फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Hastinapur: Mohan Bhagwat reminded sweet berries of Shabri, says Hastinapur is full of spiritual energy

Meerut: कृषक संगम में मोहन भागवत ने याद दिलाए शबरी के मीठे बेर, कहा-हस्तिनापुर आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण

Mon, 20 Mar 2023 11:10 AM IST
Dimple Sirohi रविंद्र चौहान, अमर उजाला, मेरठ
रविंद्र चौहान, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 20 Mar 2023 11:10 AM IST
सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत हस्तिनापुर में हुए कृषक सम्मेलन में गौ आधारित जैविक खेती की सीख के साथ-साथ भारत की परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन का भी पाठ पढ़ा गए। इस दौरान उन्होंने शबरी के मीठे बेरों का जिक्र किया तो विनोबा भावे का कथन भी याद किया।

विज्ञापन
Hastinapur: Mohan Bhagwat reminded sweet berries of Shabri, says Hastinapur is full of spiritual energy
मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हस्तिनापुर में कृषि कृषक संगम कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने त्रेता युग को याद करते हुए भगवान राम का जिक्र किया। कहा कि रासायनिक खेती ने हमारी कई औषधियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, जिनमें से एक है शबरी मां का मीठा बेर है, जो भगवान श्रीराम ने भी खाया था। 

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि बेर अपने आप में एक पौष्टिक फल है, जिससे शरीर में कई पोषक तत्व की प्राप्ति होती है। आज से सौ वर्ष पूर्व किसानों के खेतों की मेढ़ और रास्तों में इधर-उधर बेर के पेड़ काफी मात्रा में देखे जाते थे, जो आज विलुप्त हो रहे हैं। उन्होंने दूसरी रामबाण औषधि बताई बथुआ।

विज्ञापन

उन्होंने बताया कि बथुआ किसानों के खेतों में भरपूर मात्रा में मिलता था, जो मनुष्य के पेट के लिए एक रामबाण दवाई है। इससे कई प्रकार की बीमारी स्वत: ही नष्ट हो जाती है, परंतु रासायनिक खेती के कारण हम अपनी इन प्राचीन औषधियों को समाप्त कर रहे हैं। इस समय तो हमें पूजा के लिए पत्तों को भी तलाशना में पड़ रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि गणेश उत्सव के समय 21 पेड़ों के पत्ते रखे जाते थे, जो आसपास ही मिल जाया करते थे। परंतु आज इन्हें ढूंढना मुश्किल हो गया है, जिससे हमारी पूजा के भी नियम बदलते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हमें गो आधारित खेती करनी होगी। 

यह भी पढ़ें: Meerut News: मोहन भागवत ने किसानों को पढ़ाया परंपरा-प्रतिष्ठा का पाठ, मांसाहार व शाकाहार पर भी खुलकर बोले

हस्तिनापुर आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण : मोहन भागवत
भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में जंबूद्वीप में चल रहे तीन दिवसीय गौ आधारित जैविक कृषि कृषक सम्मेलन के तीसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन स्थलों का भ्रमण कर पूजा अर्चना की।

उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर शांतिपूर्ण वातावरण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। सुबह करीब 10 बजे जंबूद्वीप के बंगला नंबर 10 से बाहर निकले मोहन भागवत महाभारत कालीन प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे। प्राचीन स्थलों का भ्रमण करने के बाद मोहन भागवत बोले कि वाकई महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है। महाभारत काल से आज तक इस भूमि की महत्ता और अच्छी महसूस की जा रही है। 

विनोबा भावे का कथन भी किया याद
भागवत ने कहा कि एक बार कुछ किसान एकत्रित होकर विनोबा भावे के पास पहुंचे, जिन्होंने कहा कि उनकी गेहूं की फसल में भीषण कीट लगे हुए हैं। गेहूं की फसल बर्बाद हो रही है। विनोबा भावे ने कहा कि जब आप मेंढक को पकड़ कर बेच रहे हैं तो इससे प्रकृति का चक्र बाधित हो रहा है, क्योंकि मेंढक पर सबसे ज्यादा प्रयोग विज्ञान में किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन कीटों को मेंढक कहते हैं और मेंढक जब अधिक हो जाते हैं तो उन्हें सर्प कहते हैं और जब सर्प अधिक हो जाते हैं तो उन्हें मोर कहते हैं, यह प्रकृति का चक्र है। इस नियम के आधार पर ही प्रकृति चलती है। इससे छेड़छाड़ करना ठीक नहीं होगा।

