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Meerut News: करंट से मरे दंपती की मौत पर किया था मदद का वादा, पर लौट कर नहीं आए
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बिजली के करंट से मरे दंपति के बच्चे अपने घर के दरवाजे पर इस इंतजार में खड़े काेई आकर उनके सिर प
अफजलपुर पावटी के पति-पत्नी की मौत के बाद राजनेताओं ने परिवार से किए थे वादे
संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। गांव अफजलपुर पावटी में 15 पूर्व बिजली का करंट लगने से प्रमोद (42) और उसकी पत्नी रेखा की मौत हो गई थी। मृतक दंपती के पांच बेटी और एक बेटा है। बच्चों के साथ उनकी दादी विमला रहती है। मृतक की मौत के बाद आर्थिक हालत खराब होने के चलते विमला के सामने अपना व बच्चों के पालन पाेषण का संकट आ गया है। दंपती की मौत पर विभिन्न पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता शोक प्रकट करने पहुंचे थे और उन्होंने आर्थिक मदद का वादा भी किया था। परिवार का कहना है कि दुर्घटना को 15 दिन बीत गए हैं, केवल दो नेताओं और एक संगठन ने उनकी आर्थिक मदद की है।
गांव अफलजपुर पावटी निवासी प्रमोद पुत्र जयप्रकाश एक प्राइवेट कार चालक था। नौ अक्तूबर की सुबह 4:00 बजे प्रमोद और उसकी पत्नी रेखा की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। मृतक दंपती के पांच बेटियां आरती (21), कशिश (17), वंशिका (13), वर्षा (11), देविका (8) और पुत्र मोहन (10) है। प्रमोद की मां विमला देवी बच्चों के साथ रहती हैं। प्रमोद की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मृतक दंपती की मौत की जानकारी पर काफी संख्या में राजनैतिक दलों के नेता, गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण अपनी शोक संवेदना प्रकट करने के लिए पहुंचे थे। उस समय काफी नेताओं ने परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था।
प्रशासन की ओर से भी पीड़ित परिवार की आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया गया था। परिवार के अनुसार पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई, रालोद नेता सुनील रोहटा और प्रधान संगठन ने उनकी नकद धनराशि से सहायता की है। अफजलपुर पावटी के ग्राम प्रधान मनोज ने बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीणों की ओर से धनराशि जमा की जा रही है लेकिन यह सहायता परिवार के लिए बहुत कम है। परिवार में छह बच्चे और वृद्ध महिला है। पांच बच्चे अभी पढ़ रहे हैं। बड़ी बेटी आरती ने बताया कि पिता ने मौत से कुछ दिन पूर्व ही उधार पैसे लेकर उसे पांचली में ब्यूटी पार्लर खुलवाया था जो अभी चल नहीं रहा है।
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पिता ने उधार पैसे लेकर मकान का निर्माण शुरू करवाया था जो कि अब अधूरा रह गया है। चार बहनों और भाई की पढ़ाई और लालन पालन कैसे होगा पता नहीं। वहीं ग्रामीणों में रोष है कि मौत के बाद दुख प्रकट करने के लिए काफी संख्या में हर पार्टी के नेता आए और आर्थिक मदद का वादा भी किया, लेकिन मदद के लिए कोई लौट कर नहीं आया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। गांव अफजलपुर पावटी में 15 पूर्व बिजली का करंट लगने से प्रमोद (42) और उसकी पत्नी रेखा की मौत हो गई थी। मृतक दंपती के पांच बेटी और एक बेटा है। बच्चों के साथ उनकी दादी विमला रहती है। मृतक की मौत के बाद आर्थिक हालत खराब होने के चलते विमला के सामने अपना व बच्चों के पालन पाेषण का संकट आ गया है। दंपती की मौत पर विभिन्न पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता शोक प्रकट करने पहुंचे थे और उन्होंने आर्थिक मदद का वादा भी किया था। परिवार का कहना है कि दुर्घटना को 15 दिन बीत गए हैं, केवल दो नेताओं और एक संगठन ने उनकी आर्थिक मदद की है।
गांव अफलजपुर पावटी निवासी प्रमोद पुत्र जयप्रकाश एक प्राइवेट कार चालक था। नौ अक्तूबर की सुबह 4:00 बजे प्रमोद और उसकी पत्नी रेखा की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। मृतक दंपती के पांच बेटियां आरती (21), कशिश (17), वंशिका (13), वर्षा (11), देविका (8) और पुत्र मोहन (10) है। प्रमोद की मां विमला देवी बच्चों के साथ रहती हैं। प्रमोद की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मृतक दंपती की मौत की जानकारी पर काफी संख्या में राजनैतिक दलों के नेता, गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण अपनी शोक संवेदना प्रकट करने के लिए पहुंचे थे। उस समय काफी नेताओं ने परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था।
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प्रशासन की ओर से भी पीड़ित परिवार की आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया गया था। परिवार के अनुसार पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई, रालोद नेता सुनील रोहटा और प्रधान संगठन ने उनकी नकद धनराशि से सहायता की है। अफजलपुर पावटी के ग्राम प्रधान मनोज ने बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीणों की ओर से धनराशि जमा की जा रही है लेकिन यह सहायता परिवार के लिए बहुत कम है। परिवार में छह बच्चे और वृद्ध महिला है। पांच बच्चे अभी पढ़ रहे हैं। बड़ी बेटी आरती ने बताया कि पिता ने मौत से कुछ दिन पूर्व ही उधार पैसे लेकर उसे पांचली में ब्यूटी पार्लर खुलवाया था जो अभी चल नहीं रहा है।
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पिता ने उधार पैसे लेकर मकान का निर्माण शुरू करवाया था जो कि अब अधूरा रह गया है। चार बहनों और भाई की पढ़ाई और लालन पालन कैसे होगा पता नहीं। वहीं ग्रामीणों में रोष है कि मौत के बाद दुख प्रकट करने के लिए काफी संख्या में हर पार्टी के नेता आए और आर्थिक मदद का वादा भी किया, लेकिन मदद के लिए कोई लौट कर नहीं आया।