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Meerut News: हिंदू नवसंवत्सर...100 साल बाद दुर्लभ योग देगा सुख-समृद्धि
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मेरठ। शीत ऋतु को विदा करते हुए वसंत ऋतु के सुहावने परिवेश के साथ 30 मार्च को हिंदू नववर्ष आरंभ हो रहा है। हिंदू नवसंवत्सर पर 100 साल बाद विशेष शुभ संयोगों का अद्वितीय संयोजन बन रहा है। यह दिन अत्यधिक फलदायी साबित होगा। हिंदू नववर्ष-2025 के राजा और मंत्री सूर्य देव हैं। वह नए वर्ष के स्वागत के साथ हम नई आशाओं और सकारात्मकता के साथ जीवन की शुरुआत करते हैं। सरकारी नौकरी वालों को इस साल सबसे अधिक लाभ मिलेगा। वहीं, कई अप्रत्याशित घटनाक्रम भी सामने आएंगे।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सूर्य और चंद्रमा दोनों ही मीन राशि में विराजमान होंगे। राजा सूर्य अपनी पंचायत मीन राशि में लगाएंगे। इसमें सूर्य के साथ चंद्रमा, शनि, बुध, राहु पांच ग्रहों की युति रहेगी। गुरु और चंद्रमा की युति सकारात्मक योग का निर्माण करेगी। इससे यह वर्ष समृद्धि और भाग्य का संचार करेगा।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि भारत में एक बड़ा वर्ग चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नववर्ष का उत्सव मनाता है। सनातन धर्म के अनुसार इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ था। यह दिवस हिंदू समाज के लिए अत्यंत विशिष्ट है। इस तिथि से ही नया पंचांग प्रारंभ होता है। वर्षभर के पर्व, उत्सव और अनुष्ठानों के शुभ मुहूर्त निश्चित होते हैं। पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार 30 मार्च को है। इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। इस बार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत-2082 के रूप में आएगा।
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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि इस बार ग्रहों के राजा सूर्य रहेंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस वर्ष राजा सूर्य होगा, उस वर्ष वर्षा कहीं तो बहुत ही अत्यधिक होती है और कहीं बेहद कम। पृथ्वी पर मांगलिक कार्य अधिक होंगे। लोगों में दान-दया एवं धार्मिक कार्यों में प्रवृत्ति बढ़ेगी। स्वास्थ्य संबंधी चेतना एवं जागरूकता बढ़ेगी। इस वर्ष सूर्य देव को मंत्री पद भी प्राप्त होगा। इससे इस वर्ष राजाओं को भय, प्रशासकों व राजनीतिक पार्टियों में परस्पर विरोध बढ़ता है। जनोपयोगी वस्तुएं महंगी होगी। शुक्र और बुध की अनुकूल स्थिति व्यापार और व्यवसाय में प्रगति को सुनिश्चित करेगी।
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कई कारणों से महत्वपूर्ण
हिंदू समाज नववर्ष का पहला दिन अत्यंत हर्षोल्लास से मनाते हैं। इसी दिन श्रीराम और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था। मां दुर्गा की साधना के लिए चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस विशेष होता है। आर्य समाज का स्थापना दिवस, संत झूलेलाल की जयंती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का भी जन्मदिन है। इन कारणों से भी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का दिन विशेष बन जाता है।
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ग्रहों की स्थिति
संवत्सर का नाम- सिद्धार्थी
संवत्सर के राजा- सूर्य
संवत्सर के मंत्री- सूर्य
संवत्सर के सेनापति- शनि
संवत्सर का वास- धोबी के घर
संवत्सर का वाहन-अश्व
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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सूर्य और चंद्रमा दोनों ही मीन राशि में विराजमान होंगे। राजा सूर्य अपनी पंचायत मीन राशि में लगाएंगे। इसमें सूर्य के साथ चंद्रमा, शनि, बुध, राहु पांच ग्रहों की युति रहेगी। गुरु और चंद्रमा की युति सकारात्मक योग का निर्माण करेगी। इससे यह वर्ष समृद्धि और भाग्य का संचार करेगा।
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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि भारत में एक बड़ा वर्ग चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नववर्ष का उत्सव मनाता है। सनातन धर्म के अनुसार इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ था। यह दिवस हिंदू समाज के लिए अत्यंत विशिष्ट है। इस तिथि से ही नया पंचांग प्रारंभ होता है। वर्षभर के पर्व, उत्सव और अनुष्ठानों के शुभ मुहूर्त निश्चित होते हैं। पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार 30 मार्च को है। इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। इस बार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत-2082 के रूप में आएगा।
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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि इस बार ग्रहों के राजा सूर्य रहेंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस वर्ष राजा सूर्य होगा, उस वर्ष वर्षा कहीं तो बहुत ही अत्यधिक होती है और कहीं बेहद कम। पृथ्वी पर मांगलिक कार्य अधिक होंगे। लोगों में दान-दया एवं धार्मिक कार्यों में प्रवृत्ति बढ़ेगी। स्वास्थ्य संबंधी चेतना एवं जागरूकता बढ़ेगी। इस वर्ष सूर्य देव को मंत्री पद भी प्राप्त होगा। इससे इस वर्ष राजाओं को भय, प्रशासकों व राजनीतिक पार्टियों में परस्पर विरोध बढ़ता है। जनोपयोगी वस्तुएं महंगी होगी। शुक्र और बुध की अनुकूल स्थिति व्यापार और व्यवसाय में प्रगति को सुनिश्चित करेगी।
कई कारणों से महत्वपूर्ण
हिंदू समाज नववर्ष का पहला दिन अत्यंत हर्षोल्लास से मनाते हैं। इसी दिन श्रीराम और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था। मां दुर्गा की साधना के लिए चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस विशेष होता है। आर्य समाज का स्थापना दिवस, संत झूलेलाल की जयंती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का भी जन्मदिन है। इन कारणों से भी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का दिन विशेष बन जाता है।
ग्रहों की स्थिति
संवत्सर का नाम- सिद्धार्थी
संवत्सर के राजा- सूर्य
संवत्सर के मंत्री- सूर्य
संवत्सर के सेनापति- शनि
संवत्सर का वास- धोबी के घर
संवत्सर का वाहन-अश्व