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कल ठप रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jun 2017 02:47 AM IST
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स्टेथस्कोप।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मंगलवार को शहर में प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखने का एलान किया गया है। इससे मरीजों को दिक्कत होगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर व सचिव डॉ. रेनू भगत ने बताया कि छह जून को शहर की सभी चिकित्सा सेवाएं सुबह 8 बजे रात्रि 8 बजे तक बंद रहेंगी। उन्होंने रविवार को आईएमए हॉल में हुई प्रेस वार्ता में यह जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न मांगों को लेकर 200 निजी डॉक्टर दिल्ली में राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह में शामिल होंगे। जबकि बाकी डॉक्टर्स आईएमए भवन में रह कर विरोध करेंगे।
जो मरीज मंगलवार सुबह आठ बजे से पहले भर्ती होंगे, उन्हें ही इलाज दिया जाएगा। नई भर्ती नहीं होगी। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं भी ठप रखने का एलान किया गया है। उन्होंने बताया कि देशभर से डॉक्टर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। इसमें मेडिकल की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट भी शामिल हैं।
ये हैं मांगे
क्लीनिकल एस्टेबल्शिमेंट एक्ट 2010 पर पुनर्विचार हो, जिससे आम जनता को इलाज में कम खर्च में सुलभ इलाज मिल सके।
चिकित्सकों व उनके प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ व हिंसा के लिए देशव्यापी सख्त कानून बने।
चिकित्सकों की चिकित्सा परामर्श की स्वतंत्रता बनी रहे।
नेशनल मेडिकल कांउसिल का विरोध तथा एमसीआई के पुनर्गठन मेें चिकित्सकों की शत प्रतिशत भागीदारी हो।
एमबीबीएस के बाद होने वाले एग्जिट एग्जाम पर रोक लगे, जिससे चिकित्सकों का मानसिक शोषण न हो सके।
पीसीपीएनडीटी एक्ट पर पुनर्विचार हो तथा रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सकों की कागजी त्रुटियों पर अनावश्यक शोषण बंद हो।
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जो मरीज मंगलवार सुबह आठ बजे से पहले भर्ती होंगे, उन्हें ही इलाज दिया जाएगा। नई भर्ती नहीं होगी। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं भी ठप रखने का एलान किया गया है। उन्होंने बताया कि देशभर से डॉक्टर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। इसमें मेडिकल की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट भी शामिल हैं।
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ये हैं मांगे
क्लीनिकल एस्टेबल्शिमेंट एक्ट 2010 पर पुनर्विचार हो, जिससे आम जनता को इलाज में कम खर्च में सुलभ इलाज मिल सके।
चिकित्सकों व उनके प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ व हिंसा के लिए देशव्यापी सख्त कानून बने।
चिकित्सकों की चिकित्सा परामर्श की स्वतंत्रता बनी रहे।
नेशनल मेडिकल कांउसिल का विरोध तथा एमसीआई के पुनर्गठन मेें चिकित्सकों की शत प्रतिशत भागीदारी हो।
एमबीबीएस के बाद होने वाले एग्जिट एग्जाम पर रोक लगे, जिससे चिकित्सकों का मानसिक शोषण न हो सके।
पीसीपीएनडीटी एक्ट पर पुनर्विचार हो तथा रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सकों की कागजी त्रुटियों पर अनावश्यक शोषण बंद हो।