यूपी: कर्मचारियों के लाखों रुपये लेकर कंपनी फरार, सवालों के घेरे में ये बड़े अफसर
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करीब तीन माह से नगर में सफाई का काम कर रही कंपनी कर्मचारियों के लाखों रुपये लेकर फरार हो गई। दफ्तर बंद मिलने से सफाई कर्मियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने तहसील और शिव चौक पर हंगामा करते हुए जाम लगाया। बाद में पुलिस ने उन्हें नगर पालिका ले गई। वहां ईओ का घेराव करते हुए भुगतान दिलाने की मांग की। मामला यूपी के मुजफ्फरनगर शहर का है।
करीब तीन माह से एक कंपनी नगर में सफाई का काम कर रही थी। कंपनी की ओर से इमरान नामक युवक को रखा गया था। उसे नगर पालिका ने कंपनी बाग में कार्यालय भी दिया था। उसने करीब तीन सौ कर्मचारियों को सफाई कार्य के लिए रखा। यह कर्मचारी करीब तीन माह से नगर में सफाई का कार्य कर रहे थे। बीते कई दिनों से इमरान कार्यालय में नहीं आ रहा था। मंगलवार को कार्यालय बंद देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए।
इसके बाद संख्या में महिला-पुरुष सफाई कर्मचारी तहसील पहुंचे। उन्होंने हंगामा करते हुए मेरठ रोड पर जाम लगा दिया। बाद में वे शिव चौक आए और यहां भी जाम लगाया। पुलिस सफाई कर्मचारियों को समझा-बुझाकर नगर पालिका ले आई। यहां सफाई कर्मचारियों ने ईओ ओम गिरी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस राठी का घेराव कर लिया। कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी की ओर से उन्हें तीन महीने से भुगतान नहीं दिया गया है। प्रत्येक को लगभग आठ-आठ हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था। आरोप है कि इमरान ने दुकानदारों से सफाई कार्य के बदले लाखों रुपये इकट्ठा कर लिए, लेकिन कर्मचारियों का भुगतान नहीं किया। वह पूरी रकम लेकर फरार हो गया है।
उधर, ईओ ओम गिरी का कहना है कि सफाई कर्मियों ने पहले कभी नहीं बताया कि उन्हें काम पर रखने के लिए रुपये लिए गए हैं। यदि वे पहले बताते तो संबंधित के खिलाफ पहले ही कार्रवाई कर दी जाती। उन्होंने बताया कि आरोपी इमरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।
कर्मचारी रखने के नाम पर हुई वसूली
कंपनी की ओर से काम देख रहे इमरान ने ही सफाई कर्मचारियों को काम पर रखा। आरोप है कि काम पर रखने के लिए उसने रुपये वसूले। सफाई कर्मी अनिता, साधना, मोनिका समेत अन्य सभी ने ईओ और पुलिस के सामने काम पर रखने के लिए रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया। सफाई कर्मियों से ली गई रकम के साथ ही वह उनका लाखों रुपये का मानदेय दिए बिना ही फरार हो गया।
उधर, ईओ ओम गिरी का कहना है कि सफाई कर्मियों ने पहले कभी नहीं बताया कि उन्हें काम पर रखने के लिए रुपये लिए गए हैं। यदि वे पहले बताते तो संबंधित के खिलाफ पहले ही कार्रवाई कर दी जाती। उन्होंने बताया कि आरोपी इमरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।
पालिका अफसरों की भूमिका पर खड़े हुए सवाल
सफाई कर्मचारियों के लाखों रुपये लेकर फरार होने वाली कंपनी ने पालिका अधिकारियों की सहमति के बाद शहर में सफाई का काम शुरू किया था। उसके फरार हो जाने पर पालिका अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नगर में एटूजेड़ कंपनी के काम बंद करने के बाद से सफाई का कोई स्थाई बंदोबस्त नहीं हो सका। नगर पालिका ने इस कंपनी को शहर में सफाई व्यवस्था का जिम्मा सौंप दिया। बताया जाता है कि कंपनी के साथ यह तय हुआ था कि वह सफाई और कूड़ा कलेक्शन के बदले दुकानदारों और घरों से मासिक शुल्क वसूलेगी। इस संबंध में पालिका की ओर से कोई टेंडर भी जारी नहीं हुआ था। कंपनी की ओर से रखे गए कर्मचारी शहर में काम कर रहे थे। पालिका ने कंपनी के प्रतिनिधि इमरान को कंपनी बाग में कार्यालय भी दे रखा था। अब उसके फरार हो जाने पर पालिका अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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