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यूपी: ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी दबोचे, कई जिलों में फैला था नेटवर्क

Sun, 08 Aug 2021 08:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sun, 08 Aug 2021 08:16 AM IST
सार

पुलिस ने ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बताया गया कि पुलिस ने गिरोह के चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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Meerut News: four accused arrested in Online fraud
आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ में टीपीनगर पुलिस ने शनिवार को ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके माध्यम से 50 लाख रुपये की ठगी होना बताया गया है। मास्टर माइंड समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस का दावा है कि लॉकडाउन में आरोपियों ने यह धंधा शुरू किया था। सभी आरोपी सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनी में नौकरी कर चुके हैं।

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एडीजी ऑफिस में तैनात हेड कांस्टेबल गजराज सिंह के व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजकर साइबर अपराधियों ने दो अगस्त को 1938 रुपये की ठगी की। इसका केस टीपीनगर थाने में दर्ज हुआ था। साइबर सेल की टीम और टीपीनगर पुलिस ने इसकी जांच की। इसमें पुलिस ने चार आरोपी गौरव कुमार निवासी गोकुल विहार, अंकित शर्मा निवासी शांतिकुंज रोहटा रोड टीपीनगर, रजत शर्मा निवासी गोकुल विहार (हाल पता टीसीएस कंपनी नोएडा) और प्रिंस यादव निवासी शांति कुंज को गिरफ्तार किया गया है।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि गिरोह का लीडर रजत यादव निवासी राजस्थान है, जो अपने दो साथी शशांक और एक अन्य युवक के साथ फरार है। पुलिस का दावा है कि पकड़े गए आरोपी नोएडा में अलग-अलग कंपनी में सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनी में नौकरी करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, चार मोबाइल बरामद किए हैं। लॉकडाउन में चारों दोस्तों ने यह धंधा शुरू किया था। बताया गया कि हर माह इन चारों आरोपियों के हिस्से में पांच लाख रुपये आते थे। अभी तक 50 लाख की अलग-अलग लोगों से ठगने बताए हैं।
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मेरठ सहित कई जिलों में साइबर ठगों का फैला था नेटवर्क
लॉकडाउन में ऑनलाइन ठगी करने वाले आरोपियों ने नेटवर्क मेरठ, गाजियाबाद व नोएडा समेत कई जिलों में फैलाया हुआ है। सभी आरोपी सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनी में नौकरी करते थे। इसके चलते उनके पास हजारों लोगों के मोबाइल नंबर थे। उनके व्हाट्सएप नंबर पर आरोपियों ने लिंक भेजा और फिर उनके अकाउंट की जानकारी लेकर ठगी कर ली।

गिरोह का मास्टरमाइंड रजत यादव है, जिससे आरोपियों की मुलाकात एक साल पहले नोएडा में हुई थी। लॉकडाउन में यह गैंग बना और फिर मेरठ समेत कई जनपदों के मोबाइल पर लिंक भेजा। उसके बाद ठगी का सिलसिला शुरू हो गया है। इस गिरोह में करीब दस सदस्य बताए गए हैं। इन्हें अलग-अलग काम दिया गया था। अंकित कॉल सेंटर में, रजत आईटी कंपनी में सलाहकार, प्रिंस आईटी कंपनी में और गौरव सॉफ्टवेयर कंपनी में नोएडा काम करता था। ये चारों दोस्त मेरठ के निवासी हैं और सभी ने मिलकर ठगी का प्लान बनाया था। आरोपी कंपनी का काम घर से ऑनलाइन करते थे। बताया कि ठगी का नेटवर्क फैलाया। आरोपियों ने कंपनी का काम करना बंद कर दिया।

एडीजी ऑफिस की साइबर सेल ने किया खुलासा 
हेड कांस्टेबल से ठगी होने के बाद एडीजी ऑफिस की साइबर सेल ने जांच शुरू की। जिसमें बाद एक के बाद एक कारनामे आरोपियों के उजागर होने लगे थे। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीपीनगर पुलिस लगी, तब उनको पकड़ा गया। 

लक्ष्य देता था रजत यादव 
आरोपियों ने बताया कि रजत यादव गिरोह के सदस्यों को लक्ष्य देता था। इसके बाद वह काम करते थे। रजत सदस्य को प्रतिशत के हिसाब से रुपये देता था। किस नंबर पर मैसेज भेजने है, इसके बारे में रजत ही तय करता था। 

गिफ्ट का देते थे प्रलोभन
आरोपी व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजते थे। इसमें वह गिफ्ट निकलने की बात कहते थे। इस पर वह लिंक को खोलता था। तभी उसके बैंक के अकाउंट की सारी जानकारी ठगी करने वाले को पता चल जाती थी। 

पेटीएम एकाउंट में जाता थे रुपये 
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल में कई मैसेज मिले हैं। बताया कि ठगी के सभी रुपये पेटीएम एकाउंट में जाते थे। पुलिस ने इसकी जानकारी जुटाई है।

ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें...
- किसी भी अज्ञात नंबर से भेजे लिंक को न खोलें
- ई-मेल से भेजे मैसेज या लिंक को न खोलें
- बैंक से संबंधित जानकारी बिल्कुल न बताएं
- जो लिंक आया है, उसको गूगल पर पहले सर्च कर लें
- लिंक के सत्यापन के बाद ही उसके प्रयोग के बारे में सोचें

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