फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Hashimpura massacre meerut survivors truck driver statement PAC diary accused life imprisonment

हाशिमपुरा नरसंहार: जिंदा बचे लोग, ट्रक चालक के बयान और पीएसी की 'डायरी' ने आरोपियों को दिलाई उम्रकैद

Thu, 01 Nov 2018 11:08 AM IST
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, मेरठ
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 01 Nov 2018 11:08 AM IST
विज्ञापन
Hashimpura massacre meerut survivors truck driver statement PAC diary accused life imprisonment
मेरठ न्यूज

31 साल 5 महीना और 9 दिन की कानूनी लड़ाई के बाद 1987 के हाशिमपुरा कांड में सजा का दिन आ गया। सत्र न्यायालय में शिनाख्त न हो पाने के कारण 2015 में जो आरोपी बरी हो गए थे, हाईकोर्ट में उन्हें पीएसी के ट्रक चालक के क्राॅस बयान, पुलिस लाइन की जीडी (जनरल डायरी) और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने उम्रकैद की सजा दिला दी। 

विज्ञापन


इस नरसंहार में गोली लगने के बावजूद जीवित बचे बाबूदीन, जुल्फिकार, मुजीबुर्रहमान और उस्मान महत्वपूर्ण गवाह साबित हुए, जिन्होंने शुरू से लेकर आरोपियों को सजा मिलने तक अपनी बात को कायम रखा। दोषी साबित हुए पीएसी के ट्रक चालक लीलाधर के बयानों को कोर्ट ने विरोधाभासी माना। उसे घटना के समय गोली लगी, लेकिन उसने बैरक में वापसी के समय इसका हवाला नहीं दिया।
विज्ञापन


पहले उसने मेरठ में तैनाती से इन्कार किया, लेकिन बाद में इस तथ्य को स्वीकार कर लिया। साक्ष्यों से पता चला कि जांच में पीएसी के ट्रक में खून मिला था, जिसे बाद में धो दिया गया। सत्र न्यायालय में आरोपियों को इस बात का लाभ मिला कि वे हेलमेट पहने हुए थे, इसलिए उनकी शिनाख्त नहीं हुई। लेकिन हाईकोर्ट में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने इस गुत्थी को भी सुलझा दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दिल्ली हाईकोर्ट में एनएचआरसी की अपील पर केस का रुख इसी साल 28 मार्च को तब मुड़ा, जब घटना के समय पुलिस लाइन में तैनात रणवीर सिंह विश्नोई (78) पेश हुआ और उसने अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर पुलिस की जीडी पेश की।

पीएसी के पीले रंग ट्रक संख्या यूआरयू 1493 का पुलिस लाइन से मूवमेंट, उसमें सवार पीएसी जवानों के नामों का आरोपियों के नामों से मेल खाना, ट्रक की लॉग बुक से उसके हाशिमपुरा से मुरादनगर तक जाने के साक्ष्यों की पुष्टि हुई।

41वीं वाहिनी पीएसी के इन जवानों को शस्त्रागार से जारी असलहे और गोलियों की संख्या के साथ ही उनके प्रयोग के साक्ष्यों ने परिस्थितियों को साबित किया। यह बात संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाई कि हाशिमपुरा से 50 लोगों को अगवा करने वाले पीएसी के जवान नहीं थे। 

जीडी में 17 जवानों के नाम
जीडी में पीएसी के 17 जवानों के नाम अंकित हैं। जिनमें प्लाटून कमांडर सुरेंद्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल निरंजन लाल, कमल सिंह, श्रवण कुमार, कुश कुमार, एससी शर्मा, कांस्टेबल ओम प्रकाश, समीउल्लाह, जयपाल, महेश प्रसाद, राम ध्यान, लीलाधर, हमवीर सिंह, कुंवर पाल, बुद्ध सिंह, बसंत वल्लभ और नायक रामबीर सिंह हैं।

तत्कालीन गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम को राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाशिमपुरा नरसंहार मामले में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम को राहत दे दी है। अदालत ने बुधवार को मामले में उनकी भूमिका की जांच करने संबंधी याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया है। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने याचिका में तर्क रखा था कि जिन पीएसी जवानों पर मुकदमा चल रहा है, उन्होंने केवल अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन किया था।

चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे। ऐसे में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने सुब्रह्मण्यम स्वामी की यूपी पुलिस की सीबीसीआईडी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की दलील को मान लिया है, लेकिन जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग को खारिज कर दिया। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed