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Meerut News: दादी की कांवड़ की अधूरी आस... 24 पोतों ने कंधों पर उठाकर की पूरी

Thu, 06 Aug 2026 09:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 09:51 PM IST
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Grandmother's unfulfilled wish for the Kanwar Yatra... 24 grandsons carried it on their shoulders to complete it.
दौराला - दादी सोनदेवी को पालकी में बैठाकर ले जाते उनके 24 पोते। स्रोत : संवाद
95 साल की सोनदेवी की कांवड़ यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए पोतों ने बनाया महाकाल ग्रुप
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- हरिद्वार में गंगा स्नान कराकर अब पालकी से दादी को घर ला रहे हैं पोते

शरद गुप्ता



दौराला (मेरठ)। उम्र ने कदमों को रोका, शरीर ने साथ छोड़ दिया लेकिन 95 साल की उम्र में भी भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचने की आस सोनदेवी के मन में कुंलाचे भरती रही है। उनकी इच्छा थी कि वह भी हरिद्वार पहुंचकर गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाएं और कांवड़ यात्रा का पुण्य अर्जित करें। दादी की यह इच्छा पोतों के लिए सिर्फ ख्वाहिश नहीं, बल्कि आस्था का संकल्प बन गई। इसके लिए 24 पोतों ने मिलकर महाकाल ग्रुप बनाया और दादी को पालकी में बैठाया और हरिद्वार ले गए। गंगा स्नान कराया और अब उसी पालकी को अपने कंधों पर उठाकर बुलंदशहर स्थित गांव हसनपुर जागीर की ओर लौट रहे हैं।




बृहस्पतिवार को सिवाया टोल प्लाजा पर जब यह पालकी पहुंची तो कांवड़ियों की भीड़ में एक अलग ही भावुक दृश्य दिखाई दिया। पालकी में बैठीं सोनदेवी हाथ जोड़े भोलेनाथ का स्मरण कर रही थीं और उनके पोते बारी-बारी से पालकी को कंधा देकर आगे बढ़ रहे थे। किसी के चेहरे पर थकान नहीं थी, बल्कि दादी की सेवा करने का संतोष था। हर कुछ दूरी पर कंधे बदलते लेकिन दादी को अपने साथ लेकर चलने का उत्साह कम नहीं होता। सिकंदराबाद क्षेत्र के हसनपुर जागीर गांव निवासी सोनदेवी ने बताया कि उसके पांच बेटे हैं, जिनके 24 बेटे हैं। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए पोतों ने ''''महाकाल ग्रुप’ बनाया और पालकी पर दादी को लेकर कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े। पोतों के अनुसार दादी बरसों से हरिद्वार जाकर गंगास्नान और कांवड़ यात्रा का पुण्य प्राप्त करने की इच्छा जताती थीं। उम्र अधिक होने के कारण उनके लिए पैदल चलना संभव नहीं था। तय हुआ कि दादी के कदम साथ नहीं दे सकते तो उनके पोते उनके कदम बनेंगे। इसी भाव के साथ उन्हें पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाया गया। सोनदेवी ने गंगा में डुबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया और फिर भोलेनाथ की भक्ति में लौटने की यात्रा शुरू की। रास्ते भर वह हाथ जोड़कर ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करती रहीं। यह दृश्य देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए। किसी ने दादी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया तो किसी ने कहा कि यह कांवड़ नहीं, पोतों के कंधों पर दादी के प्रति श्रद्धा और संस्कारों की यात्रा है। इस पवित्र यात्रा में सोनदेवी की आंखों में बरसों पुरानी मनोकामना पूरी होने की चमक है और पोतों के कंधों पर दादी की सेवा का गर्व। यह दृश्य संदेश दे रहा था कि जहां आस्था सच्ची हो, वहां उम्र बाधा नहीं बनती और जहां संस्कार जिंदा हों, वहां बुजुर्गों की इच्छा परिवार का संकल्प बन जाती है। (संवाद)
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