'हिंदी हैं हम' अभियान: हिंदी में खुलें नए अवसर तो युवाओं में बढ़ेगा आकर्षण
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विद्यालय स्तर पर नहीं बल्कि विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थी हिंदी में अनुत्तीर्ण हो जाते हैं। हर विषय में अच्छे अंक आएंगे और मातृभाषा हिंदी जो अपनी भाषा है उसमें अंक कम। केवल स्कूलों में छात्रों का हिंदी से मोहभंग होकर अंक कम आ रहे हैं, ऐसा नहीं हैं। ये कड़वी हकीकत कॉलेज और विवि में भी है। अगर युवाओं को हिंदी से जोड़ना है तो हिंदी को रोजगारपरक और अनिवार्य बनाना होगा।
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत युवाओं में कैसे बढ़े हिंदी का आकर्षण पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद्र लोहनी ने विचार रखे। साल 2017 में शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विवि में आईसीसीआर चेयर पर विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त हुए डॉ. लोहनी कहते हैं कि विदेशों में मातृभाषा को उपयोगी और अनिवार्य बनाया गया है इसलिए वहां अंग्रेजी से ज्यादा उनकी अपनी भाषाएं प्रचलित हैं। डॉक्टरी, विधि, इंजीनियरिंग से लेकर समग्र उच्चशिक्षा मातृभाषा में होती है। अगर भारत में युवाओं को हिंदी से जोड़ना है तो हिंदी को उपयोगी और अनिवार्य बनाना होगा।
हिंदी में बढ़ाने होंगे रोजगार
हिंदी में नए रोजगार के अवसर देने होंगे। पुराने जो पद हिंदीभाषियों के लिए हैं उनका स्तर और उपयोगिता बढ़ानी होगी। तभी युवा हिंदी की जरूरत महसूस करेंगे। हिंदी में रोजगार के भरपूर और अच्छे मौके दिए जाएं, तब हिंदी उपयोगी बनेगी।
वैकल्पिक नहीं अनिवार्य करें हिंदी
हिंदी को युवाओं में लोकप्रिय बनाने के लिए उसे अनिवार्य बनाना होगा। कानून व्यवस्था, चिकित्सक की पर्ची से लेकर, शासनादेशों, गजट, महत्वपूर्ण निर्णयों, सरकारी व निजी दफ्तरों की कार्यशैली में हिंदी को अनिवार्य करना होगा। केवल हिंदी माध्यम स्कूलों में क्यों हर विषय हिंदी में पढ़ाया जाए। सभी स्कूलों में सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित, अन्य विषयों को भी हिंदी में पढाया जाए। केवल हिंदी के लिए हिंदी विषय न पढ़ाया जाए। नई शिक्षा नीति में भी सरकार ने मातृभाषा में पढ़ाई का विकल्प दिया है वह अनिवार्य होना चाहिए।
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आप भी लें हिस्सा
अगर आपने अभी तक हिंदी हैं हम अभियान में हिस्सेदारी नहीं की है तो देर न कीजिए। इस अभियान में हर आयु वर्ग के लिए जगह है। इस अभियान में भाग लेकर आप ढेरों पुरस्कार के साथ जीत सकते हैं मनपसंद किताबें। आपको बस 30 सेकेंड का वीडियो रिकॉर्ड करके हमें भेजना है। इसमें खुद भी हिस्सा लें और अपने दोस्तों-परिचितों व पूरे परिवार को सहभागिता के लिए प्रेरित करें। - वीडियो में अपना नाम, पता, उम्र, शिक्षा संक्षेप में बोलकर रिकॉर्ड करें।
कैसे बनें अभियान का हिस्सा
बच्चे: रोज अमर उजाला पढ़ें। जो खबर या लेख पसंद हो, उसे पढ़ें व वीडियो बनाएं।
माता-पिता: हिंदी साहित्य की किसी प्रिय रचनाकार की रचना का अंश पढ़ें। यह कहानी, कविता या निबंध कुछ भी हो सकता है।
युवा: नए समय के नए अनुभव और नए जमाने की अपनी पसंद की बात करें या किसी भी प्रिय रचना का अंश पढ़ें।
दादी-नानी: बच्चों को किस्से सुनाएं, लोकगीत या गुजरे दिन की बातें, जिनसे आनंद भी आए और सीख भी मिले।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
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