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Meerut News: अफजलगढ़ सिंचाई खंड में गड़बड़ी पर वन विभाग की भी टिकी नजर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अफजलगढ़ सिंचाई खंड में फर्जीवाड़े की जांच का दायरा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। लेखाधिकारी द्वारा लगाए फर्जी एमएम-11 प्रपत्रों के आरोपों पर वन विभाग ने नजर भी जा पहुंची है। वन विभाग भी इस मामले में केस दर्ज कर सकता है। अभी सीडीओ, एडीएम और थाने में दर्ज रिपोर्ट के बाद पुलिस के स्तर से जांच चल रही है। अब चौथी जांच वन विभाग के स्तर से होने जा रही है। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर की ओर से खो नदी के किनारे गांव नाथाडोई, नंदगांव एवं नयागांव के पास कटाव सुरक्षात्मक कार्य कराया गया था। लेखाधिकारी ने डीएम को पत्र देकर शिकायत की थी कि इसके बिल भुगतान में कूटरचित फर्जी खनिज प्रपत्र लगाए गए, जिनके जरिए 4158 घन मीटर उपखनिज सत्यापित किया गया।
उक्त उपखनिज के परिवहन प्रपत्र यानि रायल्टी को उत्तर प्रदेश खनिकर्म एवं भूतत्व निदेशालय की साइट पर भी ऑनलाइन सत्यापित किया गया है। आरोप लगाया कि इससे अवैध खनन को बढ़ावा दिया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शासन को गुमराह करते हुए राजस्व की हानि पहुंचाई गई है।
एक ओर जहां मंगलवार को सीडीओ पूर्ण बोरा ने लेखाधिकारी से पूछताछ की थी, वहीं अब सिंचाई खंड के अफसरों से भी पूछताछ होनी है। वन विभाग के सूत्रों की जाने तो वन विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। जांच में यदि एमएम प्रपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो वन विभाग भी इस पर कार्रवाई कर सकता है।
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बिजनौर। अफजलगढ़ सिंचाई खंड में फर्जीवाड़े की जांच का दायरा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। लेखाधिकारी द्वारा लगाए फर्जी एमएम-11 प्रपत्रों के आरोपों पर वन विभाग ने नजर भी जा पहुंची है। वन विभाग भी इस मामले में केस दर्ज कर सकता है। अभी सीडीओ, एडीएम और थाने में दर्ज रिपोर्ट के बाद पुलिस के स्तर से जांच चल रही है। अब चौथी जांच वन विभाग के स्तर से होने जा रही है। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर की ओर से खो नदी के किनारे गांव नाथाडोई, नंदगांव एवं नयागांव के पास कटाव सुरक्षात्मक कार्य कराया गया था। लेखाधिकारी ने डीएम को पत्र देकर शिकायत की थी कि इसके बिल भुगतान में कूटरचित फर्जी खनिज प्रपत्र लगाए गए, जिनके जरिए 4158 घन मीटर उपखनिज सत्यापित किया गया।
उक्त उपखनिज के परिवहन प्रपत्र यानि रायल्टी को उत्तर प्रदेश खनिकर्म एवं भूतत्व निदेशालय की साइट पर भी ऑनलाइन सत्यापित किया गया है। आरोप लगाया कि इससे अवैध खनन को बढ़ावा दिया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शासन को गुमराह करते हुए राजस्व की हानि पहुंचाई गई है।
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एक ओर जहां मंगलवार को सीडीओ पूर्ण बोरा ने लेखाधिकारी से पूछताछ की थी, वहीं अब सिंचाई खंड के अफसरों से भी पूछताछ होनी है। वन विभाग के सूत्रों की जाने तो वन विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। जांच में यदि एमएम प्रपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो वन विभाग भी इस पर कार्रवाई कर सकता है।
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