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बुद्धि से नहीं, भाव से मिलते हैं भगवान : गोपाल कृष्ण
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- बाबा औघड़नाथ मंदिर में राधे पुराण कथा महोत्सव हुआ शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर की ओर से बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में आयोजित राधे पुराण कथा महोत्सव के प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। इसमें कथा व्यास गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि भगवान तर्क या बुद्धि से नहीं भाव और श्रद्धा से प्राप्त होते हैं।
कथा व्यास ने राधे पुराण के माध्यम से दिव्य लोकों एवं गोलोक की अलौकिक यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संसार का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो भगवान की प्राप्ति का मार्ग खोज लेता है। उन्होंने कहा कि भगवान भाव, श्रद्धा और आत्म अनुभव से प्राप्त होते हैं।
उन्होंने श्री लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मटकी लीला का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वर के समक्ष समर्पित कर देता है, तब भगवान उसके कर्म बंधनों को तोड़कर उसे मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार का दायित्व सौंपे जाने की कथा के माध्यम से उन्होंने सृष्टि के कालचक्र का भी विस्तार से वर्णन किया।
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एक प्रेरक दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने बताया कि मानव की इच्छाओं का अंत नहीं होता है। जीवन में संतोष और ईश्वर प्रेम का भाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्री राधे पुराण प्रेम का पुराण है। जो व्यक्ति इसे श्रद्धा भाव से पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन में प्रेम, करुणा और भक्ति का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि वेदों के गूढ़ ज्ञान को सरलता से जन-जन तक पहुंचाने के लिए पुराणों की रचना की गई। श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन और आरती में भी सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर की ओर से बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में आयोजित राधे पुराण कथा महोत्सव के प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। इसमें कथा व्यास गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि भगवान तर्क या बुद्धि से नहीं भाव और श्रद्धा से प्राप्त होते हैं।
कथा व्यास ने राधे पुराण के माध्यम से दिव्य लोकों एवं गोलोक की अलौकिक यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संसार का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो भगवान की प्राप्ति का मार्ग खोज लेता है। उन्होंने कहा कि भगवान भाव, श्रद्धा और आत्म अनुभव से प्राप्त होते हैं।
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उन्होंने श्री लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मटकी लीला का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वर के समक्ष समर्पित कर देता है, तब भगवान उसके कर्म बंधनों को तोड़कर उसे मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार का दायित्व सौंपे जाने की कथा के माध्यम से उन्होंने सृष्टि के कालचक्र का भी विस्तार से वर्णन किया।
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एक प्रेरक दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने बताया कि मानव की इच्छाओं का अंत नहीं होता है। जीवन में संतोष और ईश्वर प्रेम का भाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्री राधे पुराण प्रेम का पुराण है। जो व्यक्ति इसे श्रद्धा भाव से पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन में प्रेम, करुणा और भक्ति का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि वेदों के गूढ़ ज्ञान को सरलता से जन-जन तक पहुंचाने के लिए पुराणों की रचना की गई। श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन और आरती में भी सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।