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हाशिमपुरा कांड: सुप्रीम कोर्ट ने आठ पुलिसकर्मियों को दी जमानत, पीड़ितों के परिजन बोले- फिर हरे हो गए जख्म

Sat, 07 Dec 2024 11:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 07 Dec 2024 11:52 AM IST
सार

1987 में हुए हाशिमपुरा कांड में हाशिमपुरा निवासी सिराज अहमद पुत्र शब्बीर अहमद की पीएसी की गोली लगने से मौत हुई थी।  अब सुप्रीम कोर्ट ने इस कांड के आठ दोषियों को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवारों की इंसाफ की उम्मीद टूट गई है।

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Hashimpura incident: Victims' relatives said - Hare got injured once again
कय्यूम और अय्यूब की मां बुशरा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में 1987 में हुए हाशिमपुरा कांड के आठ दोषियों को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवारों की इंसाफ की उम्मीद टूट गई है। उन्होंने कहा कि आज भी वह दिन याद करके आंखे भर आती है। जख्म हरे हो जाते है। वह खौफनाक दिन देखकर रौंगटे खड़े हो जाते है। ऐसे में उनकी आरोपियों को कोर्ट से बख्शीश मिलने के बाद वह आगे की पैरवी जरुर करेंगे लेकिन दो पीढि़यों के पैर जरुर पैरवी कर-करके दुख चुके है।
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Hashimpura incident: Victims' relatives said - Hare got injured once again
हाजी मुस्तकीम का बेटा जमीर। - फोटो : अमर उजाला
37 साल हो गए नहीं भरे आज भी जख्म
हाशिमपुरा के रहने वाले कमरुद्दीन पुत्र जमालुद्दीन की जान चली गई थी। मां जैतून बेगम और कमरुद्दीन के भाई शमशुद्दीन ने बताया कि घटना से दो साल पहले शादी हुई थी। परिवार में खुशियाें का माहौल था, लेकिन 1987 में मौत के बाद घर की रौनक सारी खुशियां चली गई। पिता जमालुद्दीन ने कोर्ट में केस लड़ा पूरी पैरवी की लेकिन दो साल पहले पिता की भी मौत हो गई। आज भी हमारे जख्म हरे है।

 
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इंसाफ की टूट गई उम्मीद, अब ऊपर वाले पर भरोसा
हाशिमपुरा निवासी सिराज अहमद पुत्र शब्बीर अहमद की भी पीएसी की गोली लगने से मौत हुई थी। बहन नसीम बानो ने बताया कि चार बहन में अकेला भाई सिराज था, उस समय घर का चिराग बुझ गया था। इंसाफ की अब तक हमारी सारी उम्मीद टूट गई है। अब तो केवल ऊपर वाले पर भरोसा है। सिराज की शादी होने वाली थी उससे पहले पीएसी की गोली लगने से मौत हो गई। घर में खुशी आने वाली थी जो मातम में बदल गई।
 
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मृतक सिराज की बहन नसीम बानो। - फोटो : अमर उजाला
 मैं बच्चा था, बेगुनाह पिता की लाश पड़ी थी
हाशिमपुरा के रहने वाले हाजी मुस्तकीम की भी इस घटना के शिकार हो गए थे। उनकी भी मौत हो गई थी। मुस्तकीम के बेटे जमीर ने बताया जिस समय पिता के साथ घटना हुई थी उस समय वह छह साल का था। उसको तो कुछ याद नहीं। पिता की शकल भी याद नहीं है। चाचा फईमउद्दीन की भी मौत हुई थी। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। हमारी मांग है कि दोषियों को जमानत देने की बजाय उनको सख्त सजा हो जो दुनिया के लिए नजीर बने।
 

दो बेटों की गई थी जान, चार पाई पर लेटी मां मांग रही इंसाफ
हाशिमपुरा निवासी मोहम्मद कय्यूम, मोहम्मद अय्यूब की भी हत्या हुई थी। बिस्तर पर लेटी मां शुगरा ने बताया कि अब उसका एक बेटा शकील है। जो उसके साथ रहता है। पुलिस कस्टडी में हत्या की गई है। ऐसे में जब पुलिसकर्मियों ने हत्या की है तो उनको जमानत क्यों दी गई है। इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा होनी चाहिए।
 

Hashimpura incident: Victims' relatives said - Hare got injured once again
कमरुद्दीन की फोटो के साथ मां जैतून और भाई शमसुद्दीन। - फोटो : अमर उजाला
आखिरी दम तक लड़ेंगे...
हाशिमपुरा कांड याद करके आज भी रौंगटे खड़े हो जाते है। आंखों में आंसू आ जाते है। पीड़ित परिवारों ने इतना कहकर अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि वह आखिरी दम तक लड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पडे़गा। आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए पूरी तैयारियां की जा रही है। पीड़ितों ने बताया कि वह अधिवक्ता से इस मामले में विधिक राय ले रहे है। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए अपील करेंगे।
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