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चार दिन बाद, फिर एक्सप्रेसवे पर दौड़ेंगे वाहन
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जीआर इंफ्रा कंपनी 16 मार्च को एनएचएआई को सौंप देगी एक्सप्रेसवे को
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण डासना से मेरठ को पूरा होने में कंपनी की डेडलाइन के मुताबिक चार दिन का समय बचा है। इससे पहले कंपनी की ओर से तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। कई मशीनों से सड़क की जांच शुरू कर दी गई है, जिससे एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद किसी तरह की दिक्कत न हो। एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे।
मशीनों के माध्यम से सड़क का समतलीकरण, चौड़ाई आदि मानकों को जांचा जा रहा है। हालांकि, अभी तक कोई भी दिक्कत इस चरण में नहीं है। इसकी रिपोर्ट भी लगातार एनएचएआई को भेजी जा रही है। ये सब मशीनों में लगे सेंसर की मदद से किया जाता है। जहां भी कोई दिक्कत एलाइनमेंट में आती है उसे तुरंत मशीन द्वारा बता दिया जाता है।
16 मार्च के बाद निर्माणकर्ता कंपनी जीआर इंफ्रा ने एनएचएआई को एक्सप्रेसवे को सौंपने की तैयारी कर ली है। 12 मार्च को भी एक्सप्रेसवे के इस चौथे चरण में लाइटिंग सहित अन्य कार्य को करने के लिए कंपनियां दौरा करेेंगी। इसके बाद ही एक्सप्रेसवे पर लाइट जलनी शुरू हो जाएंगी। सोलर पैनल को लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे 16 मार्च से पहले इसे भी जगमग कर दिया जाए। उच्च अधिकारी स्तर से भी वार्ता चल रही है कि क्या 16 के बाद बिना लोकार्पण के इसे खोल दिया जाए। हालांकि, डासना से हापुड़ वाले चरण की तर्ज पर ही इस 32 किमी के चरण को भी खोलने की तैयारी है। इसके खुलने के बाद मेरठ से दिल्ली जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
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रैपिड रेल : काम के समय सुरक्षा को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
मेरठ। रैपिड रेल कॉरिडोर के लिए चल रहे निर्माण में श्रमिकों को सुरक्षा के मानकों से रूबरू कराया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के समापन अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट साइट पर सुरक्षा और स्वास्थ्य की शपथ दिलाई गई। रैपिड रेल निर्माण में आठ हजार से अधिक श्रमिकों को तैनात किया गया है।
एक सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के महत्व को बताते हुए रोचक गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके लिए काम के समय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी को देखते हुए प्रत्येक निर्माण गतिविधि ठीक से बैरिकेड जोन के भीतर की जा रही है। इस कार्यक्रम में बचाव प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, डूबने की स्थिति में आपातकालीन तैयारी जैसे अभ्यासों में श्रमिकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस अभ्यास सत्र में कर्मचारियों और श्रमिकों को शिक्षित करने और संवेदनशील सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण डासना से मेरठ को पूरा होने में कंपनी की डेडलाइन के मुताबिक चार दिन का समय बचा है। इससे पहले कंपनी की ओर से तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। कई मशीनों से सड़क की जांच शुरू कर दी गई है, जिससे एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद किसी तरह की दिक्कत न हो। एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे।
मशीनों के माध्यम से सड़क का समतलीकरण, चौड़ाई आदि मानकों को जांचा जा रहा है। हालांकि, अभी तक कोई भी दिक्कत इस चरण में नहीं है। इसकी रिपोर्ट भी लगातार एनएचएआई को भेजी जा रही है। ये सब मशीनों में लगे सेंसर की मदद से किया जाता है। जहां भी कोई दिक्कत एलाइनमेंट में आती है उसे तुरंत मशीन द्वारा बता दिया जाता है।
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16 मार्च के बाद निर्माणकर्ता कंपनी जीआर इंफ्रा ने एनएचएआई को एक्सप्रेसवे को सौंपने की तैयारी कर ली है। 12 मार्च को भी एक्सप्रेसवे के इस चौथे चरण में लाइटिंग सहित अन्य कार्य को करने के लिए कंपनियां दौरा करेेंगी। इसके बाद ही एक्सप्रेसवे पर लाइट जलनी शुरू हो जाएंगी। सोलर पैनल को लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे 16 मार्च से पहले इसे भी जगमग कर दिया जाए। उच्च अधिकारी स्तर से भी वार्ता चल रही है कि क्या 16 के बाद बिना लोकार्पण के इसे खोल दिया जाए। हालांकि, डासना से हापुड़ वाले चरण की तर्ज पर ही इस 32 किमी के चरण को भी खोलने की तैयारी है। इसके खुलने के बाद मेरठ से दिल्ली जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
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रैपिड रेल : काम के समय सुरक्षा को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
मेरठ। रैपिड रेल कॉरिडोर के लिए चल रहे निर्माण में श्रमिकों को सुरक्षा के मानकों से रूबरू कराया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के समापन अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट साइट पर सुरक्षा और स्वास्थ्य की शपथ दिलाई गई। रैपिड रेल निर्माण में आठ हजार से अधिक श्रमिकों को तैनात किया गया है।
एक सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के महत्व को बताते हुए रोचक गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके लिए काम के समय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी को देखते हुए प्रत्येक निर्माण गतिविधि ठीक से बैरिकेड जोन के भीतर की जा रही है। इस कार्यक्रम में बचाव प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, डूबने की स्थिति में आपातकालीन तैयारी जैसे अभ्यासों में श्रमिकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस अभ्यास सत्र में कर्मचारियों और श्रमिकों को शिक्षित करने और संवेदनशील सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया।