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Meerut News: न टेंडर और न जैम पोर्टल से खरीदा सामान, कच्चे बिल पर करोड़ों का भुगतान

Thu, 26 Sep 2024 06:20 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2024 06:20 AM IST
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Goods purchased from neither tender nor JAM portal, payment of crores on raw bill
पांच लाख कीमत की मरम्मत में 20 लाख खर्च करने का मामला, पिछले साल के खर्च का खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम के वाहन डिपो में करोड़ों के घोटाले की परत दर परत खुलने लगी हैं। न टेंडर हुआ और न जैम पोर्टल से सामान खरीदा गया। नियमों को दरकिनार कर सालों से कच्चे बिलों पर भुगतान होता रहा है। घोटाले के तार कहां तक जुड़े हैं, इसका पता लगाने के लिए पिछले साल (2022-23) का भी रिकॉर्ड खंगालना शुरू हो गया है। निगम में कितने वाहन निष्प्रयोज्य (अवधि समाप्त) हो चुके हैं। उनकी मरम्मत, डीजल-पेट्रोल का भुगतान भी लगातार होना बताया जा रहा है।
सूरजकुंड, कंकरखेड़ा और दिल्ली रोड वाहन डिपो में 256 वाहन है। इसमें प्रत्येक वर्ष 700 लाख वाहन मरम्मत और 2500 लाख पेट्रोल-डीजल का बजट नगर निगम में निर्धारित है। वाहन डिपो के वाहनों की मरम्मत करने का टेंडर और जैम पोर्टल से सामान खरीदने के निर्देश शासन के हैं। इसके बावजूद नगर निगम में नियमों को दरकिनार करके वाहन डिपो में खर्च होने वाले करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया जाता है। वाहन की कीमत पांच लाख और मरम्मत में 20 लाख खर्च होने का खुलासा अमर उजाला ने 25 अक्तूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। यह घोटाला निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों द्वारा उठाई मांग पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक की गोपनीय जांच में हुआ है। जांच अभी जारी है, जोकि महापौर और नगर आयुक्त को सौंपनी है। बताया गया है कि डिपो के वाहनों की मरम्मत में कच्चे बिलों पर निगम भुगतान करता रहा है। जिसकी मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने पड़ताल शुरू कर दी। घोटाला बड़ा है, इसको देखते हुए मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने पिछले साल का भी रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया। दिल्ली रोड वाहन डिपो में 2023-24 में घोटाले की जांच पूरी हो चुकी। अब 2022-23 का भी दिल्ली रोड़, सूरजकुंड और कंकरखेड़ा वाहन डिपो प्रभारियों से रिकॉर्ड जांच अधिकारी ने मांगा है। कितने वाहन निष्प्रयोज्य हो गए हैं, इसकी भी पड़ताल करेंगे।
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कच्चे बिल की पड़ताल में खुलेगा खेल
वाहन डिपो में वाहनों की मरम्मत का ठेका कुछ चुनिंदा ठेकेदारों पर है। डिपो के कर्मचारी व अधिकारी मिलकर ठेकेदारों के कच्चे बिल बनवाकर भुगतान होता है। वाहन डिपो के बिल पर किस-किस अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और कौन मॉनीटरिंग करते हैं। इसकी गंभीरता से पड़ताल होगी तो चौंकाने वाला खुलासा होगा। तीन-चार सालों से वाहन डिपो में ऑडिट नहीं किया गया। ठेकेदारों की भी कुंडली खंगालने का काम चल रहा है। इसे लेकर वाहन डिपो में बुधवार दिनभर हलचल रही।
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भाजपा पार्षदों ने नगर आयुक्त को दिया पत्र
वाहन डिपो में घोटाले का खुलासा होने पर नगर निगम में खलबली मच गई। भाजपा पार्षद संजय सैनी व पवन चौधरी ने नगर आयुक्त को पत्र लिखा। इसमें मुख्य नगर लेखा परीक्षक के प्री-ऑडिट पर सवाल उठाया है। पार्षदों का आरोप कि मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा प्री-ऑडिट के नाम पर अतिरिक्त धन लिया जा रहा है। जिसके चलते नेताओं और निगम की छवि धूमिल की जा रही है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव का कहना कि लेखा नियमावली में प्री-ऑडिट करने का प्रावधान है। नगर आयुक्त के निर्देश पर वाहन डिपो का प्री-ऑडिट किया गया है। अभी कुछ बिंदु शेष बचे हैं। जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपेंगे। पार्षदों के आरोप निराधार हैं। लिखित में पत्र आएगा तो उसका जवाब दिया जाएगा।
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