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खाद्य सुरक्षा विभाग बंद करे टारगेट बेस सैंपलिंग
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मेरठ। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का अधिवेशन सीसीएस यूनिवर्सिटी स्थित नेता जी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में हुआ। अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सर्वाधिक भ्रष्टाचार खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। व्यापारियों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। संगठन अब विभागीय अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन करेगा।
व्यापार मंडल के चुनाव में लोकेश अग्रवाल को दोबारा अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने कहा कि फूड एक्ट में खाद्य सुरक्षा अधिकारी टारगेट बेस पर सेंपलिंग करते हैं। सेंपलिंग घटिया सामान या मिलावट के आधार पर होनी चाहिए। अधिकारियों को सैंपलिंग के लंबे चौड़े टारगेट दिए गए। टारगेट की आड़ में व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। एक्ट के अनुसार निर्माता से प्रत्येक प्रोडक्ट का 6 माह में एक बार सैंपल एनएबीएल लैब में कराना होता है। पास सेंपल के पत्र को पोर्टल पर अपलोड करना होता है। जब हर 6 महीने में सैंपल की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होती है तो फिर बाजार में सेंपलिंग क्यों की जाती है। ऐसे में दोहरी व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फूड एक्ट में सरकार द्वारा निर्मित से एनुअल रिटर्न फार्म डी1 अपलोड करने के नाम पर भारी पेनल्टी वसूल की जा रही है। आम निर्माता को डी 1 अपलोड करने की जानकारी नहीं दी गई थी। फार्म डी 1 पर लगाई जा रही पेनल्टी तुरंत समाप्त होनी चाहिए। जिन व्यापारियों ने जमा कर दी है, उनके पैसे भी वापस होने चाहिए। इस तरह की पेनल्टी छोटे मझौले व्यापारों को नष्ट करने का काम करेगी।
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व्यापार मंडल के चुनाव में लोकेश अग्रवाल को दोबारा अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने कहा कि फूड एक्ट में खाद्य सुरक्षा अधिकारी टारगेट बेस पर सेंपलिंग करते हैं। सेंपलिंग घटिया सामान या मिलावट के आधार पर होनी चाहिए। अधिकारियों को सैंपलिंग के लंबे चौड़े टारगेट दिए गए। टारगेट की आड़ में व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। एक्ट के अनुसार निर्माता से प्रत्येक प्रोडक्ट का 6 माह में एक बार सैंपल एनएबीएल लैब में कराना होता है। पास सेंपल के पत्र को पोर्टल पर अपलोड करना होता है। जब हर 6 महीने में सैंपल की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होती है तो फिर बाजार में सेंपलिंग क्यों की जाती है। ऐसे में दोहरी व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फूड एक्ट में सरकार द्वारा निर्मित से एनुअल रिटर्न फार्म डी1 अपलोड करने के नाम पर भारी पेनल्टी वसूल की जा रही है। आम निर्माता को डी 1 अपलोड करने की जानकारी नहीं दी गई थी। फार्म डी 1 पर लगाई जा रही पेनल्टी तुरंत समाप्त होनी चाहिए। जिन व्यापारियों ने जमा कर दी है, उनके पैसे भी वापस होने चाहिए। इस तरह की पेनल्टी छोटे मझौले व्यापारों को नष्ट करने का काम करेगी।
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