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अमर उजाला अपराजिता अभियान: ‘पुरातन काल से ही लोहा मनवाती आई हैं बेटियां’

Tue, 23 Apr 2019 09:16 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 23 Apr 2019 09:16 PM IST
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Girl students took oath to fight against exploitation in the Amar Ujala Aparajita program at Bijnor
छात्राओं ने शपथ ली - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम के तहत रूट्स इंटरनेशनल स्कूल में ‘नारी सशक्तिकरण में समाज की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने नारी की गरिमा को बनाए रखने व अत्याचार और शोषण के विरुद्ध डटकर खड़े रहने की शपथ ली। 

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बिजनौर में मंगलवार को विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के उप प्रधानाचार्य दिनेश त्यागी ने अमर उजाला द्वारा महिला उत्थान के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं पुरातन काल से ही अपनी ताकत का लोहा मनवाती आई हैं।
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अनेक ऐसे उदाहरण हैं जब महिलाओं ने अपनी व अपने देश की रक्षा के लिए युद्ध में भी भाग लिया और इतिहास में अमर हो गईं। बदलते वक्त के साथ महिलाओं के प्रति लोगों की सोच भी बदल गई है। महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हैं। महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और आईटी, इंजीनियरिंग, व्यवसाय के अलावा अंतरिक्ष और सेना में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
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इतना ही नहीं कई देशों की सत्ता की बागडोर भी आज महिलाओं के हाथ में हैं और नारी हमेशा से ही अपराजिता रही हैं। कहा कि समाज के सभी लोगों का कर्तव्य है कि महिलाओं का सम्मान करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें, तभी सही मायनों में देश तरक्की कर सकेगा। 

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के बीच नारी उत्थान में समाज की भूमिका विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कक्षा आठ से 12 तक की करीब 200 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के आयोजन में विरेश कुमार, सीमा, मीरा त्यागी, प्रियंका, श्रद्धा यादव आदि का विशेष सहयोग रहा। 

‘समान अधिकार मिलना उनका हक है’
शिक्षिका सीमा ने कहा कि नारी समाज का अभिन्न अंग है। कुछ स्थानों पर आज भी नारी को पर्दे में रहने के लिए विवश किया जाता है, यह दुख की बात है। महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार मिलना उनका हक है।

समाज को अपनी सोच बदलनी होगी
शिक्षिका पूजा वर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्यक्रम किए जाते हैं, लेकिन आज भी आन, बान के लिए लड़कियों की हत्या तक कर दी जाती है। समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। वहीं लड़कियों का भी कर्तव्य है कि वह अपने चरित्र पर किसी को उंगली उठाने का अवसर न दें। 

सामाजिक और आर्थिक रूप हैं आत्मनिर्भर
शिक्षिका श्रद्धा यादव ने कहा कि आज महिला सामाजिक व आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। महिलाओं को अपने परिवार और कार्यक्षेत्र के बीच समन्वय बनाए रखना चाहिए तभी वह अपराजिता हो पाएगी। 

शोषण के खिलाफ बुलंद करनी होगी आवाज
शिक्षिका प्रियंका के अनुसार महिलाओं को अपने किसी भी शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करनी चाहिए। हमारा कर्तव्य बनता है कि न तो अपना शोषण होने दें और न ही अन्य किसी का शोषण बर्दाश्त करें।
 
निरंतर प्रयास है जरूरी
शिक्षिका प्राची चौहान ने अमर उजाला के अपराजिता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सोच बदलने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।

अभियान से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
छात्रा दिव्यांशी ने कहा कि विद्यालय में हुए अपराजिता कार्यक्रम से उन्हें नारी शक्ति का एहसास हुआ है। इससे उन्हें बिना डरें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। 

जागरुक हो रही हैं महिलाएं
छात्रा विशाखा का कहना है कि अमर उजाला खबरों के साथ, सामाजिक दायित्वों को निभाने में भी नंबर एक पर है। इस अभियान से महिलाएं जागरुक हो रही हैं।

वक्त के साथ समाज की बदली है सोच
छात्रा उमरा का कहना है कि वक्त के साथ समाज की सोच भी बदली है। पहले अभिभावक बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने में संकोच करते थे, लेकिन आज वह परिवार से दूर अकेले विदेशों तक शिक्षा ले रहीं हैं। समाज की सोच में यह बदलाव अच्छी बात है। 

भ्रूण हत्या रोकने के लिए और करने होंगे प्रयास
अदिति राठी व अदिति चौहान का कहना है कि गिरता लिंगानुपात चिंता का विषय है। समाज में भ्रूण हत्या रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि घर में जब बेटियां ही नहीं होंगी तो बेटे के लिए बहु कहां से आएगी, इस बात को सभी अच्छे ढंग से समझना होगा।

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