दुखद : मेरठ में हिंदी भवन से बेघर हुईं तीन हजार से ज्यादा किताबें, भैंसों का तबेला बना पुस्तकालय
हिंदी भवन धन के अभाव के चलते समय के साथ अपना अस्तित्व खो बैठा है। किराए पर जो लोग रह रहे थे, उन्होंने हिंदी भवन पर कब्जा कर लिया। 12 वर्ष से हिंदी भवन में कोई आयोजन नहीं हुआ।
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मेरठ में हिंदी साहित्य के क्षेत्र में ख्यातिलब्ध रहा पटेलनगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन वर्तमान में अपना अस्तित्व खो चुका है। कभी बुद्धिजीवी वर्ग की परिचर्चा का केंद्र रहने वाला पुस्तकालय अब भैंसों के तबेले के नाम से जाना जाता है। पुरानी पहचान दिलाने के प्रयास परवान नहीं चढ़ सके हैं। यह वही हिंदी भवन है, जहां से हिंदी साहित्य पढ़कर 100 से अधिक लोग पीएचडी की उपाधि ले चुके हैं।
हिंदी भवन को जीर्णोद्धार के लिए सहायता नहीं मिलने से पदाधिकारियों की उम्मीद टूट रही है। पुस्तकालय की 3600 पुस्तकों में कुछ संगठन के पदाधिकारियों के घर और कुछ बच्चा पार्क शर्मा स्मारक के कमरों में बोरियों में सालों से रखी हैं।
कोविड के चलते हिंदी भवन समिति की बैठक नहीं हुई है। ऐसे में पदाधिकारियों में हिंदी भवन के निर्माण को लेकर अलग राय भी बन रही है। एक पक्ष जहां पटेलनगर में ही हिंदी भवन के निर्माण के पक्ष में है तो कुछ पदाधिकारी हिंदी भवन का निर्माण शहर के बाहरी क्षेत्र में कराने का सुझाव दे रहे हैं। इस सबके बीच हिंदी भवन का एमडीए से नक्शा पास कराने की तैयारी भी चल रही है।
भवन की रूपरेखा तैयार, 400 लोगों के बैठने की होगी व्यवस्था
हिंदी भवन के निर्माण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हिंदी भवन जहां था, वहीं पर निर्माण होगा। प्रारंभिक भवन की रूपरेखा तैयार की गई है, उसमें 400 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। मेरठ में सुभारती के बाद यह सबसे बड़ा पुस्तकालय होगा, जहां सिर्फ हिंदी की कृतियां होंगी। - विनोद भारती, सदस्य, हिंदी भवन समिति
पटेल नगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन का एतिहासिक महत्व है। आज भी पीसीएस के एग्जाम में यह प्रश्न पूछा जाता है कि हिंदी भवन कहां स्थापित है। हिंदी भवन पर जो अतिक्रमण था, उसे मुक्त करा लिया गया है। निर्माण को लेकर तैयारियां चल रही हैं। हिंदी भवन को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जाएगा। -अरुण जिंदल, उप मंत्री, हिंदी भवन समिति
12 साल से कोई आयोजन नहीं
हिंदी भवन धन के अभाव के चलते समय के साथ अपना अस्तित्व खो बैठा है। किराए पर जो लोग रह रहे थे, उन्होंने हिंदी भवन पर कब्जा कर लिया। 12 वर्ष से हिंदी भवन में कोई आयोजन नहीं हुआ। हिंदी भवन का 1965 में निर्माण हुआ था। बिल्डिंग को भी पुन: निर्माण के लिए ध्वस्त कर दिया गया है। अब कोविड के चलते जो कार्य प्रगति पर था, वह भी रुक गया। -वीरेंद्र प्रेमी, वरिष्ठ पदाधिकारी, हिंदी भवन समिति
समिति की बैठक में होंगे निर्णय
हिंदी भवन समिति की बैठक में निर्णय होगा कि वर्तमान में जहां हिंदी भवन है, यहीं निर्माण किया जाए या इस जगह को बेचकर भवन का निर्माण शहर के किसी बाहरी क्षेत्र में किया जाए। वर्तमान स्थान पर जहां हिंदी भवन है, उसका नक्शा एमडीए से पास कराने का प्रयास चल रहा है। -दिनेश चंद्र जैन, मंत्री, हिंदी भवन समिति