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गेलेंट्री अवार्ड वापस होगा, संपति की जांच भी होगी
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इंस्पेक्टर की घेराबंदी तेज, गैलेंट्री अवार्ड होगा वापस
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भ्रष्टाचार में फंसे इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा की घेराबंदी के लिए पुलिस ने जांच तेज कर दी। विवेचक सीओ क्राइम और उनकी टीम इंस्पेक्टर के खिलाफ सुबूत जुटाने में लगी है। गोपनीय तरीके से उसकी संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर को 15 अगस्त को मिला गैलेंट्री अवार्ड भी वापस हो सकता है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट डीजीपी और शासन को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट के बाद इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर बर्खास्तगी की भी कार्रवाई हो सकती है।
30 हजार की रिश्वत लेते हुए सदर थाने के हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह को एसपी सिटी व उनकी टीम ने मंगलवार शाम रंगेहाथ दबोचा था। पूछताछ में कांस्टेबल ने बताया है कि इंस्पेक्टर सदर बिजेंद्र सिंह राणा के कहने पर उसने वकार निवासी खतौली मुजफ्फरनगर से पैसा लिया है। वकार से 50 हजार की रकम इंस्पेक्टर पहले ही ले चुके हैं। बृहस्पतिवार को विवेचक सीओ क्राइम संजीव दीक्षित ने इंस्पेक्टर के खिलाफ कई जगह से सुबूत तलाशे। पुलिस का दावा है कि चोरी का ट्रक बताकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले इमरान व अब्दुल सलाम से भी इंस्पेक्टर ने मोटी रकम ली है।
ट्रक मालिक और ड्राइवर को सामने लाने के लिए भी पुलिस टीम लगी है। हालांकि पुलिस अभी ट्रक मालिक का पता नहीं लगा सकी। पुलिस का दावा है कि सुबूतों के आधार पर ही इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया जा सकता है। इंस्पेक्टर भी खुद को बचाने के लिए कानूनी दांवपेच में जुट गए हैं।
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मेरठ पुलिस ने मुकदमा और कार्रवाई के बारे में डीजीपी को अवगत करा दिया है। जिसके बाद इंस्पेक्टर सदर बाजार की पोस्टिंग कहां-कहां पर हुई, इसकी भी पड़ताल शुरू हो गई। इंस्पेक्टर के खिलाफ पुलिस रिकार्ड में पहले कोई शिकायत है या नहीं, इसके बारे में बिजनौर, मुरादाबाद समेत कई जनपदों से जानकारी ली जा रही है। दिल्ली के शातिर अपराधी शिवशक्ति नायडू के एनकाउंटर में इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा को 15 अगस्त पर गैलेंट्री अवार्ड मिला था। रिश्वतखोरी के मामले में फंसने के बाद यह वीरता पुरस्कार वापस हो सकता है। भ्रष्टाचार के मुकदमे की रिपोर्ट शासन को मेरठ पुलिस ने भेज दी है, उसी आधार पर गैलेंट्री अवार्ड वापस कराने की बात चल रही है।
संपत्ति की भी जांच पड़ताल शुरू
इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा और हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह की संपति की भी जांच शुरू हो गई है। बताया गया कि मनमोहन सिंह की पोस्टिंग लालकुर्ती थाने में थी, बिजेंद्र सिंह राणा ने ही सदर बाजार थाने में उसकी पोस्टिंग कराई थी। दोनों बेहद करीबी थे। दोनों की बिजनौर जिले में भी एक साथ पोस्टिंग थी। चर्चा है कि सोतीगंज में कबाड़ियों पर कार्रवाई के दौरान भी सदर पुलिस ने मोटा पैसा वसूला है।
सदर के साथ दूसरे थाने भी निशाने पर
सदर थाने के बाद अब दूसरे थाने भी एसएसपी के निशाने पर हैं। एसएसपी ने साफ कहा कि अगर किसी भी थाने में भ्रष्टाचार की शिकायत आई तो कार्रवाई करूंगा। इसको लेकर पुराने मुकदमे की निगरानी सर्किल के सीओ करेंगे। कई मामले में दरोगाओं ने पैसे लेकर मुकदमे में धाराओं में बड़ा खेल किया है। जिसकी शिकायत एसएसपी के पास पहुंची है।
वाहन चोरी के मुकदमे में खेल
ट्रक और अन्य वाहनों की चोरी के फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर बीमा क्लेम लेने के मामले में पुलिस की भूमिका सामने आई। अब बिना सीओ की जानकारी में डाले वाहन चोरी के मुकदमे नहीं किए जा सकेंगे और न ही एफआर लगाई जा सकेगी।
दिनभर सन्नाटा, दहशत में पुलिस वाले
