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13 किलाे सोने से लदे GOLDEN BABA का काफिला मेरठ से निकला, दो किलो सोना हुआ कम

Sat, 22 Jul 2017 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ/मोदीपुरम
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ/मोदीपुरम Updated Sat, 22 Jul 2017 10:07 PM IST
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Golden Baba who reached Meerut after wearing 13 kg gold
golden baba - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

गोल्डन बाबा हरिद्वार से जल लेकर सोमवार को मोदीपुरम पहुंचे। काफिले में ऑडी और फॉरच्यूनर समेत 22 वाहन चल रहे हैं। गोल्डन बाबा के साथ तीस कांवडिये, 30 निजी सुरक्षाकर्मी, एबुलेंस, रसोई वाहन के अलावा पुलिस सुरक्षा भी हैं। गोल्डन बाबा को देखने और उनके साथ सेल्फी के लिए भीड़ भी बेकाबू रही। पुलिस ने किसी को भी उसके पास तक आने नहीं दिया। अपनी फॉरच्यूनर गाड़ी पर चढ़कर बाबा डांस करते हुए अपने भक्तों का अभिवादन कर रहे थे। 

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दिल्ली के रहने वाले गोल्डन बाबा (सुधीर कुमार) का गारमेंट का कारोबार था। बाबा ने बताया कि लगभग डेढ सौ करोड़ रुपये की प्रॉपट्री को छोड़कर वह शिवभक्ति में लीन हो गए। उनकी पत्नी राधा स्वामी सत्संग में सेवा कर रही है। लगभग 24 साल से लगातार वह हरिद्वार से कांवड़ ला रहे हैं। वह 15 किलो सोना पहनते हैं, लेकिन गले में ऑपरेशन के चलते अब उन्होंने 13 किलो सोना पहनना शुरू कर दिया। हाल ही में सवा दो किलो सोने की माला बनवायी है। उनकी कांवड़ यात्रा में 80 से लेकर 90 लाख रुपये तक का खर्च आता है। यात्रा के लिए खर्चा भोलेनाथ के नाम से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी को बेचकर यात्रा में लगाते हैं। उनके कोई संतान नहीं है। उन्होंने बताया कि सोने का उनके लिए कोई महत्व नहीं है, वह सिर्फ इसलिए सोने को पहनते हैं कि वह गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर हो गए। वह 16 मणि जूना आखडा के श्री महंत भी हैं। वह 21 जुलाई को दिल्ली के गांधीनगर लक्ष्मी नारायण मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।

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हरकी पैड़ी पर बेच चुके हैं माला

Golden Baba who reached Meerut after wearing 13 kg gold
golden baba - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

गोल्डन बाबा ने बताया कि सन 1981-82 में उन्होंने हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर माला भी बेची है। छह साल की उम्र में परिवार वालों ने उन्हे गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर हरिद्वार छोड़ दिया था। तभी से जनेऊ धारण कर लिया था। वह पहली कांवड़ 1972-73 में मात्र 250 रुपये में लाए थे। 

ये गाड़ियां हैं बाबा के काफिले में 

ऑडी -  2 
फॉरच्यूनर - 2 
अन्य वाहन 18

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