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मेरठः जीएसटी टैक्स में फर्जीवाड़े का खेल, 114 फर्म और मोबाइल नंबर एक 

Sun, 09 Feb 2020 02:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरीश रिज़वी, मेरठ
अरीश रिज़वी, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 09 Feb 2020 02:32 AM IST
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Fraudulent game in GST tax 114 firms and mobile number one
जीएसटी

अगर पैसे कमाने के सौ तरीके हैं तो जालसाजी और ठगी के हजार। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में टैक्स चोरी का बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। वाणिज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि मेरठ, दिल्ली और लखनऊ की 114 फर्म एक ही मोबाइल नंबर पर रजिस्टर्ड हैं, जो कि बंद हैं। 

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मेरठ में चार फर्मों की जांच करने गई टीम को एक भी फर्म नहीं मिली, जबकि इन फर्मों के जरिए करीब 22 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया है। ये सारी फर्म सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) में रजिस्टर्ड हैं।
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इनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया। विभागीय टीम को संदेह इसलिए हुआ, क्योंकि नवंबर-दिसंबर माह में ही इनका पंजीकरण हुआ और करोड़ों का टर्नओवर शुरू हो गया। 
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नई कंपनी का अचानक इतना टर्नओवर देख उन्होंने इन कंपनियों की जांच करने का निर्णय लिया। कॉपर, स्क्रैप, जिंक आदि का कथित कारोबार करने वाली ये फर्म नौचंदी थाना क्षेत्र में बताई गईं।

टीम वहां पहुंची तो पता चला कि यहां ऐसी कोई फर्म है ही नहीं। रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो वह बंद मिला। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर ओपी वर्मा ने बताया कि बड़ा फर्जीवाड़ा लग रहा है। जांच जारी है।

इस तरह कर रहे जालसाजी
जालसाज बड़े पैमाने पर फर्जी टैक्स इनवॉइस तैयार करते हैं। इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं। फर्जी कंपनियां को सिर्फ  कागजों में बनाते हैं। कंपनियों का कहीं कोई ऑफिस नहीं होता है।

इन कंपनियों को जीएसटी के तहत पंजीकृत भी करा दिया जाता है। कामकाज के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। बिना किसी लेन-देन के कंपनियों के नाम पर व्यापार दिखा कर टैक्स इनवॉइस तैयार कर लेते हैं और सरकार से मोटा रिफंड ले लेते हैं।

वेस्ट यूपी की 153 फर्म रडार पर

वेस्ट यूपी के नौ जिलों की 153 फर्म सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) के रडार पर हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इसकी सूची मेरठ स्थित सीजीएसटी कार्यालय को सौंपी है। आशंका है कि इनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फर्जीवाड़ा कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है।

इन फर्मों का सीजीएसटी टीम वेरिफिकेशन कर रही है। अगर हेरफेर पाई जाती है तो एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कराया जाएगा और अगर फर्म पाक साफ निकलती है तो उसे इसकी एनओसी भी दी जाएगी।

ये फर्म मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बड़ौत, शामली, अमरोहा, बिजनौर और रामपुर जिलों की हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत फर्म मुरादाबाद जनपद की हैं। 10 फर्म मेरठ जिले की हैं, जिनमें स्पोर्ट्स फर्म भी शामिल हैं। इन फर्मों को ‘रिस्की एक्सपोर्टर’ नाम दिया गया है।

यूं लिया रडार पर
- पांच करोड़ से ज्यादा आईटीसी लिया है
- फर्म आईटीसी लेने के बाद अचानक बंद हो गई
- जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गई और फिर बंद हो गई
- आईटीसी क्लेम लेने के बाद खाते बंद कर दिए गए
- फर्म से जुड़े मोबाइल नंबर बंद कर दिए गए या बदल दिए गए

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