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हरियाली तीज: इस दिन शिव-पार्वती का हुआ था पुनर्मिलन

Fri, 25 Jul 2025 02:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jul 2025 02:18 AM IST
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Hariyali Teej: On this day Shiva-Parvati were reunited
मेरठ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण को पूजा-पाठ और व्रत के लिए सबसे उत्तम मास माना जाता है। इस महीने भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना की जाती है। हरियाली तीज पर इस साल रवि योग बन रहा है। रवि योग में पूजन से व्रती को धन और करियर में लाभ पहुंचता है। श्रावण मास में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व होता है। ऐसे में हरियाली तीज का भी विशेष महत्व होता है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज, सिंधारा तीज और मधुस्त्रवा तीज आदि नामों से जाना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य कौशल वत्स ने बताया सोलह श्रृंगार कर माता-पार्वती और शिव जी की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं। हरियाली तीज के दिन सिंधारा भेंट करने की प्रथा है। इसे कन्या के माता पिता उसके ससुराल में भेजते हैं। हरियाली तीज मुख्य तौर से नवविवाहिता के लिए बहुत खास होती है। कई जगह इस दिन लड़कियां अपनी पहली तीज पर मायके जाती हैं। नवविवाहित महिलाओं को ससुराल की तरफ से आभूषण, श्रृंगार सामान, वस्त्र, मेहंदी और मिठाई दी जाती हैं। महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं और पैरों में आलता लगाती हैं।
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- वर्षा ऋतु में चारों ओर छा जाती है हरियाली
- वर्षा ऋतु में चारों ओर हरियाली छा जाती है। हरे वस्त्र को शांति और उत्पादकता का निदान माना गया है। सृष्टि की संरचना जल से हुई है। जल से ही पैदा होता है कमल, अतः कमल को पृथ्वी का निदान माना गया है। कमल पृथ्वी स्वरुप मां भवानी को अतिप्रिय है। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि तीज का अर्थ है तृतीया तिथि के दिन त्रैलोक्य सुंदरी मां ललिता का विवाह भगवान शंकर के साथ शुक्ल तृतीया को ही हुआ। ऐसी आख्या भविष्य पुराण, पद्मपुराण, अग्नि पुराण में आती है। प्रत्येक शुक्ल तृतीया शिव पार्वती के पूजन के लिए होती है। श्रावण शुक्ल तृतीया हरियाली तीज कहलाती है जो कि महिलाओं के अखंड सौभाग्य के लिए विशेष होती है।
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- माता पार्वती ने शंकर को स्वामी के रूप में किया प्राप्त
- हरियाली तीज का व्रत सर्वप्रथम राजा हिमालय की पुत्री पार्वती जी ने रखा था। फलस्वरूप उन्होंने शंकर जी को स्वामी रूप में प्राप्त किया। भगवान शिव ने पार्वती को उनके पूर्व जन्म के बारे में याद दिलाने के लिए कथा सुनाई।
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