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गोविंद प्लाजा मामला...व्यापारी बोले-पहले से बनी दुकानें खरीदी थीं
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मेरठ। लालकुर्ती स्थित गोविंद प्लाजा में 400 दुकानों के अवैध निर्माण को लेकर रक्षा संपदा अधिकारी कार्यालय के नोटिस से व्यापारी बेचैन हैं। इस मामले में रविवार शाम गोविंद प्लाजा के व्यापारियों ने बैठक करके डीईओ द्वारा जारी नोटिस के बारे में विचार-विमर्श किया। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने कोई नया निर्माण नहीं किया है, बल्कि पहले से बनी दुकानें खरीदी हैं।
यह नोटिस डिंपल अरोड़ा द्वारा व्यापारी वरुण अग्रवाल की अवैध दुकान की शिकायत पर जारी किया गया था। नोटिस में जिस स्थान पर दुकानें बनी हैं, उसे रिहायशी बंगला संख्या 74 (सर्वे संख्या 335) बताया गया है। यह नोटिस रक्षा संपदा अधिकारी ने बंगले के अंग्रेज मालिक हेरोल्ड ऑब्रे सरकीज, ग्वेन लैंग, कैथलीन टर्नर, दुकानदार डिंपल अरोड़ा व वरुण अग्रवाल समेत अन्य दुकानदारों को भी जारी किया गया है। इससे दुकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है।
इस मामले में हुई बैठक में व्यापारी वरुण अग्रवाल ने बताया कि वे कोर्ट के स्टे को डीईओ कार्यालय में जमा कर चुके हैं। नोटिस में नया निर्माण होने की बात कही गई है, जबकि उन्होंने कोई निर्माण नहीं किया है, बल्कि पहले से बनीं दुकानें खरीदी थीं। इस प्लाजा का निर्माण 1999 के आसपास मेरठ के एक बिल्डर ने कराया था और उसने दुकानों को बेचा था।
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कैंट बोर्ड के निरीक्षक को पकड़वाया था
वरुण का कहना है कि 2023 में कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने उनसे रिश्वत की मांग की थी। इसकी शिकायत सीबीआई में कर दी थी। सीबीआई ने सफाई निरीक्षक योगेश यादव को रंगेहाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था, जबकि एक सफाई निरीक्षक अभिषेक गंगवार फरार हो गया था।
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यह नोटिस डिंपल अरोड़ा द्वारा व्यापारी वरुण अग्रवाल की अवैध दुकान की शिकायत पर जारी किया गया था। नोटिस में जिस स्थान पर दुकानें बनी हैं, उसे रिहायशी बंगला संख्या 74 (सर्वे संख्या 335) बताया गया है। यह नोटिस रक्षा संपदा अधिकारी ने बंगले के अंग्रेज मालिक हेरोल्ड ऑब्रे सरकीज, ग्वेन लैंग, कैथलीन टर्नर, दुकानदार डिंपल अरोड़ा व वरुण अग्रवाल समेत अन्य दुकानदारों को भी जारी किया गया है। इससे दुकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है।
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इस मामले में हुई बैठक में व्यापारी वरुण अग्रवाल ने बताया कि वे कोर्ट के स्टे को डीईओ कार्यालय में जमा कर चुके हैं। नोटिस में नया निर्माण होने की बात कही गई है, जबकि उन्होंने कोई निर्माण नहीं किया है, बल्कि पहले से बनीं दुकानें खरीदी थीं। इस प्लाजा का निर्माण 1999 के आसपास मेरठ के एक बिल्डर ने कराया था और उसने दुकानों को बेचा था।
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कैंट बोर्ड के निरीक्षक को पकड़वाया था
वरुण का कहना है कि 2023 में कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने उनसे रिश्वत की मांग की थी। इसकी शिकायत सीबीआई में कर दी थी। सीबीआई ने सफाई निरीक्षक योगेश यादव को रंगेहाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था, जबकि एक सफाई निरीक्षक अभिषेक गंगवार फरार हो गया था।