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वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ाव दे रही सरकार
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दौराला। रासायनिक खाद के अंधाधुंध इस्तेमाल से लगातार घट रही भूमि की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार जैविक खाद के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में सरकार किसानों को केंचुए की खाद बनाने के लिए अनुदान दे रही है। जिससे भूमि की उर्वर क्षमता को बढ़ाया जा सके।
घट रही भूमि की उत्पादन क्षमता
किसान पैदावार बढ़ाने एवं फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे भूमि की उर्वर क्षमता घटने के साथ-साथ मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं। इतना ही नहीं अन्न एवं सब्जियों का मनुष्य के शरीर पर भी कुप्रभाव पड़ रहा है। इतना ही नहीं मिट्टी में जिंक एवं सल्फर की कमी हो रही है। इससे आज की पीढ़ी की लंबाई पर असर पड़ रहा है।
केंचुआ खाद को दिया जा रहा बढ़ावा
भूमि की उर्वर क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार वर्मी कम्पोस्ट योजना अंर्तगत केंचुआ खाद बनाए जाने पर जोर दे रही है। इसके लिए किसानों को अपने खेतों में केंचुआ खाद बनाने के लिए गड्ढा तैयार करने पर सरकार 6 हजार रुपये अनुदान दे रही है। इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों को सात फीट लंबा, तीन फीट चौड़ा एवं एक फीट गहरा गड्ढा तैयार करना है। इसके बाद इस पर शेड डालना होगा। गड्ढा तैयार होने के बाद किसान को इसमें गोबर भरना होगा और सरकार से किसान को केंचुए भी दिए जाएंगे।
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फसल लागत होगी कम, बढ़ेगी आय
वर्मी कम्पोस्ट योजना अंर्तगत केंचुआ खाद बनाने से किसान की फसल में लागत कम आएगी। दरअसल यह खाद पूरी तरह जैविक होगी। इसका फसलों में प्रयोग करने से किसान को महंगा खाद एवं कीटनाशक खरीदने से मुक्ति मिलेगी। वहीं, किसान इस खाद को बेचकर आय बढ़ा सकता है। इस योजना का लाभ एक साल में एक गांव से एक ही किसान को मिलेगा। अभी तक सिवाया गांव स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार पर पहुंचकर इस योजना का लाभ लेने के लिए लगभग 37 किसानों ने आवेदन किया है। जल्द ही इन किसानों के खेतों में केंचुआ खाद तैयार कराई जाएगी।
वर्जन
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार वर्मी कम्पोस्ट योजना चला रही है। इसके अंर्तगत लाभ लेने वाले किसान को अपने खेत में केंचुए से खाद बनानी होगी। खाद बनाने वाले किसान को सरकार छह हजार रुपये का अनुदान दे रही है। किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी लागत में कमी लाने के साथ-साथ आय बढ़ा सकेगा।-कृष्णकांत, प्राविधिक सहायक, राजकीय कृषि बीज भंडार सिवाया
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घट रही भूमि की उत्पादन क्षमता
किसान पैदावार बढ़ाने एवं फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे भूमि की उर्वर क्षमता घटने के साथ-साथ मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं। इतना ही नहीं अन्न एवं सब्जियों का मनुष्य के शरीर पर भी कुप्रभाव पड़ रहा है। इतना ही नहीं मिट्टी में जिंक एवं सल्फर की कमी हो रही है। इससे आज की पीढ़ी की लंबाई पर असर पड़ रहा है।
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केंचुआ खाद को दिया जा रहा बढ़ावा
भूमि की उर्वर क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार वर्मी कम्पोस्ट योजना अंर्तगत केंचुआ खाद बनाए जाने पर जोर दे रही है। इसके लिए किसानों को अपने खेतों में केंचुआ खाद बनाने के लिए गड्ढा तैयार करने पर सरकार 6 हजार रुपये अनुदान दे रही है। इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों को सात फीट लंबा, तीन फीट चौड़ा एवं एक फीट गहरा गड्ढा तैयार करना है। इसके बाद इस पर शेड डालना होगा। गड्ढा तैयार होने के बाद किसान को इसमें गोबर भरना होगा और सरकार से किसान को केंचुए भी दिए जाएंगे।
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फसल लागत होगी कम, बढ़ेगी आय
वर्मी कम्पोस्ट योजना अंर्तगत केंचुआ खाद बनाने से किसान की फसल में लागत कम आएगी। दरअसल यह खाद पूरी तरह जैविक होगी। इसका फसलों में प्रयोग करने से किसान को महंगा खाद एवं कीटनाशक खरीदने से मुक्ति मिलेगी। वहीं, किसान इस खाद को बेचकर आय बढ़ा सकता है। इस योजना का लाभ एक साल में एक गांव से एक ही किसान को मिलेगा। अभी तक सिवाया गांव स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार पर पहुंचकर इस योजना का लाभ लेने के लिए लगभग 37 किसानों ने आवेदन किया है। जल्द ही इन किसानों के खेतों में केंचुआ खाद तैयार कराई जाएगी।
वर्जन
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार वर्मी कम्पोस्ट योजना चला रही है। इसके अंर्तगत लाभ लेने वाले किसान को अपने खेत में केंचुए से खाद बनानी होगी। खाद बनाने वाले किसान को सरकार छह हजार रुपये का अनुदान दे रही है। किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी लागत में कमी लाने के साथ-साथ आय बढ़ा सकेगा।-कृष्णकांत, प्राविधिक सहायक, राजकीय कृषि बीज भंडार सिवाया