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पश्चिमी यूपी में हर हाल में बनेगी हाईकोर्ट बेंच: सिंह
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मेरठ। यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच हर हाल में बनेगी। यदि केंद्र और राज्य सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो बड़ा आंदोलन होगा।
वकीलों के खिलाफ शिकायतों का निस्तारण करने शनिवार को मेरठ आए सिंह ने जिला बार एसोसिएशन के महाराणा प्रताप कक्ष में वकीलों को संबोधित किया। कहा कि सरकार वकीलों की विधवाओं को पेंशन और युवा अधिवक्ताओं को प्रारंभ के तीन वर्षों तक 5-10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की व्यवस्था शुरू करे। हाईकोर्ट बेंच की मांग के संबंध में कहा कि कानून की व्यवस्था एक राज्य-एक हाईकोर्ट से जुड़ी थी। लेकिन उत्तर प्रदेश में लखनऊ में एक बेंच अलग से बनी हुई है और तमाम ऐसे प्रदेश है जिनमें दो या तीन हाईकोर्ट बेंच हैं। पूरे देश में उत्तर प्रदेश सबसे पुराना प्रदेश है। क्षेत्रफल व जनसंख्या के अनुसार पउप्र में हाईकोर्ट बेंच की मांग जायज है, जो हर सूरत में पूरी होगी।
बार चेयरमैन ने कहा कि साल 2008 में जब वे वाइस चेयरमैन थे तो तब भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने पूरब के कई जिलों में बेंच के समर्थन में हड़तालें भी करवायी हैं। उन्होंने पउप्र के अधिवक्ताआें से आह्वान किया कि हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर एक ज्ञापन दें। वे हरसूरत में वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने पर यहां के अधिवक्ताओं की उनसे मुलाकात करवाएंगे। कहा कि सरकार ने वाराणसी में एयरपोर्ट बनाने के लिए पांच हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। ऐसे में वकीलों के कल्याण के लिए भी एक हजार करोड़ रुपये की घोषणा होनी चाहिए। हर अधिवक्ता को सरकारी पेंशन दी जाए। सरकार वकीलों को आर्थिक मदद भी दे।
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अधिवक्ता खुद ही जिम्मेदार
बार चेयरमैन ने देश में अधिवक्ताओं की स्थिति दुनिया में तमाम देशों के मुकाबले बेहद दयनीय बताकर इस स्थिति के लिए अधिवक्ताओं को जिम्मेदार बताया। कहा कि यदि इतिहास की भांति अधिवक्ता सिर्फ अपने वकालत के पेशे से जुड़ा रहे तो उसका सम्मान समाज में अतुलनीय है। लेकिन आज अधिवक्ता अपने उद्देश्य से भटकते हुए वकालत के पेशे से अलग अन्य व्यवसायों में जुड़ चुका है। चाहे वह प्रॉपर्टी डीलिंग हो या जेल में हाजिरी लगाना। मुल्जिमों के लिए पैरवी नहीं करनी चाहिए। कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के कल्याण, पेंशन, विधवा पेंशन, मानदेय सहित अन्य मांगों को शीघ्र पूरा नही करती है तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने धरना देंगे।
इस मौके पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री आनंद कश्यप, जीएस धामा, अनिल तोमर, उदयवीर तोमर, देवेंद्र सिंह, वीके शर्मा, परवीन सुधार, रामकुमार त्यागी, एसके जैन, जगत सिंह, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र शर्मा, नरेशचंद शर्मा, रामपाल सिंह, बिरेन्द्र कुमार, दीपक चाहल, राजीव शर्मा सहित काफी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
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वकीलों के खिलाफ शिकायतों का निस्तारण करने शनिवार को मेरठ आए सिंह ने जिला बार एसोसिएशन के महाराणा प्रताप कक्ष में वकीलों को संबोधित किया। कहा कि सरकार वकीलों की विधवाओं को पेंशन और युवा अधिवक्ताओं को प्रारंभ के तीन वर्षों तक 5-10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की व्यवस्था शुरू करे। हाईकोर्ट बेंच की मांग के संबंध में कहा कि कानून की व्यवस्था एक राज्य-एक हाईकोर्ट से जुड़ी थी। लेकिन उत्तर प्रदेश में लखनऊ में एक बेंच अलग से बनी हुई है और तमाम ऐसे प्रदेश है जिनमें दो या तीन हाईकोर्ट बेंच हैं। पूरे देश में उत्तर प्रदेश सबसे पुराना प्रदेश है। क्षेत्रफल व जनसंख्या के अनुसार पउप्र में हाईकोर्ट बेंच की मांग जायज है, जो हर सूरत में पूरी होगी।
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बार चेयरमैन ने कहा कि साल 2008 में जब वे वाइस चेयरमैन थे तो तब भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने पूरब के कई जिलों में बेंच के समर्थन में हड़तालें भी करवायी हैं। उन्होंने पउप्र के अधिवक्ताआें से आह्वान किया कि हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर एक ज्ञापन दें। वे हरसूरत में वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने पर यहां के अधिवक्ताओं की उनसे मुलाकात करवाएंगे। कहा कि सरकार ने वाराणसी में एयरपोर्ट बनाने के लिए पांच हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। ऐसे में वकीलों के कल्याण के लिए भी एक हजार करोड़ रुपये की घोषणा होनी चाहिए। हर अधिवक्ता को सरकारी पेंशन दी जाए। सरकार वकीलों को आर्थिक मदद भी दे।
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अधिवक्ता खुद ही जिम्मेदार
बार चेयरमैन ने देश में अधिवक्ताओं की स्थिति दुनिया में तमाम देशों के मुकाबले बेहद दयनीय बताकर इस स्थिति के लिए अधिवक्ताओं को जिम्मेदार बताया। कहा कि यदि इतिहास की भांति अधिवक्ता सिर्फ अपने वकालत के पेशे से जुड़ा रहे तो उसका सम्मान समाज में अतुलनीय है। लेकिन आज अधिवक्ता अपने उद्देश्य से भटकते हुए वकालत के पेशे से अलग अन्य व्यवसायों में जुड़ चुका है। चाहे वह प्रॉपर्टी डीलिंग हो या जेल में हाजिरी लगाना। मुल्जिमों के लिए पैरवी नहीं करनी चाहिए। कहा कि यदि सरकार अधिवक्ताओं के कल्याण, पेंशन, विधवा पेंशन, मानदेय सहित अन्य मांगों को शीघ्र पूरा नही करती है तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने धरना देंगे।
इस मौके पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री आनंद कश्यप, जीएस धामा, अनिल तोमर, उदयवीर तोमर, देवेंद्र सिंह, वीके शर्मा, परवीन सुधार, रामकुमार त्यागी, एसके जैन, जगत सिंह, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र शर्मा, नरेशचंद शर्मा, रामपाल सिंह, बिरेन्द्र कुमार, दीपक चाहल, राजीव शर्मा सहित काफी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।