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इलाज के लिए जाइए जिला अस्पताल, मिलेगी तारीख पर तारीख
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 May 2017 12:35 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अगर आप कोई ऐसी बीमारी का इलाज जिला अस्पताल में कराने जा रहे हैं, जिसकी जांच अल्ट्रासाउंड से होनी है तो फिलहाल आप इलाज के बारे में भूल जाइए। जिला अस्पताल से आपको तारीख ही मिलने वाली है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए एडवांस बुकिंग चल रही है। बुकिंग के बाद आपको 20 से 25 दिन इंतजार करना होगा, तब कहीं जाकर आपकी अल्ट्रासाउंड जांच हो पाएगी। इसके लिए बाकायदा विभाग के बाहर एक नोटिस चस्पा कर दिया गया है, जिस पर लिखा है कि ‘अल्ट्रसाउंड के लिए सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पंजीकरण कराकर तारीख एवं नंबर प्राप्त करें।’
जिला अस्पताल इसका कारण बताता है कि यहां एक ही रेडियोलोजिस्ट डॉ. एके जैन हैं। वह सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक एक्सरे की जांच और रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड जांच और फिर सीटी स्कैन करने का नंबर आता है। रेडियोलोजिस्ट विभाग के लिए हर रोज 250 से 300 से ज्यादा जांचे लिखी जाती हैं। इनमें सवा सौ से ज्यादा एक्सरे जांच, 100 से अधिक अल्ट्रासाउंड और 20-25 सीटी स्कैन की होती हैं। अमूमन हर रोज 70-80 एक्सरे और 30 से 35 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। एक्सरे तक की रिपोर्ट अगले दिन दी जा रही है। सीटी स्कैन के लिए भी एक दिन पहले पंजीकरण कराना पड़ता है। इससे अस्पताल के रेडियोलोजी विभाग में मरीजों की जांच के लिए वेटिंग बढ़ गई है।
अल्ट्रासाउंड केलिए 20 से 25 दिन आगे की तारीख दी जा रही है। इससे मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दी गई तारीख पर अगर मरीज नहीं आ पाता तो उसे दोबारा अगली तारीख दी जाती है। मरीज प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हो रहे हैं। इस अव्यवस्था के बावजूद इसे ठीक करने केलिए गंभीरता से कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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क्या करें मरीज: जिले के दोनों सरकारी अस्पताल खुद ‘बीमार’
मेरठ केदोनों सरकारी अस्पताल खुद ‘बीमार’ हैं, ऐसे में मरीज क्या करें। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए एडवांस बुकिंग करानी पड़ रही है तो मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की फिल्म ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य एक्सरे वाले 200 से ज्यादा मरीजों को हर रोज एक्सरे करने से मना कर दिया जाता है। एमआरआई और सीटी स्कैन की फिल्म को लेकर वहां ऐसी मारामारी है।
क्यों होता है अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग जिसे सोनोग्राफी भी कहा जाता है। अल्ट्रासाउंड से भ्रूण का आकलन। पित्ताशय की थैली रोग का निदान। रक्त वाहिकाओं में प्रवाह का मूल्यांकन। बायोप्सी या ट्यूमर के इलाज के लिए। थायरॉयड ग्रंथि की जांच। दिल का अध्ययन। कैंसर केकुछ रूपों का निदान। जननांग और प्रोस्टेट आदि असामान्यताएं के बारे में पता लगाया जा सकता है।
रेडियोलोजिस्ट केदो पद हैं खाली
जिला अस्पताल में पिछले करीब ढाई साल से दो पद खाली चल रहे हैं। इससे पहले डॉक्टर संजीव गुप्ता और डॉ. एकेजैन थे। डॉ. संजीव गुप्ता का यहां से स्थानांतरण हो गया था। तब से हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रही है।
क्या हैं रेट
जिला अस्पताल प्राइवेट में
अल्ट्रासाउंड मुफ्त 800-900 रुपये
डिजिटल एक्सरे मुफ्त 250-300 रुपये
सीटी स्कैन 500 रुपये 1200-1500 रुपये
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जिला अस्पताल इसका कारण बताता है कि यहां एक ही रेडियोलोजिस्ट डॉ. एके जैन हैं। वह सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक एक्सरे की जांच और रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड जांच और फिर सीटी स्कैन करने का नंबर आता है। रेडियोलोजिस्ट विभाग के लिए हर रोज 250 से 300 से ज्यादा जांचे लिखी जाती हैं। इनमें सवा सौ से ज्यादा एक्सरे जांच, 100 से अधिक अल्ट्रासाउंड और 20-25 सीटी स्कैन की होती हैं। अमूमन हर रोज 70-80 एक्सरे और 30 से 35 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। एक्सरे तक की रिपोर्ट अगले दिन दी जा रही है। सीटी स्कैन के लिए भी एक दिन पहले पंजीकरण कराना पड़ता है। इससे अस्पताल के रेडियोलोजी विभाग में मरीजों की जांच के लिए वेटिंग बढ़ गई है।
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अल्ट्रासाउंड केलिए 20 से 25 दिन आगे की तारीख दी जा रही है। इससे मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दी गई तारीख पर अगर मरीज नहीं आ पाता तो उसे दोबारा अगली तारीख दी जाती है। मरीज प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हो रहे हैं। इस अव्यवस्था के बावजूद इसे ठीक करने केलिए गंभीरता से कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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क्या करें मरीज: जिले के दोनों सरकारी अस्पताल खुद ‘बीमार’
मेरठ केदोनों सरकारी अस्पताल खुद ‘बीमार’ हैं, ऐसे में मरीज क्या करें। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए एडवांस बुकिंग करानी पड़ रही है तो मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की फिल्म ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य एक्सरे वाले 200 से ज्यादा मरीजों को हर रोज एक्सरे करने से मना कर दिया जाता है। एमआरआई और सीटी स्कैन की फिल्म को लेकर वहां ऐसी मारामारी है।
क्यों होता है अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग जिसे सोनोग्राफी भी कहा जाता है। अल्ट्रासाउंड से भ्रूण का आकलन। पित्ताशय की थैली रोग का निदान। रक्त वाहिकाओं में प्रवाह का मूल्यांकन। बायोप्सी या ट्यूमर के इलाज के लिए। थायरॉयड ग्रंथि की जांच। दिल का अध्ययन। कैंसर केकुछ रूपों का निदान। जननांग और प्रोस्टेट आदि असामान्यताएं के बारे में पता लगाया जा सकता है।
रेडियोलोजिस्ट केदो पद हैं खाली
जिला अस्पताल में पिछले करीब ढाई साल से दो पद खाली चल रहे हैं। इससे पहले डॉक्टर संजीव गुप्ता और डॉ. एकेजैन थे। डॉ. संजीव गुप्ता का यहां से स्थानांतरण हो गया था। तब से हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रही है।
क्या हैं रेट
जिला अस्पताल प्राइवेट में
अल्ट्रासाउंड मुफ्त 800-900 रुपये
डिजिटल एक्सरे मुफ्त 250-300 रुपये
सीटी स्कैन 500 रुपये 1200-1500 रुपये