गन्ना मूल्य भुगतान में बड़ा 'खेल', डीएम ने दी मिलों के अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी
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मुजफ्फरनगर में चीनी मिलों को जिस धनराशि का भुगतान किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करने के लिए करना था, उसको उन्होंने दूसरी मदों में खर्च कर दिया है। डीएम ने लंबित गन्ना मूल्य भुगतान और चीनी मिलों के आय संबंधित अभिलेखों की जांच कराई तो यह बात सामने आई है। जिलाधिकारी ने जिले सात निजी चीनी मिलों तितावी, रोहाना, मंसूरपुर, खाईखेडी, भैसाना, टिकौला, खतौली को इस संबंध में नोटिस जारी किए हैं, साथ ही उन्होंने गन्ना मूल्य भुगतान में गड़बड़ी करने पर इन चीनी मिलों के अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी दी है।
टैगिंग आदेश के अनुसार चीनी मिलों को चीनी बिक्री और अन्य स्रोतों से हुई आय में से 85 प्रतिशत का गन्ना मूल्य भुगतान में खर्च करना होता है। डीएम अजय शंकर पांडेय ने बताया कि चीनी मिलों ने टैंगिंग आदेश का उल्लंघन किया है, इसके साक्ष्य सामने आए हैं। मंसूरपुर चीनी मिल ने गन्ना मूल्य भुगतान को लंबित रखने के लिए चीनी मिल ने स्वीकृत सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) 270 करोड़ रुपये को घटाकर 225 करोड़ दर्शाया है। कोजन की बिक्री से प्राप्त 10.46 करोड़ रुपये का भुगतान भी गन्ना मूल्य भुगतान में नहीं किया है। उत्पादित चीनी को अपने बैंकर्स के पक्ष में बंधक नहीं किया। मिल ने 60 करोड़ रुपये की धनराशि को दूसरी मदों में खर्च किया है। तितावी, भैसाना और खाईखेड़ी चीनी मिल ने गन्ना मूल्य का भुगतान को लंबित रखने के उद्देश्य से चीनी बिक्री नहीं की। इन्होंने न तो नियम से भुगतान किया है और न ही भुगतान की कार्य योजना दी है। खाईखेड़ी मिल ने सात करोड़ 38 लाख, भैसाना चीनी मिल ने 12 करोड़ 67 लाख की धनराशि को दूसरी मदों में खर्च कर दिया।
डीएम ने बताया कि चीनी मिलों की अनियमितताओं पर मिल के प्रबंधक वित्त एवं लेखा और मैनेजिंग डायरेक्टर को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। यह किसानों के साथ छल है। चीनी मिलों के अध्याशियों को नोटिस जारी कर टैगिंग आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन करने को कहा गया है। अन्यथा चीनी मिल स्वामी के साथ-साथ चीनी मिल के प्रबंधक वित्त-लेखा और एमडी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 409, 420, 505 (आई)ख एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 में एफआईआर कराई जाएगी।
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