खुलने लगी पोल, सर्वे में पाई गई ये गलतियां, लाभार्थियों में घटकर रह गए सिर्फ 15 हजार किसान
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सर्वे में हुई जल्दबाजी की पोल खुलने लगी है। शुरू में तो तहसील प्रशासन द्वारा सर्वे के बाद आवेदन में दर्ज किए गए आंकड़ों के आधार पर किसानों की सम्मान निधि जारी कर दी गई, लेकिन अब पात्रों को आधार से जोड़ते ही गलतियां पकड़ में आने लगी हैं। तहसील द्वारा फीड आवेदन पत्र के डाटा और आधार में दर्ज किसान के नाम आदि में भिन्नता की वजह से हजारों किसानों की नवंबर माह की किस्त अटक गई है। जिले में 93 हजार से अधिक किसानों की पहली किस्त आई थी, लेकिन तीसरी किस्त पर ये आंकड़ा केवल 15 हजार पर ही अटक गया है।
मार्च में जनपद के 93 हजार 600 किसानों को पहली किस्त मिली थी। सरकार ने इस योजना में पारदर्शिता लाने को धीरे- धीरे इस योजना के पात्रों को आधार से जोड़ना शुरू किया। ये काम शुरू होते ही तहसीलों द्वारा दिए गए डाटा और आधार में दर्ज डाटा में भिन्नता मिलनी शुरू हुई। जैसे तहसील रिकॉर्ड में किसान का नाम रामपाल है, लेकिन आधार में रामपाल सिंह है। इसके अलावा जन्मतिथि में भी भिन्नता मिल रही है। तहसील रिकॉर्ड और आधार में दर्ज सूचनाओं में भिन्नता की वजह से ही सरकार द्वारा नवंबर माह की किस्त रोकी जा रही है। यही वजह है कि जहां पहली किश्त 93 हजार 600 किसानों को मिली थी। तीसरी किश्त केवल 15 हजार पर ही अटकी हुई है।
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किसानों के पास पहुंच रहे एसएमएस
इस संबंध में किसानों के पास एसएमएस भी पहुंच रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इन्हें सीधे किसानों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा रहा है। जिसमें उन्हें आवेदन और आधार में भिन्नता होने की सूचना देकर नवंबर महीने की किस्त रोकने की सूचना दी जा रही है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे इस खामी को पीएम किसान डॉटजीओवीडनॉट इन वेबसाइट पर खुद ठीक कर लें या जनसेवा केंद्र के माध्यम से करा लें।
गलतियां ठीक कराने को बनाए पांच केंद्र
किसानों के डाटा में हुई त्रुटियां किसान घर बैठकर भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की वेबसाइट पर कर सकते हैं। जो किसान ऐसा नहीं कर सकते उनके लिए कृषि विभाग ने अपने चार बीज केंद्रों पर लगे कंप्यूटर सिस्टम में आपरेटरों को भी इसमें लगाया है। ये केंद्र कांधला, कैराना, थानाभवन और झिंझाना में हैं। शामली में कृषि उपनिदेशक कार्यालय में ये केंद्र बनाए गए हैं। - शिवकुमार केसरी, कृषि उपनिदेशक
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