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15 फरवरी से 25 ग्राम पंचायतों में चलेंगी कार्यशालाएं
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मेरठ।
टीबी की बीमारी लाइलाज नहीं है, बस उसे छिपाएं नहीं। समय से दवाएं लें और कोर्स पूरा करें तो इसे ठीक किया जा सकता है। एचआईवी/एड्स के प्रति भी जागरूक होने की जरूरत है। ताकि इस बीमारी से बचा जा सके। इस संबंध में 25 ग्राम पंचायतों में 15 फरवरी से 15 मार्च तक कार्यशालाएं होंगी। 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में घर-घर जाकर अभियान चलाया जाएगा। यह कहना है सीएमओ डॉ. राजकुमार का।
सोमवार को बचत भवन में हुई कार्यशाला में उन्होंने बताया कि जिले में 13760 क्षयरोग के मरीज हैं। वर्ष 2018 में 6783 मरीजों को टीबी मुक्त किया गया। वर्ष 2019 में प्राइवेट में 4450 व सरकारी अस्पतालों में 8610 मरीजों ने अपना इलाज कराया। इस वर्ष जनवरी से अभी तक करीब 700 मरीज चिन्हित किए गए हैं। 17 फरवरी से चलने वाले अभियान के लिए 159 टीमें गठित की गई हैं। 34 सुपरवाइजर और 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में जीत प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। प्रत्येक टीबी के मरीज के थूक के साथ एचआईवी, मधुमेह की भी जांच कराई जाएगी। 45 केन्द्रों पर टीबी की जांच कराई जा रही है। छह आईटीटीसी पर भी जांच की व्यवस्था है।
कार्यशाला के दौरान एड्स पीड़ित रही एक महिला ने अपने संस्मरण सुनाए। बताया कि उसने समय से दवाइयां लीं और खान-पान लिया। वह अब बिल्कुल ठीक है। मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में एड्स का कारगर इलाज किया जा रहा है। नायब शहर काजी जैनुल राशिद्दीन ने कहा कि टीबी से मुक्ति और बचाव के लिए वह शाही मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों से अपील करेंगे। इस दौरान परियोजना निदेशक डीआरडी भानू प्रताप सिंह, डिप्टी सीएमओ डा. एमएम भदौरिया, सीओ हरिमोहन शर्मा, नेहरू युवा केन्द्र के तुषार गुप्ता, विभिन्न ब्लाकों से आए खंड विकास अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक आदि मौजूद रहे।
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टीबी की बीमारी लाइलाज नहीं है, बस उसे छिपाएं नहीं। समय से दवाएं लें और कोर्स पूरा करें तो इसे ठीक किया जा सकता है। एचआईवी/एड्स के प्रति भी जागरूक होने की जरूरत है। ताकि इस बीमारी से बचा जा सके। इस संबंध में 25 ग्राम पंचायतों में 15 फरवरी से 15 मार्च तक कार्यशालाएं होंगी। 17 फरवरी से दस दिनों के लिए टीबी के संबंध में घर-घर जाकर अभियान चलाया जाएगा। यह कहना है सीएमओ डॉ. राजकुमार का।
सोमवार को बचत भवन में हुई कार्यशाला में उन्होंने बताया कि जिले में 13760 क्षयरोग के मरीज हैं। वर्ष 2018 में 6783 मरीजों को टीबी मुक्त किया गया। वर्ष 2019 में प्राइवेट में 4450 व सरकारी अस्पतालों में 8610 मरीजों ने अपना इलाज कराया। इस वर्ष जनवरी से अभी तक करीब 700 मरीज चिन्हित किए गए हैं। 17 फरवरी से चलने वाले अभियान के लिए 159 टीमें गठित की गई हैं। 34 सुपरवाइजर और 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में जीत प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। प्रत्येक टीबी के मरीज के थूक के साथ एचआईवी, मधुमेह की भी जांच कराई जाएगी। 45 केन्द्रों पर टीबी की जांच कराई जा रही है। छह आईटीटीसी पर भी जांच की व्यवस्था है।
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कार्यशाला के दौरान एड्स पीड़ित रही एक महिला ने अपने संस्मरण सुनाए। बताया कि उसने समय से दवाइयां लीं और खान-पान लिया। वह अब बिल्कुल ठीक है। मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में एड्स का कारगर इलाज किया जा रहा है। नायब शहर काजी जैनुल राशिद्दीन ने कहा कि टीबी से मुक्ति और बचाव के लिए वह शाही मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों से अपील करेंगे। इस दौरान परियोजना निदेशक डीआरडी भानू प्रताप सिंह, डिप्टी सीएमओ डा. एमएम भदौरिया, सीओ हरिमोहन शर्मा, नेहरू युवा केन्द्र के तुषार गुप्ता, विभिन्न ब्लाकों से आए खंड विकास अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक आदि मौजूद रहे।
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