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गृह मंत्रालय ने निरस्त की रासुका, राजीव जैन रिहा
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मेरठ। मिलावटी तेल के मामले में पुलिस प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है। पारस केमिकल फैक्टरी के मालिक राजीव जैन पर लगे रासुका को गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। इस संबंध गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार रात जेल प्रशासन को पत्र भेज दिया था। इसके बाद शुक्रवार रात राजीव जैन को जेल से रिहा कर दिया गया। रासुका खारिज होने के पीछे पुलिस की ढुलमुल रिपोर्ट को कारण बताया जा रहा है।
एसपी देहात अविनाश पांडे के नेतृत्व में पुलिस ने 20 अगस्त को परतापुर थाना क्षेत्र में दो केमिकल फैक्टरियों पर छापा मारकर नकली डीजल पेट्रोल के कारोबार का खुलासा किया था। यह नकली तेल पारस केमिकल फैक्टरी और गणपति पेट्रोकेम पर तैयार हो रहा था। मौके से दो लाख लीटर के आसपास नकली तेल फैक्टरी में खड़े टैंकराें के साथ भूमिगत टैंकरों में पाया गया था। 10 लोगाें को मौके से गिरफ्तार किया था, जबकि एक को बाद में गिरफ्तार किया गया था। पारस केमिकल फैक्ट्री के मालिक राजीव जैन पर पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने रासुका की संस्तुति कर उत्तर प्रदेश शासन, हाईकोर्ट और गृहमंत्रालय को भेजा था। राजीव जैन को छोड़कर इस मामले में गिरफ्तार अन्य सभी की जमानत हो चुकी है। रासुका को स्वीकृति के लिए 7 अक्तूबर को शासन की एडवाइजरी बोर्ड के सामने जिलाधिकारी और एसएसपी के बयान हुए थे। एडवाइजरी बोर्ड के फैसले से पहले ही गृह मंत्रालय ने रासुका को खारिज कर जेल प्रशासन को पत्र भेज दिया गया।
पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
तेल के खेल में जिस तरह पुलिस जांच चल रही है, उसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। 20 अगस्त को मारे गये छापे के एक सप्ताह तक तो पुलिस अलर्ट नजर आई, लेकिन इसके बाद पुलिस का रवैया पूरी तरह बदल गया। रासुका में निरुद्ध करने के लिए जो रिपोर्ट भेजी गई, वह भी साक्ष्यों के साथ मजबूती से प्रस्तुत नहीं की गई। जिसका लाभ सीधे सीधे अभियुक्तों को मिला।
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एसपी देहात अविनाश पांडे के नेतृत्व में पुलिस ने 20 अगस्त को परतापुर थाना क्षेत्र में दो केमिकल फैक्टरियों पर छापा मारकर नकली डीजल पेट्रोल के कारोबार का खुलासा किया था। यह नकली तेल पारस केमिकल फैक्टरी और गणपति पेट्रोकेम पर तैयार हो रहा था। मौके से दो लाख लीटर के आसपास नकली तेल फैक्टरी में खड़े टैंकराें के साथ भूमिगत टैंकरों में पाया गया था। 10 लोगाें को मौके से गिरफ्तार किया था, जबकि एक को बाद में गिरफ्तार किया गया था। पारस केमिकल फैक्ट्री के मालिक राजीव जैन पर पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने रासुका की संस्तुति कर उत्तर प्रदेश शासन, हाईकोर्ट और गृहमंत्रालय को भेजा था। राजीव जैन को छोड़कर इस मामले में गिरफ्तार अन्य सभी की जमानत हो चुकी है। रासुका को स्वीकृति के लिए 7 अक्तूबर को शासन की एडवाइजरी बोर्ड के सामने जिलाधिकारी और एसएसपी के बयान हुए थे। एडवाइजरी बोर्ड के फैसले से पहले ही गृह मंत्रालय ने रासुका को खारिज कर जेल प्रशासन को पत्र भेज दिया गया।
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पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
तेल के खेल में जिस तरह पुलिस जांच चल रही है, उसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। 20 अगस्त को मारे गये छापे के एक सप्ताह तक तो पुलिस अलर्ट नजर आई, लेकिन इसके बाद पुलिस का रवैया पूरी तरह बदल गया। रासुका में निरुद्ध करने के लिए जो रिपोर्ट भेजी गई, वह भी साक्ष्यों के साथ मजबूती से प्रस्तुत नहीं की गई। जिसका लाभ सीधे सीधे अभियुक्तों को मिला।
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