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Meerut News: समूह बनाकर कर रहीं सिलाई, 50 से अधिक महिलाओं को दे रहीं रोजगार
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ग्राम ककराला में सिलाई का कार्य करती महिला समूह से जुडी महिलाएं
सहारनपुर। व्यक्ति ठान ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। इसे साबित कर दिखाया है ओमप्लेस सैनी ने। वह समूह बनाकर न सिर्फ स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि 50 से अधिक महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही हैं।
नकुड़ विकासखंड के गांव ककराला निवासी ओमप्लेस सैनी ने बताया कि वर्ष 1999 में शादी के समय मात्र कक्षा पांच तक पढ़ी थीं। शादी के बाद उन्होंने पति के सहयोग से न सिर्फ इतिहास और समाज शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर किया, बल्कि पीसीएस की लिखित परीक्षा तक पास की। वर्ष 2016 में सरस्वती स्वयं सहायता महिला समूह का गठन किया। उन्होंने समूह की महिलाओं के साथ मिलकर सिलाई का काम शुरू किया।
सबसे पहले उन्होंने वर्ष 2019 में ऑर्डर पर डेढ़ लाख कपड़े के मास्क तैयार किए। इसके बाद उन्होंने नकुड़ क्षेत्र के कई सरकारी और अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं की ड्रेस तैयार करना शुरू की। काम बढ़ता देखकर उन्होंने अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। उनके समूह ने हर घर झंडा अभियान के लिए चार हजार तिरंगे झंडे तैयार किए। इसके अलावा खादी की एक संस्था के लिए पांच हजार झंडे भी बनाए। अभी वह माता की चुनरी और श्रीराम लिखे झंडे तैयार कर रहीं हैं। सिलाई के कार्य से वह प्रतिमाह औसतन 20 से 25 हजार रुपये तक कमाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहीं हैं। इस कार्य में अपने साथ उन्होंने 50 से अधिक महिलाओं को जोड़ा हुआ है। बिजली आपूर्ति के लिए उन्होंने सोलर सिस्टम और सिलाई के लिए हाईटेक मशीनें भी लगा रखीं हैं।
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नकुड़ विकासखंड के गांव ककराला निवासी ओमप्लेस सैनी ने बताया कि वर्ष 1999 में शादी के समय मात्र कक्षा पांच तक पढ़ी थीं। शादी के बाद उन्होंने पति के सहयोग से न सिर्फ इतिहास और समाज शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर किया, बल्कि पीसीएस की लिखित परीक्षा तक पास की। वर्ष 2016 में सरस्वती स्वयं सहायता महिला समूह का गठन किया। उन्होंने समूह की महिलाओं के साथ मिलकर सिलाई का काम शुरू किया।
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सबसे पहले उन्होंने वर्ष 2019 में ऑर्डर पर डेढ़ लाख कपड़े के मास्क तैयार किए। इसके बाद उन्होंने नकुड़ क्षेत्र के कई सरकारी और अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं की ड्रेस तैयार करना शुरू की। काम बढ़ता देखकर उन्होंने अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। उनके समूह ने हर घर झंडा अभियान के लिए चार हजार तिरंगे झंडे तैयार किए। इसके अलावा खादी की एक संस्था के लिए पांच हजार झंडे भी बनाए। अभी वह माता की चुनरी और श्रीराम लिखे झंडे तैयार कर रहीं हैं। सिलाई के कार्य से वह प्रतिमाह औसतन 20 से 25 हजार रुपये तक कमाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहीं हैं। इस कार्य में अपने साथ उन्होंने 50 से अधिक महिलाओं को जोड़ा हुआ है। बिजली आपूर्ति के लिए उन्होंने सोलर सिस्टम और सिलाई के लिए हाईटेक मशीनें भी लगा रखीं हैं।
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