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गणेश स्वरूप में छिपा ब्रह्मज्ञान और विवेक : साध्वी अनीता
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- डीजेजेएस के गणेश चतुर्थी कार्यक्रम में रुद्री पाठ, भजन, कीर्तन, ध्यान, साधना और भंडारा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान डीजेजेएस शाखा की ओर से डी ब्लॉक शास्त्रीनगर स्थित राजवंश धर्मशाला में आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दिव्य रुद्री पाठ से हुआ। इसके बाद भगवान गणेश की महिमा में भजन और कीर्तन प्रस्तुत किए गए।
मुख्य वक्ता साध्वी अनीता भारती ने कहा कि भगवान गणेश का स्वरूप केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है। यह मानव जीवन के लिए गहरे आध्यात्मिक संदेशों का स्रोत है। उनका हाथी जैसा मुख विवेक और समझदारी के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। विशाल कान सिखाते हैं कि संसार की हर बात को स्वीकार करने के बजाय सत्य और ज्ञान को विवेकपूर्वक ग्रहण करना चाहिए। लंबोदर स्वरूप सद्गुणों और पुण्य कर्मों को जीवन में धारण करने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक विवेक और आध्यात्मिक समझ ब्रह्मज्ञान से विकसित होती है। पूर्ण आध्यात्मिक गुरु की शरण में ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने से मनुष्य में सही और गलत को पहचानने की क्षमता विकसित होती है। गणेश जी के विघ्नहर्ता और विघ्नविनायक स्वरूप की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के वास्तविक विघ्नों से मुक्ति के लिए ब्रह्मज्ञान को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान साधना और भंडारे के साथ हुआ।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान डीजेजेएस शाखा की ओर से डी ब्लॉक शास्त्रीनगर स्थित राजवंश धर्मशाला में आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दिव्य रुद्री पाठ से हुआ। इसके बाद भगवान गणेश की महिमा में भजन और कीर्तन प्रस्तुत किए गए।
मुख्य वक्ता साध्वी अनीता भारती ने कहा कि भगवान गणेश का स्वरूप केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है। यह मानव जीवन के लिए गहरे आध्यात्मिक संदेशों का स्रोत है। उनका हाथी जैसा मुख विवेक और समझदारी के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। विशाल कान सिखाते हैं कि संसार की हर बात को स्वीकार करने के बजाय सत्य और ज्ञान को विवेकपूर्वक ग्रहण करना चाहिए। लंबोदर स्वरूप सद्गुणों और पुण्य कर्मों को जीवन में धारण करने का संदेश देता है।
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उन्होंने कहा कि वास्तविक विवेक और आध्यात्मिक समझ ब्रह्मज्ञान से विकसित होती है। पूर्ण आध्यात्मिक गुरु की शरण में ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने से मनुष्य में सही और गलत को पहचानने की क्षमता विकसित होती है। गणेश जी के विघ्नहर्ता और विघ्नविनायक स्वरूप की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के वास्तविक विघ्नों से मुक्ति के लिए ब्रह्मज्ञान को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान साधना और भंडारे के साथ हुआ।
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