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Foundation Day of Meerut Unit... इस शहर की बोली-बानी और शिष्टाचार का अलग अंदाज: शंभुनाथ शुक्ला
Fri, 12 Dec 2025 05:35 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Fri, 12 Dec 2025 05:35 PM IST
सार
Meerut News: 12 दिसंबर को अमर उजाला की मेरठ यूनिट का स्थापना दिवस है। इस अवसर पर हम आपके साथ साझा कर रहे हैं अमर उजाला के पूर्व वरिष्ठ संपादकों के शानदार संस्मरण, जो कि सुनहरी यादों को समेटे हुए हैं।
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शंभुनाथ शुक्ल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जून 2011 में मुझे मेरठ अमर उजाला की जिम्मेदारी मिली। मेरठ मेरे लिए एक चुनौती था। मेरी सारी पत्रकारिता मध्य उत्तर प्रदेश और दिल्ली को कवर करते हुए गुजरी थी। मैंने दूसरे दैनिक अखबार में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान की कमान जरूर संभाली थी पर मेरठ का अनुभव पहला था। अमर उजाला में भी दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा को देखा था लेकिन वहां बैठकर मेरठ को समझना आसान नहीं था। मेरठ का अर्थ है पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश। मुझे उस जिले की कमान मिली थी जहां अखबार का अर्थ अमर उजाला था। मैंने सुन रखा था कि मेरठ में कोई भी प्रेस कांफ्रेंस तब तक नहीं शुरू होती थी, जब तक कि अमर उजाला का प्रतिनिधि वहां न पहुंच जाए।
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यह एक ऐसा जिला था जो सांप्रदायिक रूप से बहुत संवेदनशील था। एक भी गलत खबर कहर ढा सकती थी और किसी खबर को मिस करने का मतलब था, प्रसार का नीचे आ जाना। 10 जुलाई 2011 को मैंने मेरठ की कमान संभाल ली। पहली ही संपादकीय बैठक में काफी कुछ समझ में आ गया था। इस शहर की बोली-बानी और शहर का शिष्टाचार भी अलग। यहां लोग तू कर के बोलते हैं। यहां तक कि ड्राइवर भी बोलता सर जी तुमने ही तो कहा था। जबकि अब तक मैंने आप शब्द ही सुना था। आवाज भारी और दबंग। आप किसी के घर जाएं और फीकी चाय देने को कहें तो इतनी मीठी होती कि पीना मुश्किल। चाय के साथ बर्फी और पानी के साथ नमकीन परोसे जाने की परंपरा यहीं आ कर पाता चली। रोटी के साथ घी भी इतना अधिक कि उसे समेटना मुश्किल।
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शुरू-शुरू में तो मुझे बड़ी परेशानी हुई धीरे-धीरे लगा कि अरे, यहां के लोग तो कितने प्यारे हैं। घुल-मिल जाएं तो अपनी जान तक न्योछावर करने को आतुर। जो भी मिलने आता साथ में मिठाई अवश्य लाता। तब लगा कि इस शहर में मिठास बहुत अधिक है। यह गीतकार भारत भूषण का शहर है जिनके गीतों ने धूम मचा रखी थी। भारत भूषण से आखिरी मुलाकात यहीं हुई। यह पूरे देश में किसानों के सबसे बड़े नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का शहर है। जब तक उन्होंने राजनीति की संसदीय उनकी सीट बागपत मेरठ जिले का हिस्सा रही है। उनकी विधानसभा सीट छपरौली भी। अंग्रेजी के मशहूर पत्रकार अनिल माहेश्वरी मेरठ के ही हैं और अनिल बंसल भी। किसान नेता बाबा महेंद्र सिंह टिकैत भले मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव के थे लेकिन उनकी किसान राजनीति को शक्ति मेरठ से मिलती थी। शहर की कई बड़ी हस्तियां अमर उजाला के ऐसे पाठक थे जो एक भी त्रुटि पर फोन करते। स्टोरी पसंद आई तो प्रशंसा भी। मैं कुल मिलाकर यही कह सकता हूं कि मेरठ मेरे जीवन का सर्वोत्तम सेंटर रहा।
- शंभुनाथ शुक्ला
- शंभुनाथ शुक्ला