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रजवाहे में गिरकर बुझा घर का इकलौता चिराग
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 05 Mar 2018 01:59 AM IST
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मासूम की मौत के बाद विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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घर के बाहर खेल रहे तीन साल के मासूम की रविवार को रजवाहे में गिरकर मौत हो गई। करीब दो घंटे की तलाश के बाद शव घर से काफी दूर रजवाहे से बरामद हुआ तो परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस के अनुसार नालंदा बिहार निवासी अरविंद पासवान शोभापुर गांव में परिवार के साथ रहता है। वह मोहकमपुर स्थित एक प्रकाशन हाउस में नौकरी करता है। परिवार में पत्नी बबीता, दो बेटियों आंचल (5 साल) व कवित्रा (2 माह) के अलावा इकलौता बेटा मोहित (3 साल) था। रविवार दोपहर बबीता रसोई में थी जबकि तीनों बच्चे घर के आंगन में खेल रहे थे। इस बीच मोहित घर के बाहर आ गया। घर के पास ही करीब चार फीट गहरा रजवाहा है। मोहित खेलता हुआ रजवाहे में गिर गया।
करीब आधा घंटे बाद बबीता का ध्यान मोहित पर गया तो वह गायब मिला। आसपास तलाश करने के बाद भी मोहित का पता न चला तो बबीता ने पति और ससुर को फोन कर घर बुला लिया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और परिजनों ने रजवाहे की पटरी से होते हुए तलाश की तो काफी दूर मोहित का शव रजवाहे में बहता हुआ मिला। पुलिस ने बच्चे का शव निकालवाया। लेकिन परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। बाद में शव को गांव के श्मशान घाट में दफना दिया गया।
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बार-बार अपने को कोसती रही मां
इकलौते बेटे को खोने के बाद मां बबीता बदहवास हो गई। वह मासूम के शव के पास बिलखते हुए खुद को कोस रही थी। यही कह रही थी कि उसने घर का काम करते समय मोहित पर ध्यान क्यों नहीं दिया। अगर वह उसका ध्यान रखती तो बच्चे के साथ यह हादसा न होता। जरा सी भूल ने उसका बच्चा छीन लिया। वहीं, पिता अरविंद व दादा अनुज भी सिर पकड़कर बैठे थे। यही कहते रहे कि काश हम उसे बचा पातेे। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।
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पुलिस के अनुसार नालंदा बिहार निवासी अरविंद पासवान शोभापुर गांव में परिवार के साथ रहता है। वह मोहकमपुर स्थित एक प्रकाशन हाउस में नौकरी करता है। परिवार में पत्नी बबीता, दो बेटियों आंचल (5 साल) व कवित्रा (2 माह) के अलावा इकलौता बेटा मोहित (3 साल) था। रविवार दोपहर बबीता रसोई में थी जबकि तीनों बच्चे घर के आंगन में खेल रहे थे। इस बीच मोहित घर के बाहर आ गया। घर के पास ही करीब चार फीट गहरा रजवाहा है। मोहित खेलता हुआ रजवाहे में गिर गया।
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करीब आधा घंटे बाद बबीता का ध्यान मोहित पर गया तो वह गायब मिला। आसपास तलाश करने के बाद भी मोहित का पता न चला तो बबीता ने पति और ससुर को फोन कर घर बुला लिया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और परिजनों ने रजवाहे की पटरी से होते हुए तलाश की तो काफी दूर मोहित का शव रजवाहे में बहता हुआ मिला। पुलिस ने बच्चे का शव निकालवाया। लेकिन परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। बाद में शव को गांव के श्मशान घाट में दफना दिया गया।
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बार-बार अपने को कोसती रही मां
इकलौते बेटे को खोने के बाद मां बबीता बदहवास हो गई। वह मासूम के शव के पास बिलखते हुए खुद को कोस रही थी। यही कह रही थी कि उसने घर का काम करते समय मोहित पर ध्यान क्यों नहीं दिया। अगर वह उसका ध्यान रखती तो बच्चे के साथ यह हादसा न होता। जरा सी भूल ने उसका बच्चा छीन लिया। वहीं, पिता अरविंद व दादा अनुज भी सिर पकड़कर बैठे थे। यही कहते रहे कि काश हम उसे बचा पातेे। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।