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चारागाह की जमीन पर बनाई जा रही गोशाला
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लावड़। गोवंश को आसरा देने के लिए मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्र में गोआश्रय स्थल बनाने का आदेश दिया था। इस पर लावड़ नगर पंचायत ने सालभर पहले गोआश्रय स्थल बनाने के लिए शासन को फाइल भेजी थी, लेकिन उसे हरी झंडी नहीं मिल सकी। इसके अतिरिक्त दौराला एवं लावड़ में जिन स्थानों को गोआश्रय स्थल के लिए चिह्नित किया गया वे चारागाह की जमीन हैं। हालांकि शासन ने पूर्व में ही चारागाह की जमीन पर गोशाला बनाने पर रोक लगा दी थी।
यह थी योजना
गांव एवं शहर में आवारा घूम रहे गोवंश को आश्रय देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देहात एवं शहर में गोआश्रय स्थल बनाने के निर्देश जारी किए थे। कान्हा योजना के नाम से लागू की गई इस योजना से प्रशासनिक अधिकारी गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं। सरकार द्वारा करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी गोवंश को सहारा नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण कड़ाके की ठंड में गोवंश आवारा घूमने को मजबूर हैं।
चारागाह की जमीन पर बना रहे गोशाला
दौराला नगर पंचायत की बात करें तो पबरसा मार्ग पर नगर पंचायत शासन से मंजूरी मिलने के बाद गोआश्रय स्थल बना रही है। जबकि यह जमीन कागजों में चारागाह के नाम से चढ़ी हुई है। चारागाह की जमीन पर पूर्व में ही शासन रोक लगा चुका है। पूर्व में चारागाह की जमीन पर गोशाला बनाए जाने की जानकारी मिलने पर शासन ने फलावदा एवं हस्तिनापुर के अकबरपुरगढ़ी में गोशाला निर्माण पर रोक लगा दी थी। दौराला नगर पंचायत 1.65 करोड़ की लागत से पबरसा मार्ग पर चारागाह की जमीन पर गोशाला बना रही है। हालांकि नगर पंचायत के पास पहले से ही पबरसा मार्ग स्थित चारागाह के अतिरिक्त 120 बीघा जमीन उपलब्ध है। वहीं, नगर पंचायत लावड़ ने भी चिंदौड़ी मार्ग स्थित राम तालाब की भूमि को चारागाह की बताकर यहां गोशाला निर्माण के लिए शासन को एक साल पहले प्रस्ताव भेजा था। हालांकि अभी तक शासन से यहां गोशाला बनाने के लिए मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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चारागाह या तालाब की भूमि
नगर पंचायत लावड़ चिंदौड़ी मार्ग स्थित राम तालाब की भूमि को चारागाह की भूमि बता रही है। हालांकि राम तालाब समिति इसे तालाब की भूमि बता रहा है। उन्होंने पूर्व में मंत्री डॉ. संजीव बालियान से इस जगह का जीर्णोंद्वारा कराने की मांग करते हुए विकास कार्य कराए थे। सवाल यह उठता है कि यह भूमि तालाब की है या चारागाह।
शासन से नहीं मिली मंजूरी
लावड़ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुधीर सिंह का कहना है कि मेरे कार्यकाल से पहले ही गोशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया था। मंजूरी मिलते ही गोशाला बनाई जाएगी और आवारा घूम रहे गोवंश को आश्रय दिया जाएगा।
60 फीसदी हो गया काम
दौराला नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह का कहना है कि पबरसा मार्ग पर चारागाह की जमीन पर गोशाला का निर्माण लगभग 60 फीसदी हो गया है। टिन शेड लगने बाकी हैं। दस फरवरी तक पूरा निर्माण कार्य करा दिया जाएगा।
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यह थी योजना
गांव एवं शहर में आवारा घूम रहे गोवंश को आश्रय देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देहात एवं शहर में गोआश्रय स्थल बनाने के निर्देश जारी किए थे। कान्हा योजना के नाम से लागू की गई इस योजना से प्रशासनिक अधिकारी गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं। सरकार द्वारा करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी गोवंश को सहारा नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण कड़ाके की ठंड में गोवंश आवारा घूमने को मजबूर हैं।
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चारागाह की जमीन पर बना रहे गोशाला
दौराला नगर पंचायत की बात करें तो पबरसा मार्ग पर नगर पंचायत शासन से मंजूरी मिलने के बाद गोआश्रय स्थल बना रही है। जबकि यह जमीन कागजों में चारागाह के नाम से चढ़ी हुई है। चारागाह की जमीन पर पूर्व में ही शासन रोक लगा चुका है। पूर्व में चारागाह की जमीन पर गोशाला बनाए जाने की जानकारी मिलने पर शासन ने फलावदा एवं हस्तिनापुर के अकबरपुरगढ़ी में गोशाला निर्माण पर रोक लगा दी थी। दौराला नगर पंचायत 1.65 करोड़ की लागत से पबरसा मार्ग पर चारागाह की जमीन पर गोशाला बना रही है। हालांकि नगर पंचायत के पास पहले से ही पबरसा मार्ग स्थित चारागाह के अतिरिक्त 120 बीघा जमीन उपलब्ध है। वहीं, नगर पंचायत लावड़ ने भी चिंदौड़ी मार्ग स्थित राम तालाब की भूमि को चारागाह की बताकर यहां गोशाला निर्माण के लिए शासन को एक साल पहले प्रस्ताव भेजा था। हालांकि अभी तक शासन से यहां गोशाला बनाने के लिए मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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चारागाह या तालाब की भूमि
नगर पंचायत लावड़ चिंदौड़ी मार्ग स्थित राम तालाब की भूमि को चारागाह की भूमि बता रही है। हालांकि राम तालाब समिति इसे तालाब की भूमि बता रहा है। उन्होंने पूर्व में मंत्री डॉ. संजीव बालियान से इस जगह का जीर्णोंद्वारा कराने की मांग करते हुए विकास कार्य कराए थे। सवाल यह उठता है कि यह भूमि तालाब की है या चारागाह।
शासन से नहीं मिली मंजूरी
लावड़ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुधीर सिंह का कहना है कि मेरे कार्यकाल से पहले ही गोशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया था। मंजूरी मिलते ही गोशाला बनाई जाएगी और आवारा घूम रहे गोवंश को आश्रय दिया जाएगा।
60 फीसदी हो गया काम
दौराला नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह का कहना है कि पबरसा मार्ग पर चारागाह की जमीन पर गोशाला का निर्माण लगभग 60 फीसदी हो गया है। टिन शेड लगने बाकी हैं। दस फरवरी तक पूरा निर्माण कार्य करा दिया जाएगा।