सदर बाजार थाने का प्रभारी अभी नियुक्त नहीं हुआ है। बृहस्पतिवार को भी सदर थाने में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और पुलिस वाले दहशत में दिखाई दिए। इस भ्रष्टाचार के मामले में न जाने किस किस पर गाज गिरेगी, इसको लेकर थाने में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। वहां पर पुलिस काम करने को भी तैयार नहीं है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भ्रष्टाचार में फंसे इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा की घेराबंदी के लिए पुलिस ने जांच तेज कर दी। विवेचक सीओ क्राइम और उनकी टीम इंस्पेक्टर के खिलाफ सुबूत जुटाने में लगी है। गोपनीय तरीके से उसकी संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर को 15 अगस्त को मिला गैलेंट्री अवार्ड भी वापस हो सकता है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट डीजीपी और शासन को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट के बाद इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर बर्खास्तगी की भी कार्रवाई हो सकती है।
30 हजार की रिश्वत लेते हुए सदर थाने के हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह को एसपी सिटी व उनकी टीम ने मंगलवार शाम रंगेहाथ दबोचा था। पूछताछ में कांस्टेबल ने बताया है कि इंस्पेक्टर सदर बिजेंद्र सिंह राणा के कहने पर उसने वकार निवासी खतौली मुजफ्फरनगर से पैसा लिया है। वकार से 50 हजार की रकम इंस्पेक्टर पहले ही ले चुके हैं। बृहस्पतिवार को विवेचक सीओ क्राइम संजीव दीक्षित ने इंस्पेक्टर के खिलाफ कई जगह से सुबूत तलाशे। पुलिस का दावा है कि चोरी का ट्रक बताकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले इमरान व अब्दुल सलाम से भी इंस्पेक्टर ने मोटी रकम ली है।
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ट्रक मालिक और ड्राइवर को सामने लाने के लिए भी पुलिस टीम लगी है। हालांकि पुलिस अभी ट्रक मालिक का पता नहीं लगा सकी। पुलिस का दावा है कि सुबूतों के आधार पर ही इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया जा सकता है। इंस्पेक्टर भी खुद को बचाने के लिए कानूनी दांवपेच में जुट गए हैं।
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मेरठ पुलिस ने मुकदमा और कार्रवाई के बारे में डीजीपी को अवगत करा दिया है। जिसके बाद इंस्पेक्टर सदर बाजार की पोस्टिंग कहां-कहां पर हुई, इसकी भी पड़ताल शुरू हो गई। इंस्पेक्टर के खिलाफ पुलिस रिकार्ड में पहले कोई शिकायत है या नहीं, इसके बारे में बिजनौर, मुरादाबाद समेत कई जनपदों से जानकारी ली जा रही है। दिल्ली के शातिर अपराधी शिवशक्ति नायडू के एनकाउंटर में इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा को 15 अगस्त पर गैलेंट्री अवार्ड मिला था। रिश्वतखोरी के मामले में फंसने के बाद यह वीरता पुरस्कार वापस हो सकता है। भ्रष्टाचार के मुकदमे की रिपोर्ट शासन को मेरठ पुलिस ने भेज दी है, उसी आधार पर गैलेंट्री अवार्ड वापस कराने की बात चल रही है।
संपत्ति की भी जांच पड़ताल शुरू
इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा और हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह की संपति की भी जांच शुरू हो गई है। बताया गया कि मनमोहन सिंह की पोस्टिंग लालकुर्ती थाने में थी, बिजेंद्र सिंह राणा ने ही सदर बाजार थाने में उसकी पोस्टिंग कराई थी। दोनों बेहद करीबी थे। दोनों की बिजनौर जिले में भी एक साथ पोस्टिंग थी। चर्चा है कि सोतीगंज में कबाड़ियों पर कार्रवाई के दौरान भी सदर पुलिस ने मोटा पैसा वसूला है।
सदर के साथ दूसरे थाने भी निशाने पर
सदर थाने के बाद अब दूसरे थाने भी एसएसपी के निशाने पर हैं। एसएसपी ने साफ कहा कि अगर किसी भी थाने में भ्रष्टाचार की शिकायत आई तो कार्रवाई करूंगा। इसको लेकर पुराने मुकदमे की निगरानी सर्किल के सीओ करेंगे। कई मामले में दरोगाओं ने पैसे लेकर मुकदमे में धाराओं में बड़ा खेल किया है। जिसकी शिकायत एसएसपी के पास पहुंची है।
वाहन चोरी के मुकदमे में खेल
ट्रक और अन्य वाहनों की चोरी के फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर बीमा क्लेम लेने के मामले में पुलिस की भूमिका सामने आई। अब बिना सीओ की जानकारी में डाले वाहन चोरी के मुकदमे नहीं किए जा सकेंगे और न ही एफआर लगाई जा सकेगी।
दिनभर सन्नाटा, दहशत में पुलिस वाले
सदर बाजार थाने का प्रभारी अभी नियुक्त नहीं हुआ है। बृहस्पतिवार को भी सदर थाने में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और पुलिस वाले दहशत में दिखाई दिए। इस भ्रष्टाचार के मामले में न जाने किस किस पर गाज गिरेगी, इसको लेकर थाने में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। वहां पर पुलिस काम करने को भी तैयार नहीं है।