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कर्मचारी भर्ती घोटाले का जिन्न आया बाहर
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कर्मचारी भर्ती घोटाले का जिन्न आया बाहर
मेरठ। नगर निगम में हुए विकलांग भर्ती घोटाले का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें 20 जनवरी को सुनवाई होनी है। नगर निगम प्रशासन और सीएमओ लखनऊ के मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में देनी होगी। उसी के आधार पर हाईकोर्ट पहुंचे चारों विकलांग कर्मचारियों की नौकरी पर फैसला आएगा।
नगर निगम में 2016 में 18 विकलांग कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इसकी शिकायत कांग्रेसी नेता जाहिद अंसारी ने शासन में की थी। उस पर शासन ने जांच बैठा दी थी। जांच के दौरान ही दो कर्मचारी स्वयं नौकरी छोड़कर चले गए थे। बाकी कर्मचारियों का चिकित्सा परीक्षण मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया था। बोर्ड ने भदोही निवासी श्याम चंद सहित चार कर्मचारियों को अयोग्य घोषित करते हुए नौकरी से निकाल दिया था। जबकि 12 कर्मचारी उसी समय से निगम में नौकरी कर रहे हैं। तीन साल बाद श्याम चंद सहित चारों विकलांगों ने हाईकोर्ट की शरण ली। न्यायालय ने लखनऊ सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड टीम को चारों कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट 10 तक तैयार करने के निर्देश दिए थे। हालांकि जानकारी के मुताबिक अभी तक मेडिकल बोर्ड ने विकलांगों का चिकित्सा परीक्षण नहीं किया। श्याम चंद आदि ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए स्वयं को नौकरी के लिए सही माना है। साथ ही नौकरी से हटाए जाने पर आपत्ति जताई। जिस पर अब न्यायालय ने 20 जनवरी को सुनवाई का निर्णय लिया है। जिसमें नगर निगम प्रशासन और मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करनी होगी।
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मेरठ। नगर निगम में हुए विकलांग भर्ती घोटाले का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें 20 जनवरी को सुनवाई होनी है। नगर निगम प्रशासन और सीएमओ लखनऊ के मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में देनी होगी। उसी के आधार पर हाईकोर्ट पहुंचे चारों विकलांग कर्मचारियों की नौकरी पर फैसला आएगा।
नगर निगम में 2016 में 18 विकलांग कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इसकी शिकायत कांग्रेसी नेता जाहिद अंसारी ने शासन में की थी। उस पर शासन ने जांच बैठा दी थी। जांच के दौरान ही दो कर्मचारी स्वयं नौकरी छोड़कर चले गए थे। बाकी कर्मचारियों का चिकित्सा परीक्षण मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया था। बोर्ड ने भदोही निवासी श्याम चंद सहित चार कर्मचारियों को अयोग्य घोषित करते हुए नौकरी से निकाल दिया था। जबकि 12 कर्मचारी उसी समय से निगम में नौकरी कर रहे हैं। तीन साल बाद श्याम चंद सहित चारों विकलांगों ने हाईकोर्ट की शरण ली। न्यायालय ने लखनऊ सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड टीम को चारों कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट 10 तक तैयार करने के निर्देश दिए थे। हालांकि जानकारी के मुताबिक अभी तक मेडिकल बोर्ड ने विकलांगों का चिकित्सा परीक्षण नहीं किया। श्याम चंद आदि ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए स्वयं को नौकरी के लिए सही माना है। साथ ही नौकरी से हटाए जाने पर आपत्ति जताई। जिस पर अब न्यायालय ने 20 जनवरी को सुनवाई का निर्णय लिया है। जिसमें नगर निगम प्रशासन और मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करनी होगी।
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