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#हिंदीहैंहम अमर उजाला वेबिनार: मातृभाषा के विकास के लिए बाजार को हिंदी में प्रस्तुत करनी होंगी चीजें- निशांत जैन

Sun, 13 Sep 2020 02:21 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 13 Sep 2020 02:21 PM IST
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#Hindihainhum, how to get employment in Hindi, Ask IAS Nishant Jain with Amar Ujala today
निशांत जैन - फोटो : amar ujala

अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत दोपहर2 बजे हिंदी में रोजगार और चुनौतियां विषय पर संवाद का मेरठ में ऑनलाइन आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन संवाद में 2015 बैच के आईएएस अधिकारी और लेखक निशांत जैन युवाओं के सवालों के जवाब दिए। आयोजन का सजीव (live) प्रसारण अमर उजाला मेरठ के फेसबुक पेज पर किया गया जहां पाठकों ने निशांत जैन से सीधे सवाल पूछे।

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मेरठ में जन्मे निशांत जैन सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक पाकर हिंदी/भारतीय भाषा मीडियम के टॉपर बने। निशांत हिन्दी साहित्य में नेट जेआरएफ उत्तीर्ण हैं। वर्तमान में राजस्थान सरकार के वित्त विभाग में संयुक्त सचिव हैं।
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अमर उजाला मेरठ के फेसबुक पेज से जुड़कर यूजर्स ने घर बैठे ही निशांत जैन से सवाल पूछे और हिंदी भाषा को लेकर अपनी सभी जिज्ञासाएं दूर की। इस दौरान निशांत जैन ने हिंदी को कॅरियर के रूप में कैसे अपनाया जा सकता है, इसे रोजगार का जरिया कैसे बनाया जा सकता है। इस संबंध में जानकारी दी।
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प्रश्न: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा क्या महत्व रखता है? -माहीं
उत्तर: इंग्लिश, मैथ्स रीजिनिंग का ज्ञान जरूरी है। आप इंग्लिश से भाग नहीं सकते। एक या दो अखबार को दिन में अवश्य पढ़ें। दैनिक रूप से एक मासिक पत्रिका पढ़ें ताकि देश और दुनिया की तमाम जानकारियां आपको मिल सकें। 

प्रश्न: आज जब युवा ऐसी जाॅब चाहते हैं कि सफलता जल्दी मिले, ऐसे में भाषा के माध्यम से कॅरियर बनाना कितना उपयुक्त है?  -निधि भाकुनी
उत्तर: हिंदी लेखन में काफी संभावनाएं बढ़ी हैं। ट्रांसलेशन में काफी काम है। एडिटिंग, प्रूफ रीडिंग आदि में काफी विकल्प हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें अब हिंदी में आ रही हैं और इसका बहुत विशाल मार्केट है। जिसमें आप थोड़ी मेहनत के साथ ही अपनी पहचान बना सकते हैं। इसके अलावा टीचिंग में रिसर्च के क्षेत्र में अपना कॅरियर बना सकते हैं।

प्रश्न:  एक यूजर ने पूछा कि बच्चों में हिंदी भाषा के विकास के लिए क्या करना चाहिए? 
उत्तर:
माता पिता में वर्तमान में बच्चे को शुरुआत से ही हिंदी से दूर करने लगते हैं। हम उन्हें 'काउ' पढ़ाना सिखाते हैं न कि 'गाय' बताएंगे। इसी तरह वह स्कूल में सीखते हैं और इस तरह अंगे्रजी की महत्ता बढ़ जाती है।यदि आपको बच्चे को हिंदी सिखानी है तो आपको हिंदी की मैग्जीन उन्हें लाकर दें, कहानियों की किताबें उन्हें लाकर दें। इससे उनका शब्दकोष मजबूत होगा। नए चरित्रों से वे परिचित होंगे।

प्रश्न:  अक्सर देखा जाता है कि ट्रनी टीचर्स जो इंग्लिश मीडियम से आते हैं वह बच्चों को हिंदी पढ़ाने में असहज महसूस करते हैं। उन्हें दोनों भाषाओं के लिए कैसे कुशल बनाया जाना चाहिए?  -अर्तिका गुप्ता
उत्तर:हिंदी आत्मा की भाषा है, हिंदी सम्मान की भाषा है। इसके इस्तेमाल में शर्म नहीं होनी चाहिए। लेकिन लोगों के साथ ये समस्या है कि कई बार वह हिंदी का अखबार भी ठीक से नहीं पढ़ पाते। ऐसे में यदि हिंदी कमजोर है तो बच्चों की पत्रिकाएं मंगाकर पढ़ें। यदि कोई ट्रेनी टीचर हिंदी पढ़ाने में कतराते हैं तो यह उनकी मन की धारणा है। उन्हें इससे उबरना चाहिए।


प्रश्न:  हिंदी बोलने में लोग शर्म महसूस क्यों करते हैं?  -पीयूष गोयल
उत्तर:
हिंदी के प्रति हीन भावना से हमें उबरना होगा। दक्षिण भारत में देखेंगे तो वहां के लोग तीन भाषाएं सीखते हैं, ऐसे में हमें कम से कम दो भाषाओं का तो ज्ञान होना ही चाहिए। अंग्रेजी का बढ़ावा दें लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि आप हिंदी को नजरअंदाज करें। हिंदी आत्मा की भाषा है, हिंदी सम्मान की भाषा है। इसके इस्तेमाल में शर्म नहीं होनी चाहिए।

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