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Meerut News: वातावरण के लिए ग्लोबल वार्मिंग बड़ा खतरा

Sun, 19 Mar 2023 01:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Mar 2023 01:36 AM IST
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Global warming is a big threat to the environment
मेरठ। मेरठ मैनेजमेंट एसोसिएशन के 35वें वार्षिक कंवेन्शन का आयोजन मोदीपुरम में हुआ। कार्यक्रम में ग्लोबल वार्मिंग को वातावरण के लिए खतरा बताया गया। अतिथियों ने एसोसिएशन के सोविनियर एन्डेवर का विमोचन किया। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ सेवानिवृत्त चेयरमैन नेटवर्क फाॅर सर्टिफिकेशन एंड कनजरवेशन ऑफ फारेस्ट आईएएस विजय शर्मा, डॉ. पूनम देवदत्त, कर्नल डॉ. नरेश कुमार ने किया।
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दौराला शुगर मिल से आए संजय रस्तोगी ने बताया कि विश्वभर में कार्बन मोनोक्साइड गैस का सर्वाधिक डिस्चार्ज विकसित देश जैसे अमेरिका, चीन कर रहे हैं। भारत न्यूनतम डिस्चार्ज करता है। भारत में आगामी पांच साल में सभी उद्योग सीएनजी आधारित हो जाएंगे। डिस्टलरी से जल प्रदूषण पूरी तरह खत्म हो गया है। प्लास्टिक का उपयोग भी न्यूनतम है। डॉ. स्मृति तिवारी जस्सल ने ग्रामीणों इलाकों में लिंग समानता पर अपने अनुसंधान के विषय में बताया। उन्होंने टर्की और भारत में मानव शास्त्र पर अनुसंधान पर आधारित वक्तव्य सुनाया।
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डॉ. राहुल बंसल ने वन कोनसेसनेस वन माइंड को लेकर ज्ञानवर्धन किया। बताया कि ब्रह्मांडनीय चेतना व मन पूरे विश्व की गतिविधियों को संचालित करते हैं। इस बीच वक्ताओं के बीच पैनल डिस्कशन हुआ। कार्यक्रम में मनु ऋषि, योगेश गर्ग, अनुराग अग्रवाल, विभोर अग्रवाल, राजेंद्र सिंह, पुनीत आनंद, कमल आनंद, अभय दयाल, डॉ. मनोज गर्ग, एसपीएम जग्गी, विशाल जैन आदि रहे।
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पर्यावरण बचाने के लिए बनाया एनजीटी : विजय शर्मा
मेरठ। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रिंसिपल बैंच के पूर्व सदस्य आईएएस विजय शर्मा ने बताया कि एनजीटी की स्थापना के समय वह उस बेंच के सदस्य रहे। एनजीटी पर्यावरण की रक्षा के लिए बनाया गया। उन्होंने बताया कि बीसवीं सदी के बाद से जैसे जैसे औद्योगीकरण में वृद्धि हुई। प्राकृतिक संंसाधनों का सीमा से अधिक दोहन किया जा रहा है। हाल के वर्षों में एनजीटी ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के संबंध में वर्ष 2012 में निर्णय लिया। 15 साल से अधिक पुराने डीजल या पेट्रोल से चलने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई। गंगा के पुनर्जीवित और स्वच्छ करने की स्थिति में कई दिशा निर्देश जारी किए। उन्नाव खंड के किनारे से 100 मीटर के क्षेत्र को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया। यमुना के कायाकल्प पर निर्णय लिया गया। एनजीटी ने प्लास्टिक थैलों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया। उन्होंने बताया कि यह सब निर्णय पर्यावरण को बचाने के लिए किया गया। ब्यूरो
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