, हैजा और त्वचा संबंधी रोगों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, मवेशी बीमार हैं। गांव के लोगों की सरकार से मांग है कि उन्हें केवल मुआवजा नहीं, बल्कि गांव के सामने पक्के तटबंध का निर्माण चाहिए।बस्तोरा नारंग निवासी किसान रानू सिंह का कहना है कि गांव में पिछले 40 वर्षों में भी ऐसी बढ़ नहीं आई, जब गांव में इतने बड़े पैमाने पर फसलों की तबाही हुई हो।
प्रशासन से राहत की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव गंगा के नजदीक पहुंच गया है और कभी भी गंगा में समा सकता है। गंगा का कटान देखकर ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीणों ने गांव से पलायन कर दिया है। कुछ ग्रामीण ही गांव में मौजूद हैं। उन्हें सुरक्षित स्थान पर मकान के लिए प्लाट आवंटित किए जाएं, जिससे वह अपने बच्चों का जीवन सुरक्षित बचा सकें। अब उन्हें शासन प्रशासन से ही इसकी उम्मीद है, जिसकी मांग वह लगातार कर रहे हैं।

बस्तोरा नारंग गांव के समीप कटान करती गंगा नदी स्रोत संवाद

बस्तोरा नारंग गांव के समीप कटान करती गंगा नदी स्रोत संवाद