मेरठ से दिल्ली के बीच जल्द चलेगी रैपिड रेल, 4304 करोड़ रुपये देगी UP सरकार
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रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के सराय काले खां (दिल्ली)-मेरठ कॉरिडोर के निर्माण पर यूपी सरकार 4304 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस प्रोजेक्ट के टोकन मनी के रूप में यूपी सरकार 100 करोड़ रुपये देगी लेकिन इससे पहले सरकार को 2017-18 के बजट में इसका प्रावधान कराना है। यानी अब जल्द ही आरआरटीएस के इस दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन) ने 2016 में ही आरआरटीएस के इस कॉरिडोर की रिवाइज्ड डीपीआर तैयार कर बोर्ड से पास करा ली थी, लेकिन यूपी में विधानसभा चुनाव के चलते प्रदेश सरकार से इसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी। अब नई सरकार के गठन के बाद इस प्रोजेक्ट पर वित्तीय मंजूरी मिल गई है। कुल 32 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 60 फीसदी रकम ऋण लेकर जुटाई जाएगी। बाकी रकम में यूपी और दिल्ली की सरकार व केंद्र सरकार पैसा देगी। इसमें यूपी सरकार को 4304 करोड़ रुपये अंशदान देना है। शासन की मंजूरी के बाद शासन ने एनसीआरटीसी को पत्र भेजकर जानकारी दी है कि टोकन मनी के रूप में जल्द ही 100 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। दिल्ली सरकार को 861 करोड़ रुपये व केंद्र सरकार को 5165 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में प्रावधान कराया जा रहा है।
जुलाई 2024 तक तैयार करना है कॉरिडोर
दिल्ली सराय काले खां से मेरठ तक करीब 92 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण तीन फेज में पूरा होगा। सबसे पहले साहिबाबाद (पैसेफिक मॉल के पास) से परतापुर तक 38 किलोमीटर लंबा रूट तैयार किया जाएगा। यह हिस्सा जनवरी 2023 तक पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण में साहिबाबाद से सराय काले खां तक का रूट जनवरी 2024 तक पूरा हो जाएगा। जुलाई 2024 तक कॉरिडोर के तीसरे और अंतिम चरण में परतापुर से मोदीपुरम मेरठ तक का प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा। इस कॉरिडोर में कुल 17 स्टेशन होंगे, इनमें सात स्टेशन गाजियाबाद की सीमा में होंगे।
वित्तीय प्रबंधन को कमेटी गठित होगी
वित्तीय प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर कमेटी का गठन होगा। वित्तीय प्रबंधन के लिए जो राजस्व प्राप्त हो, उसका सदुपयोग होगा। अहम बात यह भी है कि प्रदेश सरकार का वित्तीय भार और कम करने पर जोर है। इसके लिए चार बिंदुओं पर कार्य होगा। जिससे एक ओर जहां प्राधिकरणों की आय बढ़ाई जाएगी तो वहीं प्रोजेक्ट के लिये कुछ अन्य वित्तीय सहायता भी उपलब्ध होगी। अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) पर काम होगा। एफएआर बढ़ाया जाएगा ताकि आय भी बढ़ सके। अतिरिक्त विकास या अति सुदृढ़ीकरण चार्ज से भी आय में इजाफा किया जा सकता है। ट्रांजिट ओरिएंटिड डेवलेपमेंट पर ट्रांजेक्शन सेस व अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी लगाने पर कितना राजस्व प्राप्त होगा तथा उससे परियोजना की क्या मदद हो सकेगी, इसका अनुमान निकाला जाएगा तथा इसकी आख्या प्रमुख सचिव को भेजी जाएगी। इस बाबत खुद कमिश्नर ने कहा है कि प्रबंधन कमेटी बीस दिन में अपनी रिपोर्ट तैयार करे ताकि इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
हाईस्पीड ट्रेन की खासियत
- हवाई जहाज जैसी सीटें होंगी, हर 10 से 15 मिनट में मिलेगी ट्रे
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- अचानक बिजली से संपर्क खत्म होने पर भी 90 मिनट तक ट्रेन में वेंटिलेशन की दिक्कत नहीं होगी।
- ओवरहेड वॉयर से बिजली मिलनी बंद होने पर तीन घंटे तक लाइट और उद्घोषणा उपकरण काम करेंगे।
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