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37 अरब से ज्यादा के घोटाले में निशाने पर प्राइवेट बैंक, होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sun, 05 Feb 2017 01:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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37 अरब से ज्यादा के सोशल ट्रेडिंग के घोटाले में यूपीएसटीएफ ने आयकर और सेंट्रल एक्साइज विभाग को अहम दस्तावेज मुहैया कराए हैं। जिसके बाद अनुभव मित्तल की सोशल ट्रेड बिज पोर्टल के साथ ही बाकी तमाम सारे पोर्टल जांच के दायरे में हैं। यूपी एसटीएफ, आयकर और सेंट्रल एक्साइज विभाग के अलावा उसकी सहायक एजेंसियां भी घोटाले से जुड़ा रिकॉर्ड साझा कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार निशाने पर सोशल ट्रेडिंग से जुड़ीं कंपनियों के साथ प्राइवेट बैंक भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
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सूत्रों के अनुसार आयकर, सेंट्रल एक्साइज और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) की तरफ से दर्जन भर से अधिक सोशल ट्रेडिंग कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। इन तमाम कंपनियों से ट्रांजैक्शन और बैंक खातों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही जो कंपनियां तीन माह से अधिक पुरानी है, उनसे हर तिमाही की ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई है। सभी रिपोर्ट्स के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
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कंपनियों ने रोका ट्रांजैक्शन
अनुभव मित्तल की गिरफ्तारी के बाद से सोशल ट्रेडिंग कंपनियों ने फिलहाल ट्रांजैक्शन रोक दिया है। लेकिन ग्राहकों के गुस्से से बचने के लिए सभी कंपनियां पेज लाइक करने के लिए बराबर लिंक भेज रही हैं। इसके पीछे भरोसा दिया जा रहा है कि बैंक खातों को अपग्रेड किया जाना है, जिस कारण से अभी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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प्राइवेट बैंकों से मिली मदद
सोशल ट्रेडिंग के कारोबार में बैंकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। क्योंकि कुछ बैंक खाते ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जो कंपनी के पंजीकरण एड्रेस से मेल नहीं खाते हैं। सूत्रों के अनुसार एक कंपनी नोएडा के सेक्टर 63 में है, तो उसका बैंक खाता नोएडा के किसी दूसरे सेक्टर के पते पर खुला है। वहीं, कंपनियों का सारा लेनदेन एक खाते से नहीं है। लाइक से जुड़े पैक बेचने पर सोशल कंपनियां किसी दूसरे खाते में ग्राहक से पैसा लेती हैं और पेज लाइक करने के बाद होने वाला भुगतान किसी दूसरे खाता नंबर से किया जा रहा है। ऐसे कुछ एकाउंट नंबर गाजियाबाद निवासी एके जैन की शिकायत पर डीजीसीईआई द्वारा भी चिह्नित किए गए हैं।
केंद्रीय एजेंसियां समझ नहीं पाईं खेल
बीते करीब दो साल के दौरान सोशल ट्रेडिंग कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी। सभी ने पंजीकरण लेकर टैक्स भी चुकाया। ऐसे में सेंट्रल एक्साइज से लेकर इनकम टैक्स विभाग उनकी धोखाधड़ी को नहीं पकड़ पाये। जबकि डीजीसीईआई के पास सबसे ज्यादा बड़ी शिकायत थी। जिसमें तमाम साक्ष्य लगाए गए थे। विभाग ने जांच भी शुरू की। जब देखा कि कंपनी 100 करोड़ से ऊपर का टैक्स दे रही है तो माना कि धोखाधड़ी नहीं हो सकती है। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक कंपनी का 37 अरब का कारोबार होगा। अब सारा मामला सामने आया तो तमाम विभाग जांच में जुटे हैं।