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10वीं में इंटरनल असेसमेंट में सभी को मिलेंगे अच्छे अंक
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10वीं में इंटरनल असेसमेंट में सभी को मिलेंगे अच्छे अंक
मेरठ। सीबीएसई दसवीं की परीक्षा कैंसिल होने के बाद छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। सभी छात्रों को अच्छे अंक मिलेंगे और सभी पास भी होंगे। पहले भी सीबीएसई में इंटरनल असेसमेंट के आधार पर छात्रों को बोर्ड परीक्षा में अंक देने की व्यवस्था रह चुकी है।
बोर्ड परीक्षा नहीं होने से अगर इंटरनल असेसमेंट से छात्रों को पास किया गया तो ग्रेड मार्किंग होगी। इस सिस्टम में टॉपर नहीं होगा लेकिन पास सभी होंगे। इंटरनल ग्रेडिंग में स्कूलों द्वारा अपने टॉपर बताने का दावा नहीं रहेगा। छात्रों को प्रीबोर्ड और स्कूल में उनकी परफार्मेंस के आधार पर नंबर दिए जाएंगे। दीवान पब्लिक स्कूल के निदेशक एचएम राउत बताते हैं कि अभिभावक परेशान न हों।
साल 2009 में पहले भी एक बार ऐसा हुआ था जब सीबीएसई की परीक्षा न होकर स्कूल बेस्ड एग्जाम भी हुए थे। इस स्कीम को बाद में इसलिए बदला गया कि हर स्कूल का अपना अलग नियम था। अधिकतर स्कूलों में मॉक बोर्ड परीक्षाएं कराई गई हैं, ऐसे में विद्यार्थियों की योग्यता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जहां तक 10वीं के बाद विषय चयन का सवाल है तो स्कूलों की तरफ से काउंसिलिंग कराई जाती है। स्कूलों को चाहिए कि इस बार काउंसिलिंग की और अच्छे से व्यवस्था करें जिससे विद्यार्थियों के स्कोर को देखते हुए सही विषय मिल सकें।
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मेरठ। सीबीएसई दसवीं की परीक्षा कैंसिल होने के बाद छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। सभी छात्रों को अच्छे अंक मिलेंगे और सभी पास भी होंगे। पहले भी सीबीएसई में इंटरनल असेसमेंट के आधार पर छात्रों को बोर्ड परीक्षा में अंक देने की व्यवस्था रह चुकी है।
बोर्ड परीक्षा नहीं होने से अगर इंटरनल असेसमेंट से छात्रों को पास किया गया तो ग्रेड मार्किंग होगी। इस सिस्टम में टॉपर नहीं होगा लेकिन पास सभी होंगे। इंटरनल ग्रेडिंग में स्कूलों द्वारा अपने टॉपर बताने का दावा नहीं रहेगा। छात्रों को प्रीबोर्ड और स्कूल में उनकी परफार्मेंस के आधार पर नंबर दिए जाएंगे। दीवान पब्लिक स्कूल के निदेशक एचएम राउत बताते हैं कि अभिभावक परेशान न हों।
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साल 2009 में पहले भी एक बार ऐसा हुआ था जब सीबीएसई की परीक्षा न होकर स्कूल बेस्ड एग्जाम भी हुए थे। इस स्कीम को बाद में इसलिए बदला गया कि हर स्कूल का अपना अलग नियम था। अधिकतर स्कूलों में मॉक बोर्ड परीक्षाएं कराई गई हैं, ऐसे में विद्यार्थियों की योग्यता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जहां तक 10वीं के बाद विषय चयन का सवाल है तो स्कूलों की तरफ से काउंसिलिंग कराई जाती है। स्कूलों को चाहिए कि इस बार काउंसिलिंग की और अच्छे से व्यवस्था करें जिससे विद्यार्थियों के स्कोर को देखते हुए सही विषय मिल सकें।
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