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निशुल्क पेसमेकर

Wed, 19 Oct 2022 02:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 02:33 AM IST
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Heart started beating properly as soon as the pacemaker was installed
मेरठ। जसवंत राय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मंगलवार को 13 मरीजों को करीब 24 लाख रुपये के पेसमेकर मुफ्त लगाए गए। इनमें 5 महिला और 8 पुरुष मरीज हैं। यह 24वां निशुल्क शिविर बोस्टन कार्डियक फाउंडेशन (यूएसए) के साथ मिलकर अस्पताल के कैंपस में लगाया गया। इन मरीजों के दिल की धड़कन मंद पड़ रही थीं। पेसमेकर लगने के बाद दिल की धड़कनों की रफ्तार सही हो गई।
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वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि पेसमेकर लगाने की लगभग लागत डेढ़ से दो लाख रुपये आती है। पिछले 22 सालों से जसवंत राय स्पेशियलिटी अस्पताल में निशुल्क पेसमेकर लगाए जा रहे हैं। अब तक 450 से ज्यादा पेसमेकर लगाए जा चुके हैं, जो पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि पेसमेकर लगाने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद मरीजों को पहली जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। एक पेसमेकर लगभग 10 से 15 सालों तक काम करता है। जरूरत पड़ने पर इसे बदल दिया जाता है या इसकी बैटरी बदल दी जाती है। सभी मरीजों को दवाइयां, अस्पताल में रहने का खर्च और अस्पताल से छुट्टी होनेे के बाद मेडिकल फॉलोअप भी फ्री किया जाता है। बोस्टन से आए डॉ. सलिल मिड्ढा और उनकी टीम ने बताया कि ऐसे दिल के रोगी जिनके दिल की धड़कन की रफ्तार कम हो रही है वह अपना रजिस्ट्रेशन www.bostoncardiacfoundation.org पर करा सकते हैं। जांच की प्रक्रिया के बाद साल 2023 में होने वाले फ्री पेसमेकर शिविर में उन्हें यह लगाया जाएगा। इस दौरान जसवंत राय चूड़ामणि ट्रस्ट सोसायटी के चेयरमैन अशोक गुप्ता, सुशीला जसवंत राय मेटरनिटी अस्पताल के चेयरमैन राजीव गुप्ता, डॉ राकेश मौर्या, शिव शंकरन, अस्पताल के निदेशक डॉ एस सी अग्रवाल, अशोक राजवंशी, राजीव रस्तोगी मौजूद रहे।
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इन्हें लगाए गए पेसमेकर
मेरठ के 5, दिल्ली के चार, मुजफ्फरनगर के दो, बुलंदशहर और हापुड़ जिले के एक-एक मरीज को पेसमेकर लगाए गए। इनमें निशात बेगम, अनिता कुमारी, वंदना, स्नेह लता, शांति, श्रीराज सिंह, इरफान, शिवकुमार शर्मा, रफीकउद्दीन, गंगाराम, अब्दुल, सुबहान और तकियामल शामिल हैं। सभी मरीज पिछड़े व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। पेसमेकर लगने के बाद सभी स्वस्थ हैं। सभी मरीजों के खाने का पूरा प्रबंध अन्नपूर्णा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया। इसके लिए चिकित्सकों ने अन्नपूर्णा चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक बृज भूषण गुप्ता का आभार व्यक्त किया।
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बिना कुछ खर्च किए लग गया पेसमेकर
45 वर्षीय इरफान सब्जी का ठेला लगाते हैं। इरफान ने बताया कि मैं आर्थिक तौर पर पेसमेकर लगवाने की स्थिति में नहीं था। मुझे ख़ुशी का एहसास हो रहा है कि इतना बड़ा काम मेरा बिना कुछ खर्च किए हो गया।

छठी बार लगा पेसमेकर
राजेंद्रनगर दिल्ली निवासी वंदना मलिक को इस बार छठी बार पेसमेकर लगा है। वंदना पति की मृत्यु होने के कारण अपने परिवार का पालन पोषण दवाई कंपनी में नौकरी कर कर रही हैं। उनका कहना है कि पेसमेकर लग कर एक बार फिर मुझे जीवनदान मिला है।
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