जैविक खेती और बाजार में संतुलन का बुना तानाबाना
हस्तिनापुर में तीन दिन चले गौ-आधारित जैविक कृषि ‘कृषक संगम’ में जैविक खेती करने वाले किसानों और बाजार में संतुलन का तानाबाना बुना गया। किसानों को कम लागत में जैविक खेती करने की टिप्स दी गई। उन्हें बताया कि कब और कैसे जैविक खाद डालनी है, ताकि  कम लागत में ज्यादा पैदावार हो। 

‘कृषक संगम’ में देशभर के 426 जैविक प्रमुख किसानों ने भाग लिया। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने बताया कि 25-30 साल से जैविक खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास कर रही हैं।

-जैविक खेती में लागत ज्यादा है। लागत ज्यादा होने से बाजार कीमत ज्यादा होती है। अब तीन दिवसीय सम्मेलन में बताया है कि कैसे कम लागत में अच्छी पैदावार करनी है। -रामभूल शर्मा, बुलंदशहर
-मैं गोशाला चलाने के साथ-साथ जैविक खेती करती हूं। जैविक खेती का अच्छा अनुभव है। जरूरत के हिसाब से खाद का इस्तेमाल करने के अच्छा लाभ मिलता है। -लावन्या रेड्डी, तेलंगाना
-सम्मेलन में बताया है कैसे खाद रखनी व इस्तेमाल करनी है। बाजरा, मूंग, मोंठ, तिल, ज्वार की पैदावार जैविक खेती से करता हूं, जिसकी कीमत निकालना मुश्किल होता है। -आशाराम चौधरी, बाडमेर
nजैविक खेती की लागत ज्यादा होती है। पैदावार की समुचित कीमत मिलनी चाहिए, जिसकी व्यवस्था हो। संगम में कम लागत की टिप्स दी है, जिसको अब अपनाएंगे। -लालाराम, जोधपुर

किचन गार्डन बीज, काला गेहूं व चावल ने किया आकर्षित
हस्तिनापुर (मेरठ)। बहु-सांस्कृतिक और बहु-भाषी भारत की झलक हस्तिनापुर के जंबूद्वीप में दिखी। जैविक खेती प्रोत्साहन को आयोजित कृषक संगम में देशभर से आए किसानों ने जैविक से हुई पैदावार के स्टॉल लगाए, जिन्हें देखने और गुणवत्ता की जानकारी लेने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। किचिन गार्डन बीज, काला गेहूं-चावल ने आकर्षित किया। 

नागपुर की सुनीता चापले ने किचिन खेती के बीजों का प्रदर्शन किया। उनके स्टॉल पर भिंडी, लौकी, काशीफल, तोरई, हरी मिर्च के बीजों की खूब बिक्री भी हुई। उन्होंने लोगों को बताया कि जैविक खाद इस्तेमाल करके घर में भी इनको पैदा किया जा सकता है। घर में कैसे जैविक खाद बनाई जा सकती है, जिसके बारे में भी टिप्स दिए। छत्तीसगढ़ से आए अशोक कुमार देवांगन ने काला गेहूं, हरा गेहूं, सोना गेहूं, मोती गेहूं का प्रदर्शन किया।

पंचगव्य के उत्पाद भी लोगों को भाए
धनुष मंडप के बाहर पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र व गोबर का पानी) से बने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। पंचगव्य से बना हैंडवॉस, हल्दी चंदन फेसवॉस, बॉडी लोशन, कोल्ड क्रीम, दांतों का पेस्ट, सेविंग क्रीम, नारी संजीवनी, फिनाइल आदि आकर्षण का केंद्र रहा, जो किसानों ने खूब खरीदा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed