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कमेला प्रकरणः डीएम और नगर आयुक्त को किया कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब
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डीएम और नगर आयुक्त को हाईकोर्ट का व्यक्तिगत समन
मेरठ। पुराने कमेले का मामला नगर निगम के गले की फांस बन गया है। मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम की गलतबयानी पर जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से 8 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के लिए समन जारी किया है। हाईकोर्ट के रुख से जिला प्रशासन और नगर निगम की उलझन बढ़ गई है।
2016 में नगर विकास मंत्री आजम खां के निर्देश पर प्रशासन ने हापुड़ रोड स्थित पुराना कमेला ध्वस्त करा दिया था। हालांकि अत्याधुनिक कमेला स्थापित कर संचालन के लिए घोसीपुर में जगह चिह्नित की गई थी लेकिन कमेला शुरू नहीं हो पाया। इसके चलते मीट फैक्ट्री संचालक जहां मनमाने दाम पर मीट की आपूर्ति कर रहे हैं, वहीं अवैध कटान भी हो रहा है। मामले में मीट विक्रेाताओं ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर कमेला शुरू करने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने नगर निगम और डीएम से इसका जवाब मांगा था। नगर निगम द्वारा दाखिल जवाब में बताया गया कि उनकी तरफ से घोसीपुरम में 30 करोड़ रुपये की लागत से कमेला स्थापित किया हुआ है। इस पर याचिका कर्ता के अधिवक्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर नगर निगम की तरफ से दायर जवाब दाखिल कर दिया, जिसमें बताया गया है कि नगर निगम कोई कमेला संचालित नहीं कर रहा है।
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नगर निगम के कोर्ट में दाखिल जवाब और आईजीआरएस पोर्टल पर दिये गए जवाब के अंतर पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
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मेरठ। पुराने कमेले का मामला नगर निगम के गले की फांस बन गया है। मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम की गलतबयानी पर जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से 8 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के लिए समन जारी किया है। हाईकोर्ट के रुख से जिला प्रशासन और नगर निगम की उलझन बढ़ गई है।
2016 में नगर विकास मंत्री आजम खां के निर्देश पर प्रशासन ने हापुड़ रोड स्थित पुराना कमेला ध्वस्त करा दिया था। हालांकि अत्याधुनिक कमेला स्थापित कर संचालन के लिए घोसीपुर में जगह चिह्नित की गई थी लेकिन कमेला शुरू नहीं हो पाया। इसके चलते मीट फैक्ट्री संचालक जहां मनमाने दाम पर मीट की आपूर्ति कर रहे हैं, वहीं अवैध कटान भी हो रहा है। मामले में मीट विक्रेाताओं ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर कमेला शुरू करने की मांग की गई थी।
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हाईकोर्ट ने नगर निगम और डीएम से इसका जवाब मांगा था। नगर निगम द्वारा दाखिल जवाब में बताया गया कि उनकी तरफ से घोसीपुरम में 30 करोड़ रुपये की लागत से कमेला स्थापित किया हुआ है। इस पर याचिका कर्ता के अधिवक्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर नगर निगम की तरफ से दायर जवाब दाखिल कर दिया, जिसमें बताया गया है कि नगर निगम कोई कमेला संचालित नहीं कर रहा है।
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नगर निगम के कोर्ट में दाखिल जवाब और आईजीआरएस पोर्टल पर दिये गए जवाब के अंतर पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।