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गुरु कृपा से होता है जीवन का कल्याण : शिवराज
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- सूर्या पैलेस स्थित शिव शक्ति मंदिर में हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सूर्या पैलेस स्थित शिव शक्ति मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा हुई। गोवर्धन से आए कथा व्यास श्याम सुंदर शिवराज ने भक्त प्रह्लाद और ध्रुव के प्रसंग सुनाए।उन्होंने कहा कि भक्त के लिए गुरु कृपा सबसे जरूरी है। जीवन में भी गुरु की कृपा हो तो कल्याण हो जाता है। ध्रुव को भगवान और गुरु की कृपा से दर्शन प्राप्त हुए। अजामिल के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि अंत समय में नारायण नारायण पुकारने पर एक पापी का भी उद्धार हो गया।
कथा व्यास ने भगवान के नाम की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि भगवान से भी बढ़कर है भगवान का नाम। श्रीमद्भागवत कथा को कल्पवृक्ष और स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मानें। कथा हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करती है। यह मनुष्य को आध्यात्मिक, राजनीतिक और सामाजिक ज्ञान के साथ साथ जीने का रहस्य भी सिखाती है।
कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य के लिए श्रद्धा, विश्वास और भावना का होना आवश्यक है। अंत में उन्होंने मानव शरीर को समुद्र मंथन के समान बताते हुए कहा कि यदि हम यह मान लें कि ईश्वर हमारे भीतर विराजमान हैं। तो हमारा जीवन सफल हो जाता है। कथा के यजमान राहुल गुप्ता रहे। इस अवसर पर अनु गुप्ता, रुचि सिंघल, स्वीटी रस्तौगी, संगीता मित्तल, गायत्री शर्मा, चारू कंसल, अंजू सिंघल, ईशा गर्ग, रिया आहूजा सहित अन्य मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सूर्या पैलेस स्थित शिव शक्ति मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा हुई। गोवर्धन से आए कथा व्यास श्याम सुंदर शिवराज ने भक्त प्रह्लाद और ध्रुव के प्रसंग सुनाए।उन्होंने कहा कि भक्त के लिए गुरु कृपा सबसे जरूरी है। जीवन में भी गुरु की कृपा हो तो कल्याण हो जाता है। ध्रुव को भगवान और गुरु की कृपा से दर्शन प्राप्त हुए। अजामिल के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि अंत समय में नारायण नारायण पुकारने पर एक पापी का भी उद्धार हो गया।
कथा व्यास ने भगवान के नाम की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि भगवान से भी बढ़कर है भगवान का नाम। श्रीमद्भागवत कथा को कल्पवृक्ष और स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मानें। कथा हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करती है। यह मनुष्य को आध्यात्मिक, राजनीतिक और सामाजिक ज्ञान के साथ साथ जीने का रहस्य भी सिखाती है।
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कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य के लिए श्रद्धा, विश्वास और भावना का होना आवश्यक है। अंत में उन्होंने मानव शरीर को समुद्र मंथन के समान बताते हुए कहा कि यदि हम यह मान लें कि ईश्वर हमारे भीतर विराजमान हैं। तो हमारा जीवन सफल हो जाता है। कथा के यजमान राहुल गुप्ता रहे। इस अवसर पर अनु गुप्ता, रुचि सिंघल, स्वीटी रस्तौगी, संगीता मित्तल, गायत्री शर्मा, चारू कंसल, अंजू सिंघल, ईशा गर्ग, रिया आहूजा सहित अन्य मौजूद रहे।
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