मेरठ में आखिर क्यों घर छोड़ने को मजबूर हैं लोग, एडीजी समेत कई अधिकारियों ने की पड़ताल
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जानकारी के अनुसार, गुरुवार को मामले की जानकारी लगते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। एडीजी प्रशांत कुमार, आईजी, कमिश्नर व डीएम समेत जिले के कई आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की।
प्रह्लाद नगर के चारों ओर अल्पसंख्यक बहुल मोहल्ले हैं। देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए बहुसंख्यकों को यहां बसाया गया था। इसे रिफ्यूजी कॉलोनी के नाम से भी जाना जाता है। यह इलाका पंजाबी बहुल है।
प्रह्लाद नगर की सीमा इस्लामाबाद, पिल्लोखड़ी, श्यामनगर, गोलाकुआं समेत अन्य मोहल्लों से मिलती है। इसी वजह से इसको बेहद संवेदनशील माना जाता है। आरोप है कि आपराधिक प्रवृति के लोगों ने प्रह्लाद नगर में रहने वाले लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
यहां से लोगों के पलायन की बात सामने आई तो अमर उजाला की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। मालूम चला कि यहां कई घरों पर ताले लगे हैं तो कहीं पर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखा हुआ था।
रिपोर्टर ने स्थानीय करीब 20 लोगों से बातचीत की। जिन्होंने एक ही बात बताई कि यहां का माहौल अब रहने लायक नहीं रहा। शाम को ऐसा माहौल हो जाता है कि बहू बेटी घर से नहीं निकल सकती। युवक बाइक से हवाई फायरिंग करके भाग जाते हैं। लोग वहां से घर छोड़कर जाने को मजबूर हैं।
कई बार उठा मुद्दा
भाजपा पार्षद जितेंद्र पाहवा का कहना है कि प्रह्लाद नगर सोसाइटी की मीटिंग में इस समस्या को उठाया। विधायक और पुलिस-प्रशासन को भी बताया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। वहीं स्थानीय निवासी भावेश मेहता ने नमो एप पर इसकी शिकायत की तो सीएम ऑफिस से इसकी रिपोर्ट तलब की गई। पार्षद के अनुसार शिकायत में 125 परिवारों द्वारा यहां से जाने की बात कही गई।
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